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युवा वैज्ञानिकों को वेल्डिंग की अहमियत जानना जरूरी: प्रवीण सुनेजा
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:16 AM IST
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युवा वैज्ञानिकों को वेल्डिंग की अहमियत जानना जरूरी: प्रवीण सुनेजा
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क स्थित एनआईईटी कॉलेज मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से वेल्डिंग तकनीकी और अनुसंधान क्षेत्र में विकास विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इस्जैक हैवी इंजीनियरिंग लिमिटेड में कॉरपोरेट प्लानिंग के हेड प्रवीण सुनेजा ने बताया कि एक प्रेशर टैंक में होने वाला रिसाव हजारों लोगों की जान ले सकता है, इसलिए युवा वैज्ञानिकों को इंडस्ट्री में वेल्डिंग की भूमिका समझना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज कोई भी बड़ा स्ट्रक्चर बिना वेल्डिंग के नहीं बन सकता, इसलिए इस तकनीकी की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कांफ्रेंस के दौरान रिसर्च उपलब्धियों को साझा किया। कार्यक्रम में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर अपूर्व शर्मा ने मुख्य विशेषज्ञ वक्ता के तौर माइक्रोवेव तकनीकी के व्यावसायिक प्रयोग से छात्रों को अवगत कराया। नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली के डीन डॉ सचिन माहेश्वरी ने वेल्डिंग क्षेत्र में ऑटोमेशन तकनीकी और नए पदार्थों के विकास और प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया। संस्थान के कार्यकारी उपाध्यक्ष रमन बत्रा ने इनोवेशन की महत्ता से परिचित कराते हुए विश्व प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा के निर्माण में प्रयुक्त वेल्डिंग और आने वाली बाधाओं की बारीकियों से उपस्थित सभी श्रोताओं को विषय की गहनता से परिचित कराया। सम्मेलन में शोधकर्ताओं ने 84 शोधपत्र भेजे, जिनमें से 32 शोध पत्रों को प्रस्तुति के लिए चुना गया। इस मौके पर निदेशक डॉ. अजय कुमार, प्रो प्रवीण पचौरी, प्रोफेसर चंदन कुमार ने भी अपने अनुभव साझा किए।
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अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। नॉलेज पार्क स्थित एनआईईटी कॉलेज मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से वेल्डिंग तकनीकी और अनुसंधान क्षेत्र में विकास विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इस्जैक हैवी इंजीनियरिंग लिमिटेड में कॉरपोरेट प्लानिंग के हेड प्रवीण सुनेजा ने बताया कि एक प्रेशर टैंक में होने वाला रिसाव हजारों लोगों की जान ले सकता है, इसलिए युवा वैज्ञानिकों को इंडस्ट्री में वेल्डिंग की भूमिका समझना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज कोई भी बड़ा स्ट्रक्चर बिना वेल्डिंग के नहीं बन सकता, इसलिए इस तकनीकी की बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने कांफ्रेंस के दौरान रिसर्च उपलब्धियों को साझा किया। कार्यक्रम में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर अपूर्व शर्मा ने मुख्य विशेषज्ञ वक्ता के तौर माइक्रोवेव तकनीकी के व्यावसायिक प्रयोग से छात्रों को अवगत कराया। नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली के डीन डॉ सचिन माहेश्वरी ने वेल्डिंग क्षेत्र में ऑटोमेशन तकनीकी और नए पदार्थों के विकास और प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया। संस्थान के कार्यकारी उपाध्यक्ष रमन बत्रा ने इनोवेशन की महत्ता से परिचित कराते हुए विश्व प्रसिद्ध बुर्ज खलीफा के निर्माण में प्रयुक्त वेल्डिंग और आने वाली बाधाओं की बारीकियों से उपस्थित सभी श्रोताओं को विषय की गहनता से परिचित कराया। सम्मेलन में शोधकर्ताओं ने 84 शोधपत्र भेजे, जिनमें से 32 शोध पत्रों को प्रस्तुति के लिए चुना गया। इस मौके पर निदेशक डॉ. अजय कुमार, प्रो प्रवीण पचौरी, प्रोफेसर चंदन कुमार ने भी अपने अनुभव साझा किए।
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