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बच्चों के साथ हो रही घटनाओं केप्रति सरकार गंभीर
Updated Sat, 25 Aug 2018 10:32 PM IST
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अधिकारियों और पुलिस का
व्हाट्स ऐप ग्रुप रोकेगा शोषण
- बच्चों के साथ वारदात पर दिल्ली सरकार का गंभीर रुख
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने स्कूल परिसर और बाहर बच्चों के साथ हो रही वारदात पर गंभीर रुख अपनाया है। इन पर लगाम के लिए दिल्ली पुलिस का सहयोग लेने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों का एक संयुक्त व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाने की तैयारी है, ताकि पुलिस तक घटना की जानकारी जल्द से जल्द पहुंचाई जा सके। इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने सभी जिला उप शिक्षा निदेशकों को आदेश दिए हैं।
शिक्षा निदेशक संजय गोयल के आदेश में कहा गया है कि स्कूल परिसर व बाहर बच्चों के साथ हो रही वारदात के मद्देनजर जरुरी है कि स्कूल प्रमुख व जिला उप शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहें। स्कूलों में कभी-कभी काफी इमरजेंसी होती है। ऐसे में टेलीफोन से संपर्क बनाना संभव नहीं हो पाता। लिहाजा सोश्ल मीडिया जानकारी के आदान-प्रदान का अच्छा माध्यम हो सकता है। इसलिए वह सभी स्कूल प्रमुखों के मोबाइल नंबर लिखित मेें उस क्षेत्र के एसएचओ से साझा करें। पुलिस अधिकारियों से अनुरोध किया जाए कि नंबरों का एक व्हाट् ऐप ग्रुप बनाया जाए। इससे दोनों पक्ष (पुलिस व प्रिंसिपल) जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे। क्षेत्र का एसएचओ इस संबंध मेें कोई एक्शन न ले तो डीसीपी से संपर्क साधा जाए। शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में दो हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।
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व्हाट्स ऐप ग्रुप रोकेगा शोषण
- बच्चों के साथ वारदात पर दिल्ली सरकार का गंभीर रुख
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने स्कूल परिसर और बाहर बच्चों के साथ हो रही वारदात पर गंभीर रुख अपनाया है। इन पर लगाम के लिए दिल्ली पुलिस का सहयोग लेने का निर्णय लिया गया है। शिक्षा अधिकारियों व पुलिस अधिकारियों का एक संयुक्त व्हाट्स ऐप ग्रुप बनाने की तैयारी है, ताकि पुलिस तक घटना की जानकारी जल्द से जल्द पहुंचाई जा सके। इस संबंध में शिक्षा निदेशक ने सभी जिला उप शिक्षा निदेशकों को आदेश दिए हैं।
शिक्षा निदेशक संजय गोयल के आदेश में कहा गया है कि स्कूल परिसर व बाहर बच्चों के साथ हो रही वारदात के मद्देनजर जरुरी है कि स्कूल प्रमुख व जिला उप शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के पुलिस अधिकारियों के संपर्क में रहें। स्कूलों में कभी-कभी काफी इमरजेंसी होती है। ऐसे में टेलीफोन से संपर्क बनाना संभव नहीं हो पाता। लिहाजा सोश्ल मीडिया जानकारी के आदान-प्रदान का अच्छा माध्यम हो सकता है। इसलिए वह सभी स्कूल प्रमुखों के मोबाइल नंबर लिखित मेें उस क्षेत्र के एसएचओ से साझा करें। पुलिस अधिकारियों से अनुरोध किया जाए कि नंबरों का एक व्हाट् ऐप ग्रुप बनाया जाए। इससे दोनों पक्ष (पुलिस व प्रिंसिपल) जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे। क्षेत्र का एसएचओ इस संबंध मेें कोई एक्शन न ले तो डीसीपी से संपर्क साधा जाए। शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में दो हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।
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