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ड्रोन डिजाइन व बनाकर मेहर बाबा पुरस्कार का उठाए लाभ
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:15 AM IST
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ड्रोन डिजाइन बना मेहर बाबा पुरस्कार का उठाए लाभ
- पहली बार इंजीनियरिंग के छात्र भारतीय वायुसेना की ड्रोन प्रतियोगिता में लेंगे भाग
- तीन स्तर पर प्रतियोगिता, कारगिल विजय दिवस पर विजेताओं के नामों की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी, इंजीनियरिंग कॉलेज समेत विश्वविद्यालयों के छात्र अब भारतीय वायुसेना के लिए ड्रोन डिजाइन बनाएंगे। इसी के तहत पहली बार अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कालेजों के छात्र भी भारतीय वायुसेना की ड्रोन प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग कॉलेजों को ड्रोन प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन करने को कहा है। खास बात यह है कि तीन स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा कारगिल विजय दिवस के मौके पर की जाएगी।
एआईसीटीई प्रबंधन के मुताबिक, तकनीकी सोच को बढ़ावा देने और उनकी नवोन्मेषी क्षमता का लाभ उठाने के लिए भारतीय वायुसेना ने ड्रोन विकसित करने और उसका डिजाइन बनाने के लिए मेहर बाबा पुरस्कार की घोषणा की है। भारत में रक्षा क्षेत्र में यह पहली प्रतियोगिता है। प्रतियोगिता का मकसद ऐसे मानवरहित विमान (यूएवी) विकसित करना है, जो वायुसेना को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में मदद कर सकें। आपदा राहत कार्यों में ड्रोन बेहद उपयोगी साबित होते हैं। तीन चरणों में विभाजित प्रतियोगिता भारतीय वायुसेना के मेक इन इंडिया के प्रयासों को बढ़ावा देगी। इच्छुक छात्र 28 नवंबर तक आवेदन भेज सकते हैं। प्रतियोगिता का पहला चरण 16 दिसंबर को होगा, जिसमें छात्रों को प्रजेंटेशन देनी रहेगी। दूसरे चरण में जीपीएस सहित दस ड्रोन को दस किलोमीटर तक तीन हजार फीट तक उड़ाना होगा। तीसरे चरण में 50 किलोमीटर तक उड़ाना होगा। पहले चरण में पास होने पर टीम को 25 लाख रुपये मिलेगा।
गौरतलब है कि मेहर बाबा का नाम मेहर सिंह था और लोग उन्हें प्यार से मेहर बाबा कहते हैं। वह भारतीय वायुसेना के वीर योद्धा थे और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अदम्य साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया। वह 1936 में रॉयल इंडियन एयरफोर्स में भर्ती हुए थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कश्मीर के पुंछ में विमान उतारने वाले वायुसेना के पहले अधिकारी थे।
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- पहली बार इंजीनियरिंग के छात्र भारतीय वायुसेना की ड्रोन प्रतियोगिता में लेंगे भाग
- तीन स्तर पर प्रतियोगिता, कारगिल विजय दिवस पर विजेताओं के नामों की घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। आईआईटी, इंजीनियरिंग कॉलेज समेत विश्वविद्यालयों के छात्र अब भारतीय वायुसेना के लिए ड्रोन डिजाइन बनाएंगे। इसी के तहत पहली बार अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त इंजीनियरिंग कालेजों के छात्र भी भारतीय वायुसेना की ड्रोन प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग कॉलेजों को ड्रोन प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन करने को कहा है। खास बात यह है कि तीन स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिता के विजेताओं के नामों की घोषणा कारगिल विजय दिवस के मौके पर की जाएगी।
एआईसीटीई प्रबंधन के मुताबिक, तकनीकी सोच को बढ़ावा देने और उनकी नवोन्मेषी क्षमता का लाभ उठाने के लिए भारतीय वायुसेना ने ड्रोन विकसित करने और उसका डिजाइन बनाने के लिए मेहर बाबा पुरस्कार की घोषणा की है। भारत में रक्षा क्षेत्र में यह पहली प्रतियोगिता है। प्रतियोगिता का मकसद ऐसे मानवरहित विमान (यूएवी) विकसित करना है, जो वायुसेना को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में मदद कर सकें। आपदा राहत कार्यों में ड्रोन बेहद उपयोगी साबित होते हैं। तीन चरणों में विभाजित प्रतियोगिता भारतीय वायुसेना के मेक इन इंडिया के प्रयासों को बढ़ावा देगी। इच्छुक छात्र 28 नवंबर तक आवेदन भेज सकते हैं। प्रतियोगिता का पहला चरण 16 दिसंबर को होगा, जिसमें छात्रों को प्रजेंटेशन देनी रहेगी। दूसरे चरण में जीपीएस सहित दस ड्रोन को दस किलोमीटर तक तीन हजार फीट तक उड़ाना होगा। तीसरे चरण में 50 किलोमीटर तक उड़ाना होगा। पहले चरण में पास होने पर टीम को 25 लाख रुपये मिलेगा।
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गौरतलब है कि मेहर बाबा का नाम मेहर सिंह था और लोग उन्हें प्यार से मेहर बाबा कहते हैं। वह भारतीय वायुसेना के वीर योद्धा थे और दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने अदम्य साहस और पराक्रम का प्रदर्शन किया। वह 1936 में रॉयल इंडियन एयरफोर्स में भर्ती हुए थे। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कश्मीर के पुंछ में विमान उतारने वाले वायुसेना के पहले अधिकारी थे।
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