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अवैध पैथोलोजी लैब
Updated Thu, 20 Sep 2018 01:04 AM IST
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राजधानी में अवैध पैथोलॉजी गंभीर मुद्दा: हाईकोर्ट
- दिल्ली सरकार बोली, इस संबंध में बनाया जा रहा कानून
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में अवैध रूप से चल रहे पैथोलोजी लैब को गंभीर बताया है। साथ ही कहा है कि कानून बन जाने तक इन लैब को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिल्ली सरकार को दिया है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को इन लैबों का निरीक्षण करने और इनके मालिकों का पता लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि यह लैब किस कानून के तहत बनाए गए हैं। इस मामले में दिल्ली सरकार को शपथ पत्र पेश करे।
दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता संजोय घोष ने कहा पैथोलोजी पर नियंत्रण के लिए सरकार कानून बना रही है। इसको लेकर केवल संबंधित हित धारकों की राय का इंतजार है। इसमें थोड़ा समय लगेगा। इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस संबंध में छह सप्ताह का समय देकर सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख मुकर्रर कर दी है। यह याचिका बिजोन कुमार मिश्रा ने दायर की है।
याचिका पर जिरह करते हुये अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने कहा कि बीमारी संबंधी जांच के नतीजों में मामूली सी गड़बड़ जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बाद भी सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। एक अंदाज के मुताबिक में करीब 20 से 25 हजार पैथोलोजी अवैध तरीके से चल रहे हैं।
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- दिल्ली सरकार बोली, इस संबंध में बनाया जा रहा कानून
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में अवैध रूप से चल रहे पैथोलोजी लैब को गंभीर बताया है। साथ ही कहा है कि कानून बन जाने तक इन लैब को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिल्ली सरकार को दिया है। मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव को इन लैबों का निरीक्षण करने और इनके मालिकों का पता लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि यह लैब किस कानून के तहत बनाए गए हैं। इस मामले में दिल्ली सरकार को शपथ पत्र पेश करे।
दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता संजोय घोष ने कहा पैथोलोजी पर नियंत्रण के लिए सरकार कानून बना रही है। इसको लेकर केवल संबंधित हित धारकों की राय का इंतजार है। इसमें थोड़ा समय लगेगा। इसके बाद कोर्ट ने दिल्ली सरकार को इस संबंध में छह सप्ताह का समय देकर सुनवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख मुकर्रर कर दी है। यह याचिका बिजोन कुमार मिश्रा ने दायर की है।
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याचिका पर जिरह करते हुये अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने कहा कि बीमारी संबंधी जांच के नतीजों में मामूली सी गड़बड़ जानलेवा साबित हो सकती है। इसके बाद भी सरकार का इस ओर ध्यान नहीं है। एक अंदाज के मुताबिक में करीब 20 से 25 हजार पैथोलोजी अवैध तरीके से चल रहे हैं।
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