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सत्येंद्र जैन को चेयरमैन अस्पतालों पर कब्जा करना चाहते हैं केजरीवाल
Updated Tue, 16 Oct 2018 06:45 AM IST
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स्वास्थ्य मंत्री को बनाने के प्रस्ताव असंवैधानिक : विजेंद्र
- नेता प्रतिपक्ष बोले- सत्येंद्र जैन को चेयरमैन अस्पतालों पर कब्जा करना चाहते हैं केजरीवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । दिल्ली के अस्पतालों को लेकर नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि स्वशासी अस्पतालों का चेयरमैन स्वास्थ्य मंत्री को बनाने का प्रस्ताव असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री सत्येंद्र जैन को चेयरमैन बनाकर अस्पतालों पर कब्जा करना चाहते हैं। इस पर अभी तक मुख्य सचिव को ही जिम्मेदारी मिलती है। ताकि उक्त पद का राजनीतिक दल फायदा न उठा सकें। विपक्ष नियमों के विरुद्ध अस्पतालों के राजनीतिकरण का पुरजोर विरोध करेगा।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के इतिहास में पहली बार किसी स्वास्थ्य मंत्री को ही इन अस्पतालों का चेयरमैन बनाया जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दिल्ली सरकार के गठन से ही मुख्य सचिव इन अस्पतालों के पदेन चेयरमैन नियुक्त होते आए हैं। अभी तक इसी नियम के अंतर्गत सभी अस्पतालों का निर्माण, विस्तारीकरण व प्रबंधन होता आया है। इसमें किसी भी सरकार को अभी तक प्रशासनिक अथवा वित्तीय रुकावट का सामना नहीं करना पड़ा। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्वशासी अस्पताल केंद्र के अधिनियम सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत आते हैं। इस अधिनियम में प्रावधान है कि गवर्निंग बॉडी का प्रमुख ही अस्पताल का चेयरमैन होता है। कोई भी बाहरी व्यक्ति चाहे वह मंत्री हो अथवा राजनीतिज्ञ चेयरमैन नहीं बन सकता। वर्तमान में इन अस्पतालों के चेयरमैन द्वारा लिए गए निर्णयों की स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पुष्टि की जाती है। यदि स्वास्थ्य मंत्री ही चेयरमैन होगा तो वह अपने निर्णयों की खुद ही पुष्टि करेगा, जोकि अमान्य होगा।
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- नेता प्रतिपक्ष बोले- सत्येंद्र जैन को चेयरमैन अस्पतालों पर कब्जा करना चाहते हैं केजरीवाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली । दिल्ली के अस्पतालों को लेकर नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिल्ली सरकार को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि स्वशासी अस्पतालों का चेयरमैन स्वास्थ्य मंत्री को बनाने का प्रस्ताव असंवैधानिक है। मुख्यमंत्री सत्येंद्र जैन को चेयरमैन बनाकर अस्पतालों पर कब्जा करना चाहते हैं। इस पर अभी तक मुख्य सचिव को ही जिम्मेदारी मिलती है। ताकि उक्त पद का राजनीतिक दल फायदा न उठा सकें। विपक्ष नियमों के विरुद्ध अस्पतालों के राजनीतिकरण का पुरजोर विरोध करेगा।
गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के इतिहास में पहली बार किसी स्वास्थ्य मंत्री को ही इन अस्पतालों का चेयरमैन बनाया जा रहा है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दिल्ली सरकार के गठन से ही मुख्य सचिव इन अस्पतालों के पदेन चेयरमैन नियुक्त होते आए हैं। अभी तक इसी नियम के अंतर्गत सभी अस्पतालों का निर्माण, विस्तारीकरण व प्रबंधन होता आया है। इसमें किसी भी सरकार को अभी तक प्रशासनिक अथवा वित्तीय रुकावट का सामना नहीं करना पड़ा। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्वशासी अस्पताल केंद्र के अधिनियम सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 के तहत आते हैं। इस अधिनियम में प्रावधान है कि गवर्निंग बॉडी का प्रमुख ही अस्पताल का चेयरमैन होता है। कोई भी बाहरी व्यक्ति चाहे वह मंत्री हो अथवा राजनीतिज्ञ चेयरमैन नहीं बन सकता। वर्तमान में इन अस्पतालों के चेयरमैन द्वारा लिए गए निर्णयों की स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पुष्टि की जाती है। यदि स्वास्थ्य मंत्री ही चेयरमैन होगा तो वह अपने निर्णयों की खुद ही पुष्टि करेगा, जोकि अमान्य होगा।
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