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प्राइवेट लॉकर का खारी बावली के व्यापारी फायदे गिना रहे है
Updated Tue, 04 Dec 2018 09:53 AM IST
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25 साल से हैं लॅाकर, अपनी सुविधा के लिए रखते थे रुपये
-चांदनी चौक में मिले प्राइवेट लॉकर का व्यापारी गिना रहे फायदे
-गल्ले का पैसा शाम को कहां जमा करे इसे लेकर व्यापारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली का खारी बावली बाजार आजकल चर्चा में है। इस बाजार में इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी चल रही है। इससे बाजार में चल रहा लॉकर सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। हालांकि व्यापारी इससे अलग राय रखते हैं। वे लॉकर को भारत सरकार से मंजूर बता रहे है और इस सिस्टम के फायदे गिना रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि इस मामले को ऐसा बना दिया गया है जैसे सभी व्यापारी चोर हैं। कारोबारियों की माने तो करीब 25 साल से चल रहे इस लॉकर में कभी घपलेबाजी नहीं हुई।
व्यापारियों का कहना है कि वह कारोबार का प्रतिदिन का हिसाब-किताब कर लॉकर में पैसा जमा कर देते थे। इस तरह से रास्ते में होने वाली लूटपाट से बच जाते थे। गल्ले का पैसा दूसरे दिन या वक्त मिलने पर बैंक में जमा करा देते थे। खारी-बावली किराना एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गुप्ता का कहना है कि चोरी का डर रहता है इसलिए लॉकर का उपयोग किया जाता है। इस लॉकर का खुलासा होने के बाद अपराधियों को भी इसका पता चल गया है। ऐसे में व्यापारी लॉकर में पैसा नहीं जमा कर गल्ले में ही रख कर घर चले जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि अपराधी दुकानों का ताला तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो हवाला का काम कर रहे हैं उन्हें पकड़ा जाए। आम व्यापारियों को बेवजह क्यों परेशान किया जा रहा है।
लॉकरों पर छापेमारी से पुरानी दिल्ली के व्यापारी आश्चर्य में हैं। उनका कहना है कि गल्ले में प्रतिदिन का जितना पैसा होता था उसे इसी लॉकर में रख कर घर जाते थे। दूसरे दिन सुविधा के अनुसार बैंक या अन्य लेनदेन में इस्तेमाल करते थे। क्योंकि जब घर जाते थे तो बैंक बंद हो जाता था। सदर बाजार के व्यापारी देवराज बावेजा का कहना है कि व्यापारी जब दुकानें बंद कर घर जाते हैं तो उनसे पार्किंग में व रास्ते में पैसा छीन लिया जाता है। व्यापारी सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। इसमें कालेधन की कोई बात नजर नहीं आती।
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जीएसटी के बाद ज्यादा चलन में आया
जीएसटी के बाद लॉकर का महत्व ज्यादा बढ़ गया था। दरअसल सभी सामान पर्ची काटकर बिक्री नहीं की जा सकती इसलिए रकम रखने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा था। अब गल्ले का पैसा दुकान में छोड़ना या साथ में लेकर घर जाना उनके लिए जोखिम हो गया है।
बराबर निगरानी में रहता था लॉकर
ंप्राइवेट लॉकर बराबर सीसीटीवी के निगरानी में रहता था। करीब 300 लॉकर का इस्तेमाल व्यापारी करते थे। लॉकर सालाना किराये पर व्यापारियों को मिलता था। गार्ड की भी तैनाती पुख्ता सुरक्षा के लिए की गई थी।
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-चांदनी चौक में मिले प्राइवेट लॉकर का व्यापारी गिना रहे फायदे
-गल्ले का पैसा शाम को कहां जमा करे इसे लेकर व्यापारी परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली का खारी बावली बाजार आजकल चर्चा में है। इस बाजार में इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी चल रही है। इससे बाजार में चल रहा लॉकर सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है। हालांकि व्यापारी इससे अलग राय रखते हैं। वे लॉकर को भारत सरकार से मंजूर बता रहे है और इस सिस्टम के फायदे गिना रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि इस मामले को ऐसा बना दिया गया है जैसे सभी व्यापारी चोर हैं। कारोबारियों की माने तो करीब 25 साल से चल रहे इस लॉकर में कभी घपलेबाजी नहीं हुई।
व्यापारियों का कहना है कि वह कारोबार का प्रतिदिन का हिसाब-किताब कर लॉकर में पैसा जमा कर देते थे। इस तरह से रास्ते में होने वाली लूटपाट से बच जाते थे। गल्ले का पैसा दूसरे दिन या वक्त मिलने पर बैंक में जमा करा देते थे। खारी-बावली किराना एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गुप्ता का कहना है कि चोरी का डर रहता है इसलिए लॉकर का उपयोग किया जाता है। इस लॉकर का खुलासा होने के बाद अपराधियों को भी इसका पता चल गया है। ऐसे में व्यापारी लॉकर में पैसा नहीं जमा कर गल्ले में ही रख कर घर चले जा रहे हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि अपराधी दुकानों का ताला तोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो हवाला का काम कर रहे हैं उन्हें पकड़ा जाए। आम व्यापारियों को बेवजह क्यों परेशान किया जा रहा है।
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लॉकरों पर छापेमारी से पुरानी दिल्ली के व्यापारी आश्चर्य में हैं। उनका कहना है कि गल्ले में प्रतिदिन का जितना पैसा होता था उसे इसी लॉकर में रख कर घर जाते थे। दूसरे दिन सुविधा के अनुसार बैंक या अन्य लेनदेन में इस्तेमाल करते थे। क्योंकि जब घर जाते थे तो बैंक बंद हो जाता था। सदर बाजार के व्यापारी देवराज बावेजा का कहना है कि व्यापारी जब दुकानें बंद कर घर जाते हैं तो उनसे पार्किंग में व रास्ते में पैसा छीन लिया जाता है। व्यापारी सुरक्षा के लिए इसका इस्तेमाल करते थे। इसमें कालेधन की कोई बात नजर नहीं आती।
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जीएसटी के बाद ज्यादा चलन में आया
जीएसटी के बाद लॉकर का महत्व ज्यादा बढ़ गया था। दरअसल सभी सामान पर्ची काटकर बिक्री नहीं की जा सकती इसलिए रकम रखने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा था। अब गल्ले का पैसा दुकान में छोड़ना या साथ में लेकर घर जाना उनके लिए जोखिम हो गया है।
बराबर निगरानी में रहता था लॉकर
ंप्राइवेट लॉकर बराबर सीसीटीवी के निगरानी में रहता था। करीब 300 लॉकर का इस्तेमाल व्यापारी करते थे। लॉकर सालाना किराये पर व्यापारियों को मिलता था। गार्ड की भी तैनाती पुख्ता सुरक्षा के लिए की गई थी।