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ठंड के दिनों में बिजली की मांग को देखते हुए ऐक्शन प्लान तैयार किया
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:15 AM IST
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ठंड के महीनों में बिजली मिलेगी पर्याप्त, एक्शन प्लान तैयार
- सर्दियों में भी 4800 मेगावॉट तक बिजली की मांग पहुंचेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ठंड की धमक पड़ते ही बिजली की मांग बढ़ने लगी है। बिजली कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि इस साल सर्दियों में दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड गर्मी के दिनों की तरह ही 4800 मेगावॉट तक पहुंचेगी। इसे ध्यान में रख एक्शन प्लान तैयार किया गया है, ताकि ठंड के महीनों में बिजली की समस्या न हो।
बिजली कंपनी बीएसईएस का दावा है कि लांग टर्म आधार पर बिजली खरीद समझौते के तहत बिजली की आपूर्ति में इस साल भी बाधा उत्पन्न नहीं होगी। बीएसईएस को पीक डिमांड के हिसाब से पर्याप्त बिजली मिलेगी। पावर बैंकिंग मॉड्यूल के तहत भी दिसंबर से फरवरी महीने के दौरान अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था रहेगी। अचानक बिजली की मांग बढ़ भी जाती है तो पावर एक्सचेंज से शॉर्ट-टर्म आधार पर बिजली की खरीद की जाएगी। समय-समय पर बिजली की मांग का सटीक अनुमान लगाया जाएगा। इसके लिए लोड फॉरकास्टिंग सिस्टम के अलावा मॉडलिंग तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा वेदर फॉरकास्टिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा, इससे यह पता चलता रहेगा कि कल का मौसम कैसा रहेगा, बारिश होगी, तापमान गिरेगा या बढ़ेगा, हवा की गति कैसी रहेगी।
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- सर्दियों में भी 4800 मेगावॉट तक बिजली की मांग पहुंचेगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ठंड की धमक पड़ते ही बिजली की मांग बढ़ने लगी है। बिजली कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि इस साल सर्दियों में दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड गर्मी के दिनों की तरह ही 4800 मेगावॉट तक पहुंचेगी। इसे ध्यान में रख एक्शन प्लान तैयार किया गया है, ताकि ठंड के महीनों में बिजली की समस्या न हो।
बिजली कंपनी बीएसईएस का दावा है कि लांग टर्म आधार पर बिजली खरीद समझौते के तहत बिजली की आपूर्ति में इस साल भी बाधा उत्पन्न नहीं होगी। बीएसईएस को पीक डिमांड के हिसाब से पर्याप्त बिजली मिलेगी। पावर बैंकिंग मॉड्यूल के तहत भी दिसंबर से फरवरी महीने के दौरान अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था रहेगी। अचानक बिजली की मांग बढ़ भी जाती है तो पावर एक्सचेंज से शॉर्ट-टर्म आधार पर बिजली की खरीद की जाएगी। समय-समय पर बिजली की मांग का सटीक अनुमान लगाया जाएगा। इसके लिए लोड फॉरकास्टिंग सिस्टम के अलावा मॉडलिंग तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा वेदर फॉरकास्टिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा, इससे यह पता चलता रहेगा कि कल का मौसम कैसा रहेगा, बारिश होगी, तापमान गिरेगा या बढ़ेगा, हवा की गति कैसी रहेगी।
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