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सरकारी अस्पताल में मरीज के साथ मारपीट, इलाज के दौरान डॉक्टर पर बदसलूकी का आरोप
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Updated Sun, 02 Sep 2018 11:10 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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पूर्वी दिल्ली के सरकारी डॉ हेडगेवार अस्पताल में एक मरीज ने डॉक्टर पर मारपीट और अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया है। अस्पताल प्रबंधन तक पहुंची शिकायत में मरीज ने प्रसव के दौरान लेबर रूम में पीटने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आ गया है। आनन-फानन में दिल्ली सरकार के इस अस्पताल में जांच भी शुरू हो चुकी है।
राधेपुरी निवासी कुमार गौरव ने बताया कि शनिवार को पत्नी बुलबुल को प्रसव का दर्द उठा तो उसे पास के हेडगेवार अस्पताल ले गए। चूंकि गौरव दो बच्चों का पिता पहले से है। आरोप है कि तीसरी बार गर्भवती होने पर डॉक्टरों ने बुलबुल और गौरव को काफी खरी खोटी सुनाई। सुबह करीब साढ़े 11 बजे बुलबुल को बच्चा पैदा हो गया, लेकिन लेबर रूम के बाहर मौजूद परिजनों की इसकी सूचना करीब डेढ़ बजे दी गई।
उनका कहना है कि प्रसव के बाद नवजात को करीब डेढ़ घंटे तक बिना कपड़े के ही रखा गया। इस दौरान उनकी पत्नी नवजात को ढकने के लिए लगातार गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने भी उसकी एक नहीं सुनी।
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गौरव का कहना है कि तीसरे बच्चे की बात पता लगने के बाद डॉक्टरों का व्यवहार पूरी तरह से बदल गया था। लेबर रूम में प्रसव के बाद टांके लगाते समय डॉक्टर और नर्स ने मरीज को कई घूंसे मारे। इसके साथ ही मरीज को बार-बार यह धमकी दी गई कि उसने अगर इसकी शिकायत की तो उसे और उसके बच्चे को कोई भी डॉक्टर नहीं देखेगा।
इससे उसका बच्चा मर भी सकता है। हालांकि इस पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है, लेकिन शिकायत आएगी तो उस पर जांच कराकर दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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राधेपुरी निवासी कुमार गौरव ने बताया कि शनिवार को पत्नी बुलबुल को प्रसव का दर्द उठा तो उसे पास के हेडगेवार अस्पताल ले गए। चूंकि गौरव दो बच्चों का पिता पहले से है। आरोप है कि तीसरी बार गर्भवती होने पर डॉक्टरों ने बुलबुल और गौरव को काफी खरी खोटी सुनाई। सुबह करीब साढ़े 11 बजे बुलबुल को बच्चा पैदा हो गया, लेकिन लेबर रूम के बाहर मौजूद परिजनों की इसकी सूचना करीब डेढ़ बजे दी गई।
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उनका कहना है कि प्रसव के बाद नवजात को करीब डेढ़ घंटे तक बिना कपड़े के ही रखा गया। इस दौरान उनकी पत्नी नवजात को ढकने के लिए लगातार गुहार लगाती रही, लेकिन किसी ने भी उसकी एक नहीं सुनी।
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गौरव का कहना है कि तीसरे बच्चे की बात पता लगने के बाद डॉक्टरों का व्यवहार पूरी तरह से बदल गया था। लेबर रूम में प्रसव के बाद टांके लगाते समय डॉक्टर और नर्स ने मरीज को कई घूंसे मारे। इसके साथ ही मरीज को बार-बार यह धमकी दी गई कि उसने अगर इसकी शिकायत की तो उसे और उसके बच्चे को कोई भी डॉक्टर नहीं देखेगा।
इससे उसका बच्चा मर भी सकता है। हालांकि इस पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है, लेकिन शिकायत आएगी तो उस पर जांच कराकर दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।