{"_id":"5ba40cc2867a557eaa4ddef9","slug":"153747780716-ashram-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले वाले फैसले का स्वागत किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले वाले फैसले का स्वागत किया
Updated Fri, 21 Sep 2018 02:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुस्लिम महिलाएं गोयल से मिलीं, तीन तलाक अध्यादेश का किया स्वागत
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री विजय गोयल ने ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले केंद्र सरकार के अध्यादेश का स्वागत किया है। गोयल ने कहा कि यह देश की महिलाओं के सशक्त बनाने की मोदी सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा है। इसे राजनीति या धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर गोयल के निवास पर मुस्लिम महिलाएं एकत्र हुईं और मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया।
गोयल ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि इस अध्यादेश से उनके जीवन में कितना बड़ा बदलाव आएगा। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष मुल्क में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी। महिलाओं के लिए न्याय, गरिमा और समानता के लिए इस अध्यादेश की तत्काल आवश्यकता थी। इंसाफ और इंसानियत के इस बिल को किसी जाति या धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री विजय गोयल ने ट्रिपल तलाक को दंडनीय अपराध बनाने वाले केंद्र सरकार के अध्यादेश का स्वागत किया है। गोयल ने कहा कि यह देश की महिलाओं के सशक्त बनाने की मोदी सरकार की व्यापक नीति का हिस्सा है। इसे राजनीति या धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। केंद्र सरकार के इस फैसले को लेकर गोयल के निवास पर मुस्लिम महिलाएं एकत्र हुईं और मिठाइयां बांटकर फैसले का स्वागत किया।
गोयल ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी है कि इस अध्यादेश से उनके जीवन में कितना बड़ा बदलाव आएगा। भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष मुल्क में बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी। महिलाओं के लिए न्याय, गरिमा और समानता के लिए इस अध्यादेश की तत्काल आवश्यकता थी। इंसाफ और इंसानियत के इस बिल को किसी जाति या धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
विज्ञापन