{"_id":"5bad0b3f867a557ec15a51a1","slug":"153806724110-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोचक : ऑनलाइन फॉर्मेसी पर देश में दवा दुकानें आज बंद, उठाया फायदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोचक : ऑनलाइन फॉर्मेसी पर देश में दवा दुकानें आज बंद, उठाया फायदा
Updated Thu, 27 Sep 2018 10:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ दवा दुकानदारों का आज राष्ट्रव्यापी हड़ताल
- ऑनलाइन फॉर्मेसी के कारोबारियों ने हड़ताल को निष्प्रभावी करने के लिए उठाया कदम
- फोन और मैसेज के जरिए सूचना देकर हड़ताल के दौरान दवाएं पहुंचाने का दे रहे विकल्प
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ऑनलाइन फॉर्मेसी के विरोध में शुक्रवार को देशभर के दवा विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखेंगे। उधर, ऑनलाइन दवा विक्रेताओं ने भी इस हड़ताल को निष्प्रभावी करने के लिए लोगों को फोन और मैसेज के जरिए बता रहे हैं कि 28 सिंतबर को मरीज ऑनलाइन अपनी दवाएं मंगा सकते हैं। इसके लिए बाकायदा फोन नंबर भी दिए जा रहे हैं। इसको लेकर भी दवा विक्रेताओं में रोष है।
बृहस्पतिवार को दवा विक्रेताओं के संगठन एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे ने बताया कि ऑनलाइन फॉर्मेसी के जरिए दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल ऑनलाइन फार्मेसी का कारोबार अवैध है और सरकारी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दरअसल, देश में इस समय तकरीबन आठ लाख दवा विक्रेता हैं। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के चलते शहरी क्षेत्रों में ऐसे दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में अब इनकी मांग है कि सरकार को इस तरह के कारोबार पर रोक लगानी चाहिए।
विज्ञापन
सरकार नहीं कर रही कार्रवाई
संगठन की शिकायत के बावजूद ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा आई-पिल, एमटीपी किट, एंटी-डिप्रेशन आदि दवाइयों की सप्लाई जारी है। इसके लिए डॉक्टरी पर्चे व मरीज की विश्वसनीयता की भी पुष्टि नहीं की जा रही है। सरकार को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जंतर-मंतर पर गरजेंगे दवा व्यापारी
शुक्रवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट् एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) की अपील पर 12 हजार से अधिक दवा दुकानदार जंतर मंतर पर एकत्रित होंगे और ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
इन मांगों को लेकर कर रहे विरोध
. मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों तथा 1945 के नियमों के मुताबिक अवैध दवाइयों की बिक्री गैरकानूनी है।
. घटिया, सस्ते ब्रांड वाली और नकली दवाओं की खुलेआम बिक्री होने लगेगी।
. दवाइयों के अनियंत्रित इस्तेमाल का खतरा बढ़ेगा।
. युवाओं में नशे की लत बढ़ने का बड़ा खतरा रहेगा।
. आठ लाख केमिस्टों तथा तकरीबन 80 लाख कर्मचारियों एवं परिवारों के लिए आर्थिक संकट बढ़ेगा।
. ग्रामीण भारत में दवाइयों का दुष्प्रभाव बढ़ेगा।
. सुशासन के लिए अधोसंरचना तथा श्रमशक्ति का अभाव हो जाएगा।
विज्ञापन
- ऑनलाइन फॉर्मेसी के कारोबारियों ने हड़ताल को निष्प्रभावी करने के लिए उठाया कदम
- फोन और मैसेज के जरिए सूचना देकर हड़ताल के दौरान दवाएं पहुंचाने का दे रहे विकल्प
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ऑनलाइन फॉर्मेसी के विरोध में शुक्रवार को देशभर के दवा विक्रेता अपनी दुकानें बंद रखेंगे। उधर, ऑनलाइन दवा विक्रेताओं ने भी इस हड़ताल को निष्प्रभावी करने के लिए लोगों को फोन और मैसेज के जरिए बता रहे हैं कि 28 सिंतबर को मरीज ऑनलाइन अपनी दवाएं मंगा सकते हैं। इसके लिए बाकायदा फोन नंबर भी दिए जा रहे हैं। इसको लेकर भी दवा विक्रेताओं में रोष है।
बृहस्पतिवार को दवा विक्रेताओं के संगठन एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे ने बताया कि ऑनलाइन फॉर्मेसी के जरिए दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल ऑनलाइन फार्मेसी का कारोबार अवैध है और सरकारी इसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
विज्ञापन
दरअसल, देश में इस समय तकरीबन आठ लाख दवा विक्रेता हैं। दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के चलते शहरी क्षेत्रों में ऐसे दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। ऐसे में अब इनकी मांग है कि सरकार को इस तरह के कारोबार पर रोक लगानी चाहिए।
विज्ञापन
सरकार नहीं कर रही कार्रवाई
संगठन की शिकायत के बावजूद ऑनलाइन फार्मेसी द्वारा आई-पिल, एमटीपी किट, एंटी-डिप्रेशन आदि दवाइयों की सप्लाई जारी है। इसके लिए डॉक्टरी पर्चे व मरीज की विश्वसनीयता की भी पुष्टि नहीं की जा रही है। सरकार को शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जंतर-मंतर पर गरजेंगे दवा व्यापारी
शुक्रवार को ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट् एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) की अपील पर 12 हजार से अधिक दवा दुकानदार जंतर मंतर पर एकत्रित होंगे और ऑनलाइन फॉर्मेसी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
इन मांगों को लेकर कर रहे विरोध
. मौजूदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के प्रावधानों तथा 1945 के नियमों के मुताबिक अवैध दवाइयों की बिक्री गैरकानूनी है।
. घटिया, सस्ते ब्रांड वाली और नकली दवाओं की खुलेआम बिक्री होने लगेगी।
. दवाइयों के अनियंत्रित इस्तेमाल का खतरा बढ़ेगा।
. युवाओं में नशे की लत बढ़ने का बड़ा खतरा रहेगा।
. आठ लाख केमिस्टों तथा तकरीबन 80 लाख कर्मचारियों एवं परिवारों के लिए आर्थिक संकट बढ़ेगा।
. ग्रामीण भारत में दवाइयों का दुष्प्रभाव बढ़ेगा।
. सुशासन के लिए अधोसंरचना तथा श्रमशक्ति का अभाव हो जाएगा।