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डूसू अध्यक्ष ने फर्जी डिग्री से डीयू में दाखिला लिया-एनएसयूआई
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:00 AM IST
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‘डूसू अध्यक्ष ने फर्जी डिग्री से डीयू में लिया दाखिला’
एनएसयूआई ने लगाए आरोप, तिरुवल्लुवर विवि के जारी किए दस्तावेज
एबीवीपी ने आरोपों को खारिज किया, कहा-एनएसयूआई हार से बौखलाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से पहले एनएसयूआई व एबीवीपी के बीच शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर समाप्त होता नहीं दिख रहा है। डूसू चुनाव के नतीजे आने के बाद अब एनएसयूआई ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकिव बसोया पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर डीयू में दाखिला लेने का आरोप लगाया है। एनएसयूआई ने अपने को सही साबित करने के लिए तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी के दस्तावेज भी जारी किए हैं। वहीं एबीवीपी ने डूसू अध्यक्ष पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है।
एबीवीपी का कहना है कि अंकिव ने जो भी दस्तावेज जमा किए हैं, उनकी उचित जांच पड़ताल के बाद भी डीयू ने दाखिला दिया था। एनएसयूआई का कहना है कि तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी से जो जानकारी उन्हें मिली है वह उनके आंतरिक सूत्रों से प्राप्त हुई है। यूनिवर्सिटी के दस्तावेज जारी कर एनएसयूआई नेे कहा कि अंकिव का बीए का प्रमाणपत्र फर्जी है। डीयू के एमए (बौद्घ अध्ययन) में दाखिले के लिए अंकिव ने मार्कशीट पेश की थी। ऐसे किसी नाम के छात्र को दाखिला देेने से तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी ने इनकार कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उस सीरियल नंबर की मार्कशीट उनके रिकॉर्ड में नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एबीवीपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि एनएसयूआई हार की बौखलाहट के चलते ऐसे दुष्प्रचार कर रही है। एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी के अनुसार, अंकिव को उसके दस्तावेज के ठीक से सत्यापन के बाद ही डीयू ने दाखिला दिया। यह डीयू की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने जो पत्र जारी किया है उसमें दिनांक तक नहीं दी गई है। डीयू को ही किसी छात्र के दस्तावेज की जांच का अधिकार है। प्रमाणपत्र देना एनएसयूआई का काम नहीं है। डीयू को अंकिव के साथ ही अन्य डूसू पदाधिकारियों के दस्तावेज की जांच का अधिकार है, जिससे भविष्य में अफवाह न फैले।
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एनएसयूआई ने लगाए आरोप, तिरुवल्लुवर विवि के जारी किए दस्तावेज
एबीवीपी ने आरोपों को खारिज किया, कहा-एनएसयूआई हार से बौखलाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव से पहले एनएसयूआई व एबीवीपी के बीच शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर समाप्त होता नहीं दिख रहा है। डूसू चुनाव के नतीजे आने के बाद अब एनएसयूआई ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अंकिव बसोया पर फर्जी दस्तावेज के आधार पर डीयू में दाखिला लेने का आरोप लगाया है। एनएसयूआई ने अपने को सही साबित करने के लिए तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी के दस्तावेज भी जारी किए हैं। वहीं एबीवीपी ने डूसू अध्यक्ष पर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है।
एबीवीपी का कहना है कि अंकिव ने जो भी दस्तावेज जमा किए हैं, उनकी उचित जांच पड़ताल के बाद भी डीयू ने दाखिला दिया था। एनएसयूआई का कहना है कि तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी से जो जानकारी उन्हें मिली है वह उनके आंतरिक सूत्रों से प्राप्त हुई है। यूनिवर्सिटी के दस्तावेज जारी कर एनएसयूआई नेे कहा कि अंकिव का बीए का प्रमाणपत्र फर्जी है। डीयू के एमए (बौद्घ अध्ययन) में दाखिले के लिए अंकिव ने मार्कशीट पेश की थी। ऐसे किसी नाम के छात्र को दाखिला देेने से तिरुवल्लुवर यूनिवर्सिटी ने इनकार कर दिया है। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि उस सीरियल नंबर की मार्कशीट उनके रिकॉर्ड में नहीं है।
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इस पूरे घटनाक्रम पर एबीवीपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि एनएसयूआई हार की बौखलाहट के चलते ऐसे दुष्प्रचार कर रही है। एबीवीपी की राष्ट्रीय मीडिया संयोजक मोनिका चौधरी के अनुसार, अंकिव को उसके दस्तावेज के ठीक से सत्यापन के बाद ही डीयू ने दाखिला दिया। यह डीयू की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई ने जो पत्र जारी किया है उसमें दिनांक तक नहीं दी गई है। डीयू को ही किसी छात्र के दस्तावेज की जांच का अधिकार है। प्रमाणपत्र देना एनएसयूआई का काम नहीं है। डीयू को अंकिव के साथ ही अन्य डूसू पदाधिकारियों के दस्तावेज की जांच का अधिकार है, जिससे भविष्य में अफवाह न फैले।
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