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दक्षिणी निगम क्षेत्र को हरित कचरा मुक्त बनाने की पहल
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:15 AM IST
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श्रेडर चंद मिनटों में पत्तों को कर देगा बारीक, नहीं बढ़ेगा प्रदूषण
आधुनिक मशीनों की मदद से पत्तों से तैयार होगा खाद, इस्तेमाल शुरू
दक्षिणी निगम क्षेत्र को हरित कचरा मुक्त बनाने की पहल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सड़कों के इर्द गिर्द पत्ते जलाने से अब न तो प्रदूषण बढ़ेगा और न ही पतझड़ में इधर-उधर बिखरेंगे। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के बागवानी विभाग ने पार्कों के रखरखाव नर्सरियों और हरित कचरा प्रबंधन केंद्रों में नई मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। स्थायी समिति की अध्यक्षा शिखा राय ने ग्रेटर कैलाश-वन की नर्सरी में मैकेनिकल उपकरणों के इस्तेमाल की शुरुआत की है। इन उपकरणों में आधुनिक श्रेडर चिपर, लीफ पिकर, हेज ट्रिमर के अलावा लॉन मूवर और ब्रश कटर सहित अन्य मशीनें शामिल हैं। पोल प्रूनर के जरिये पार्कों के रख-रखाव का कार्य जल्द और आसान हो जाएगा। इनका इस्तेमाल चारों क्षेत्र के हरित कचरा प्रबंधन केंद्रों सहित पार्कों में किया जाएगा। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. आलोक सिंह ने मशीनों के संचालन की प्रक्रिया समझाते हुए इनसे होने वाले फायदे के बारे में भी जानकारी दी।
पहले चरण में 10 नई लीफ पिकर मशीनें
निदेशक डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि लीफ पिकर मशीनें तेजी से पार्कों और सड़कों से पत्ते एकत्रित कर इन्हेें आधुनिक श्रेडर-चिपर मशीनों में डालने के महज चंद मिनट पर महीन कर देगा। इनका इस्तेमाल क्यारियों में खाद के तौर पर किया जाएगा। पहले चरण में 10 नई लीफ पिकर मशीनें, 10 नई आधुनिक श्रेडर मशीनें प्राप्त की जानी हैं, जिनमें से 14 हासिल कर ली गई हैं।
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दक्षिणी निगम क्षेत्र में रोजाना निकलता है 40 टन हरित कचरा
स्थायी समिति की अध्यक्ष शिखा राय ने बताया कि दक्षिणी निगम क्षेत्र में रोजाना करीब 40 टन हरित कचरा निकलता है। इसके प्रबंधन में नई मशीनें बेहद कारगर साबित होंगी। इनके इस्तेमाल से निगम क्षेत्र को हरित कचरे से मुक्त बनाने सहित इन्हें लैंडफिल साइट तक पहुंचाना भी नहीं होगा। इससे पत्तों को जलाने पर शिकंजा कसेगा, जिससे प्रदूषण नियंत्रण होगा। वाहनों के आवागमन के दौरान कहीं भी पत्ते नहीं बिखरेंगे, जिससे स्वच्छता को एक और नया आयाम स्थापित होगा।
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आधुनिक मशीनों की मदद से पत्तों से तैयार होगा खाद, इस्तेमाल शुरू
दक्षिणी निगम क्षेत्र को हरित कचरा मुक्त बनाने की पहल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सड़कों के इर्द गिर्द पत्ते जलाने से अब न तो प्रदूषण बढ़ेगा और न ही पतझड़ में इधर-उधर बिखरेंगे। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के बागवानी विभाग ने पार्कों के रखरखाव नर्सरियों और हरित कचरा प्रबंधन केंद्रों में नई मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। स्थायी समिति की अध्यक्षा शिखा राय ने ग्रेटर कैलाश-वन की नर्सरी में मैकेनिकल उपकरणों के इस्तेमाल की शुरुआत की है। इन उपकरणों में आधुनिक श्रेडर चिपर, लीफ पिकर, हेज ट्रिमर के अलावा लॉन मूवर और ब्रश कटर सहित अन्य मशीनें शामिल हैं। पोल प्रूनर के जरिये पार्कों के रख-रखाव का कार्य जल्द और आसान हो जाएगा। इनका इस्तेमाल चारों क्षेत्र के हरित कचरा प्रबंधन केंद्रों सहित पार्कों में किया जाएगा। बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. आलोक सिंह ने मशीनों के संचालन की प्रक्रिया समझाते हुए इनसे होने वाले फायदे के बारे में भी जानकारी दी।
पहले चरण में 10 नई लीफ पिकर मशीनें
निदेशक डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि लीफ पिकर मशीनें तेजी से पार्कों और सड़कों से पत्ते एकत्रित कर इन्हेें आधुनिक श्रेडर-चिपर मशीनों में डालने के महज चंद मिनट पर महीन कर देगा। इनका इस्तेमाल क्यारियों में खाद के तौर पर किया जाएगा। पहले चरण में 10 नई लीफ पिकर मशीनें, 10 नई आधुनिक श्रेडर मशीनें प्राप्त की जानी हैं, जिनमें से 14 हासिल कर ली गई हैं।
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दक्षिणी निगम क्षेत्र में रोजाना निकलता है 40 टन हरित कचरा
स्थायी समिति की अध्यक्ष शिखा राय ने बताया कि दक्षिणी निगम क्षेत्र में रोजाना करीब 40 टन हरित कचरा निकलता है। इसके प्रबंधन में नई मशीनें बेहद कारगर साबित होंगी। इनके इस्तेमाल से निगम क्षेत्र को हरित कचरे से मुक्त बनाने सहित इन्हें लैंडफिल साइट तक पहुंचाना भी नहीं होगा। इससे पत्तों को जलाने पर शिकंजा कसेगा, जिससे प्रदूषण नियंत्रण होगा। वाहनों के आवागमन के दौरान कहीं भी पत्ते नहीं बिखरेंगे, जिससे स्वच्छता को एक और नया आयाम स्थापित होगा।
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