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45 दिनों से जारी डीटीसी के अस्थायी कर्मचारियों का धरना
Updated Wed, 05 Dec 2018 10:59 PM IST
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डीटीसी के अस्थायी कर्मियों
का धरना 45 दिन से जारी
- कर्मचारियों ने डीटीसी के चेयरमैन से की मुलाकात
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अपनी मांगों को लेकर पिछले 45 दिनों से डीटीसी मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे अस्थायी कर्मचारियों ने डीटीसी चेयरमैन मनोज कुमार से मुलाकात की। कर्मचारियों ने अपनी नौकरी की बहाली और समान काम के लिए समान वेतन की मांग उनके समक्ष रखी। डीटीसी कांट्रेक्चुअल एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष बाल्मीकि झा, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज शर्मा और यूनियन के अन्य कर्मचारियों ने डीटीसी चेयरमैन को कर्मचारियों की हालत से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा उनकी कोई मांग नहीं सुनी जा रही। कर्मचारियों का कहना है कि इस बीच डीटीसी चेयरमैन ने कर्मचारियों को काम पर वापस रखने के बारे में विचार करने की बात कही। हालांकि फिलहाल कर्मचारियों को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। कर्मचारियों का कहना है कि अपनी मांगों के लिए धरने पर जाने के कारण डीटीसी ने सैकड़ों कर्मचारियों को काम से निकाल दिया है, जिस कारण कर्मचारी आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं।
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का धरना 45 दिन से जारी
- कर्मचारियों ने डीटीसी के चेयरमैन से की मुलाकात
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अपनी मांगों को लेकर पिछले 45 दिनों से डीटीसी मुख्यालय के बाहर धरने पर बैठे अस्थायी कर्मचारियों ने डीटीसी चेयरमैन मनोज कुमार से मुलाकात की। कर्मचारियों ने अपनी नौकरी की बहाली और समान काम के लिए समान वेतन की मांग उनके समक्ष रखी। डीटीसी कांट्रेक्चुअल एंप्लाइज यूनियन के अध्यक्ष बाल्मीकि झा, कार्यकारी अध्यक्ष मनोज शर्मा और यूनियन के अन्य कर्मचारियों ने डीटीसी चेयरमैन को कर्मचारियों की हालत से अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा उनकी कोई मांग नहीं सुनी जा रही। कर्मचारियों का कहना है कि इस बीच डीटीसी चेयरमैन ने कर्मचारियों को काम पर वापस रखने के बारे में विचार करने की बात कही। हालांकि फिलहाल कर्मचारियों को कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। कर्मचारियों का कहना है कि अपनी मांगों के लिए धरने पर जाने के कारण डीटीसी ने सैकड़ों कर्मचारियों को काम से निकाल दिया है, जिस कारण कर्मचारी आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं।
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