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दिल्ली के एकमात्र ट्रामा सेंटर में नहीं मिल रहे मरीजों को इम्प्लांट

Mon, 10 Dec 2018 12:12 AM IST
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:12 AM IST
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दिल्ली के एकमात्र ट्रामा सेंटर में नहीं मिल रहे मरीजों को इम्प्लांट
सुश्रुत ट्रामा सेंटर में नहीं मिल रहे मरीजों को इम्प्लांट
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सुश्रुत ट्रामा सेंटर के दावों की आरटीआई के जरिये खुली पोल
30 फीसदी मरीजों को इम्प्लांट के लिए खर्च करने पड़ रहे हैं पैसे
एक चौथाई मरीजों को ही अब तक इम्प्लांट निशुल्क उपलब्ध
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सिविल लाइन स्थित दिल्ली सरकार के एकमात्र सुश्रुत ट्रामा सेंटर अकसर खामियों को लेकर सुर्खियों में रहता है। हाल ही में यहां एक आईसीयू के मरीज में उपचार के दौरान कीड़े पड़ने का मामला उजागर हुआ था। अब एक आरटीआई के जरिये जानकारी मिली है कि इस अस्पताल में मरीजों को इम्प्लांट की सुविधा नहीं मिल पा रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो केवल एक चौथाई मरीजों को ही अब तक इम्प्लांट निशुल्क उपलब्ध हो सके हैं। आरटीआई कार्यकर्ता को स्वास्थ्य विभाग एवं अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार मार्च 2016 से लेकर अप्रैल 2018 तक सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर में कुल 2376 ऑपरेशन किए गए। इनमें से 1951 को इम्प्लांट लगाए गए, लेकिन इन 1951 मरीजों से केवल 510 मरीजों को ही अस्पताल की तरफ इम्प्लांट दिया गया। इसका मतलब साफ है कि 1441 मरीजों को अस्पताल से मिलने वाला निशुल्क इम्प्लांट नहीं मिला और इसके लिए उन्हें बाजार में पैसा खर्च करना पड़ा। मरीजों की शिकायत है कि उन्हें इम्प्लांट के लिए अस्पताल से कोई सुविधा नहीं मिलती है। इसके लिए उन्हें पैसे खर्च करने ही पड़ते हैं। वहीं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय बहल की मानें तो अस्पताल की तरफ से इम्प्लांट नहीं दिया जाता है। कई बार मरीज की आवश्यकता को देखते हुए लोकल परचेज से इम्प्लांट मंगाए जाते हैं, लेकिन इसके लिए कोई टेंडर नहीं होने की वजह से सभी मरीजों को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।

चार में से तीन मरीज बाहर से खरीदते हैं इम्प्लांट
अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों का आरोप है कि हर चार में से तीन मरीजों को बाहर से ही इम्प्लांट खरीदना पड़ता है। इसके लिए इम्प्लांट कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटीव हर समय अस्पताल में ही जमावड़ा लगाए रहते हैं। हालात यह है कि मरीजों को इन रिप्रेजेंटेटीवों को ढूंढने की भी जहमत नहीं उठानी पड़ती है, क्योंकि या तो डॉक्टर ही इन रिप्रेजेंटेटीवों को इसकी सूचना दे देते हैं या फिर उनका नंबर थमा देते हैं। हाल ही में अपने परिजन का कोहनी का ऑपरेशन कराने वाले चंद्रप्रकाश ने बताया कि उनके मरीज को दो प्लेट लगीं, लेकिन इसके लिए अस्पताल में ही रिप्रेंजेंटेटीव मिल गया, जिसने 18 हजार में दो इम्प्लांट दिए।
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