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फर्जी राशन कार्ड बनाने का आरोपी 15 साल बाद हुआ आरोप मुक्त
Updated Mon, 08 Oct 2018 06:12 AM IST
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धोखाधड़ी के मामले में आरोपी 15 साल बाद आरोपमुक्त
-पुलिस ने नहीं करवाई थी किसी दस्वोज की फोरेंसिक जांच
धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली । अदालत ने धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के 15 साल पुराने मामले में आरोपी को पुलिस की जांच में लापरवाही के मद्देनजर आरोप मुक्त कर दिया। अपराध शाखा ने जून 2003 में धोखाधड़ी करने के मामले में दो आरोपियों से फर्जी दस्तावेज बरामद किये थे। लेकिन किसी भी दस्तावेज की फोरेंसिक जांच नहीं करवाई थी और न आरोपी के दस्तखत लिए थे।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश एनके मल्होत्रा ने बचाव पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए आरोपी आदर्श कुमार उर्फ बिल्ला उर्फ राहुल को आरोपों से मुक्त कर दिया। निचली अदालत ने आदर्श कुमार के खिलाफ आपराधिक साजिश, फर्जी दस्तावेज बनाने व इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश में आठ दिसंबर 2017 को मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था। इस फैसले को आदर्श कुमार ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि पुलिस ने याची से एक खाली राशन कार्ड व एक आयकर रिटर्न बरामद की थी। यह दोनों दस्तावेज साहिल के नाम पर थे। पुलिस ने जब आदर्श व दूसरे आरोपी विकास देव को गिरफ्तार किया तो उनसे दस्तावेज बरामद किये। पुलिस ने आदर्श की हैंड राइटिंग के नमूने नहीं लिये और न ही इन दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक विकास देव मकान किराए पर लेने व उसके नाम गाड़ियां फाइनेंस करवाने के लिए साहिल चड्ढा के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाता था। पुलिस के मुताबिक वह दस्तावेज आदर्श कुमार से बनवाता था।
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-पुलिस ने नहीं करवाई थी किसी दस्वोज की फोरेंसिक जांच
धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली । अदालत ने धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के 15 साल पुराने मामले में आरोपी को पुलिस की जांच में लापरवाही के मद्देनजर आरोप मुक्त कर दिया। अपराध शाखा ने जून 2003 में धोखाधड़ी करने के मामले में दो आरोपियों से फर्जी दस्तावेज बरामद किये थे। लेकिन किसी भी दस्तावेज की फोरेंसिक जांच नहीं करवाई थी और न आरोपी के दस्तखत लिए थे।
पटियाला हाउस अदालत के विशेष न्यायाधीश एनके मल्होत्रा ने बचाव पक्ष की दलीलों से सहमति जताते हुए आरोपी आदर्श कुमार उर्फ बिल्ला उर्फ राहुल को आरोपों से मुक्त कर दिया। निचली अदालत ने आदर्श कुमार के खिलाफ आपराधिक साजिश, फर्जी दस्तावेज बनाने व इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश में आठ दिसंबर 2017 को मुकदमा चलाने का निर्देश दिया था। इस फैसले को आदर्श कुमार ने सत्र अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपक शर्मा ने कहा कि पुलिस ने याची से एक खाली राशन कार्ड व एक आयकर रिटर्न बरामद की थी। यह दोनों दस्तावेज साहिल के नाम पर थे। पुलिस ने जब आदर्श व दूसरे आरोपी विकास देव को गिरफ्तार किया तो उनसे दस्तावेज बरामद किये। पुलिस ने आदर्श की हैंड राइटिंग के नमूने नहीं लिये और न ही इन दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा। अभियोजन पक्ष के मुताबिक विकास देव मकान किराए पर लेने व उसके नाम गाड़ियां फाइनेंस करवाने के लिए साहिल चड्ढा के नाम से फर्जी दस्तावेज बनवाता था। पुलिस के मुताबिक वह दस्तावेज आदर्श कुमार से बनवाता था।
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