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एनएसडी में शुरू हुआ नन्हें कलाकरों का उत्सव जश्र-ए-बचपन
Updated Sat, 17 Nov 2018 11:11 PM IST
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एनएसडी में नन्हें कलाकारों के उत्सव
जश्र-ए-बचपन की हुई शुरुआत
- नौ दिन तक चलेगा उत्सव, दुनियाभर के 500 से अधिक कलाकार होंगे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में शनिवार से नन्हें कलाकारों के नौ दिवसीय रंगमंच उत्सव जश्न-ए-बचपन की शुरूआत हो गई। उत्सव का नेतृत्व डॉ. लाइक हुसैन कर रहे हैं। इसमें असम, राजस्थान, पंजाब और मणिपुर समेत भारत के विभिन्न राज्यों के विविध लोक नृत्यों और संगीत की रंगारंग प्रस्तुति पेश की जाएंगी। दुनियाभर के 500 से ज्यादा कलाकार इसमें भागीदारी करेंगे।
उत्सव के 14वें संस्करण के उद्घाटन अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जश्न-ए-बचपन जैसे फेस्टिवल बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं। उत्सव आयोजित करने के अलावा, यहां रविवार क्लब जैसे विभिन्न अल्पकालिक पाठ्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जो कि एक बहुत अच्छी पहल है। रंगमंच हमें औपनिवेशिक शक्तियों ने नहीं दिया, बल्कि यह हमारा खुद का कला रूप है, जो हमारी ही भूमि पर विकसित हुआ और सदियों से इसका अभ्यास होता आया है।
इस मौके पर प्रतिष्ठित रंगमंच निर्देशक रुद्रप्रसाद सेन गुप्ता और अभिनेता मनोज जोशी, एनएसडी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अर्जुन देव चरन, निदेशक प्रभारी सुरेश शर्मा और अब्दुल लतीफ खटाना समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
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इस मौके पर नाटक समूहों द्वारा उड़ान के मंचन के तहत चार प्रस्तुतियां पेश की गईं, जिनमें थांग टा पुंग चोलम (मणिपुर), कालबेलिया (राजस्थान), गोटिपुआ (ओडिशा) और भांगड़ा/लोक संगीत (पंजाब) शामिल थे। इसके साथ ही असम के बिहु, सिक्किम के शेर नृत्य, नगालैंड के काबुल नागा नृत्य और मणिपुर स्टिक बैलेंस लोक नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
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जश्र-ए-बचपन की हुई शुरुआत
- नौ दिन तक चलेगा उत्सव, दुनियाभर के 500 से अधिक कलाकार होंगे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में शनिवार से नन्हें कलाकारों के नौ दिवसीय रंगमंच उत्सव जश्न-ए-बचपन की शुरूआत हो गई। उत्सव का नेतृत्व डॉ. लाइक हुसैन कर रहे हैं। इसमें असम, राजस्थान, पंजाब और मणिपुर समेत भारत के विभिन्न राज्यों के विविध लोक नृत्यों और संगीत की रंगारंग प्रस्तुति पेश की जाएंगी। दुनियाभर के 500 से ज्यादा कलाकार इसमें भागीदारी करेंगे।
उत्सव के 14वें संस्करण के उद्घाटन अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव अरुण गोयल बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जश्न-ए-बचपन जैसे फेस्टिवल बच्चों के व्यक्तित्व विकास में सहायक हैं। उत्सव आयोजित करने के अलावा, यहां रविवार क्लब जैसे विभिन्न अल्पकालिक पाठ्यक्रम भी आयोजित होते हैं, जो कि एक बहुत अच्छी पहल है। रंगमंच हमें औपनिवेशिक शक्तियों ने नहीं दिया, बल्कि यह हमारा खुद का कला रूप है, जो हमारी ही भूमि पर विकसित हुआ और सदियों से इसका अभ्यास होता आया है।
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इस मौके पर प्रतिष्ठित रंगमंच निर्देशक रुद्रप्रसाद सेन गुप्ता और अभिनेता मनोज जोशी, एनएसडी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अर्जुन देव चरन, निदेशक प्रभारी सुरेश शर्मा और अब्दुल लतीफ खटाना समेत अन्य लोग उपस्थित थे।
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इस मौके पर नाटक समूहों द्वारा उड़ान के मंचन के तहत चार प्रस्तुतियां पेश की गईं, जिनमें थांग टा पुंग चोलम (मणिपुर), कालबेलिया (राजस्थान), गोटिपुआ (ओडिशा) और भांगड़ा/लोक संगीत (पंजाब) शामिल थे। इसके साथ ही असम के बिहु, सिक्किम के शेर नृत्य, नगालैंड के काबुल नागा नृत्य और मणिपुर स्टिक बैलेंस लोक नृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।