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एक घंटे में ही केन्या के मरीज का बदल दिया घुटना
Updated Thu, 22 Nov 2018 06:39 AM IST
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एक घंटे में ही केन्या के मरीज का बदल दिया घुटना
- देश में पहली बार डे केयर घुटना प्रत्यारोपण का दावा
- दिल्ली मैक्स अस्पताल ने इस्तेमाल की नई तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । दिल्ली के मैक्स अस्पताल ने पहली बार एक घंटे के भीतर केन्या निवासी एक मरीज का बायां घुटना बदल दिया। अस्पताल का दावा है कि नई तकनीक के माध्यम से ये भारत में पहला डे केयर मामला है। इसमें खर्च में 30 से 35 प्रतिशत कमी के साथ संक्रमण का खतरा भी कम होता है।
जोसफ मैना गिथेम्बा (60) को 15 वर्ष पहले हुई दुर्घटना में चोट लगी थी। उसे लंबे समय से बाएं घुटने में तकलीफ थी। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में डॉ. विक्रम म्हास्कर की देखरेख में उनका ऑपरेशन किया गया। डॉ. विक्रम का कहना है कि इस केस में न्यूनतम शल्य की तकनीक अपनाई गई। उन्होंने बताया कि आमतौर पर घुटना प्रत्यारोपण के लिए तीन से चार घंटे का ऑपरेशन करना होता है। इसके बाद कुछ दिन तक अस्पताल में आराम भी जरूरी है। लेकिन डे केयर तकनीक से समय और खर्च दोनों को कम किया है। खून का नुकसान कम होता है और मरीज को कम समय तक अस्पताल में भर्ती रहना होता है। मरीज जोसफ मायना गितेम्बा का कहना है कि उन्हें सर्जरी के लिए तैयार करने से पहले नियमित व्यायाम करवाया गया। अब वह आसानी से अपने पैरों पर खड़ा हो पा रहे हैं।
12 घंटे ही रहना होता है अस्पताल
डॉ. विक्रम ने बताया कि केवल 1 घंटे की सर्जरी के बाद मरीज को केवल 12 घंटे अस्पताल में रहना पड़ा। मरीज के पुनर्वास के लिए उन्हें सर्जरी के 6 घंटों के अंदर वाकर की मदद से चला दिया जाता है। उन्होंने ये भी बताया कि अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल विदेशों में हो रहा है। अब भारत में भी उनके अस्पताल से इसकी शुरूआत हो चुकी है।
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- देश में पहली बार डे केयर घुटना प्रत्यारोपण का दावा
- दिल्ली मैक्स अस्पताल ने इस्तेमाल की नई तकनीक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । दिल्ली के मैक्स अस्पताल ने पहली बार एक घंटे के भीतर केन्या निवासी एक मरीज का बायां घुटना बदल दिया। अस्पताल का दावा है कि नई तकनीक के माध्यम से ये भारत में पहला डे केयर मामला है। इसमें खर्च में 30 से 35 प्रतिशत कमी के साथ संक्रमण का खतरा भी कम होता है।
जोसफ मैना गिथेम्बा (60) को 15 वर्ष पहले हुई दुर्घटना में चोट लगी थी। उसे लंबे समय से बाएं घुटने में तकलीफ थी। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में डॉ. विक्रम म्हास्कर की देखरेख में उनका ऑपरेशन किया गया। डॉ. विक्रम का कहना है कि इस केस में न्यूनतम शल्य की तकनीक अपनाई गई। उन्होंने बताया कि आमतौर पर घुटना प्रत्यारोपण के लिए तीन से चार घंटे का ऑपरेशन करना होता है। इसके बाद कुछ दिन तक अस्पताल में आराम भी जरूरी है। लेकिन डे केयर तकनीक से समय और खर्च दोनों को कम किया है। खून का नुकसान कम होता है और मरीज को कम समय तक अस्पताल में भर्ती रहना होता है। मरीज जोसफ मायना गितेम्बा का कहना है कि उन्हें सर्जरी के लिए तैयार करने से पहले नियमित व्यायाम करवाया गया। अब वह आसानी से अपने पैरों पर खड़ा हो पा रहे हैं।
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12 घंटे ही रहना होता है अस्पताल
डॉ. विक्रम ने बताया कि केवल 1 घंटे की सर्जरी के बाद मरीज को केवल 12 घंटे अस्पताल में रहना पड़ा। मरीज के पुनर्वास के लिए उन्हें सर्जरी के 6 घंटों के अंदर वाकर की मदद से चला दिया जाता है। उन्होंने ये भी बताया कि अभी तक इस तकनीक का इस्तेमाल विदेशों में हो रहा है। अब भारत में भी उनके अस्पताल से इसकी शुरूआत हो चुकी है।
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