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सड़क सुरक्षा के नाम पर फुटओवर ब्रिज केवल बजट की बर्बादी : आईआईटी
Updated Fri, 24 Aug 2018 08:12 PM IST
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फुट ओवरब्रिज केवल बजट की बर्बादी : आईआईटी
-सड़क सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने तैयार की नई गाइडलाइन
-विदेशों की तर्ज पर कार में पीछे बैठने वाले की होनी चाहिए बेल्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इमारती ढांचों से विकास को जोड़कर देखा जाता है। सड़क सुरक्षा के नाम पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाते हैं जबकि फुटओवर ब्रिज को बनाने में समय और बजट दोनों की बर्बादी होती है। ये कहना है आईआईटी की प्रोफेसर गीतम तिवारी का। शुक्रवार को देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में सड़क सुरक्षा को लेकर हुई कार्यशाला में उन्होंने अपने कई अध्ययन भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष लाखों की तादात में लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वाहनों से लेकर सड़क पर चल रहे राहगीर तक इसमें शामिल हैं। इसे देखते हुए सड़क सुरक्षा कानूनों में बदलाव की आवश्यकता भी है। फुट ओवरब्रिज की तरह सड़क दुर्घटना में घायलों की अस्पतालों में मेडिको लीगल केस (एमएलसी) अनिवार्य नहीं होनी चाहिए। विदेशों की तर्ज पर भारत में भी कार में पिछली सीट पर बैठी सवारी को लेकर सीट बेल्ट की अनिवार्यता होनी चाहिए। साथ ही बच्चों को लेकर भी सरकार को कानून बनाना चाहिए। विदेशों में कार में सवार बच्चों को बकायदा सीट बेल्ट के साथ बिठाया जाता है।
इस दौरान मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन तैयार की गई है। इस पर अमल के लिए शनिवार को सड़क यातायात मंत्रालय सहित प्रधानमंत्री कार्यालय को गाइडलाइन सौंपी जाएगी। कार्यशाला में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि 52 फीसदी रीढ़ की हड्डी की चोटों की वजह ऊंचाई से गिरने और 38 फीसदी परिवहन से संबंधित चोटों के कारण होती हैं। ज्यादातर लोग घर में गिरते हैं, या तो वे आसपास के इलाकों से अवगत नहीं हैं या उन्हें कोई बीमारी होती है। ठीक इसी तरह परिवहन से संबंधित चोटों के कारणों पर जब अध्ययन किया गया, तो पता चला कि चालक सीट पर मौजूद व्यक्तियों की मौत ज्यादा होती है। करीब 90 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं में चालक की मौत हुई है। इससे जाहिर है कि उनमें यातायात नियमों संबंधी जागरूकता नहीं है।
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एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं (आरटीसी) और ऊंचाई से गिरकर चोट लगना दो सबसे आम प्रकार हैं, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ती है। अगर इन्हें समय पर उपचार न मिले तो घायल की मृत्यु तक हो सकती है। इनकी मानें तो देश में होने वाली मौतों का 5वां सबसे आम कारण ये चोटें बनी हैं जबकि इन्हें समय रहते रोका जा सकता है। जागरूकता और सतर्कता के जरिए ये संभव है।
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-सड़क सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने तैयार की नई गाइडलाइन
-विदेशों की तर्ज पर कार में पीछे बैठने वाले की होनी चाहिए बेल्ट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। इमारती ढांचों से विकास को जोड़कर देखा जाता है। सड़क सुरक्षा के नाम पर फुट ओवरब्रिज बनाए जाते हैं जबकि फुटओवर ब्रिज को बनाने में समय और बजट दोनों की बर्बादी होती है। ये कहना है आईआईटी की प्रोफेसर गीतम तिवारी का। शुक्रवार को देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में सड़क सुरक्षा को लेकर हुई कार्यशाला में उन्होंने अपने कई अध्ययन भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि देश में हर वर्ष लाखों की तादात में लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वाहनों से लेकर सड़क पर चल रहे राहगीर तक इसमें शामिल हैं। इसे देखते हुए सड़क सुरक्षा कानूनों में बदलाव की आवश्यकता भी है। फुट ओवरब्रिज की तरह सड़क दुर्घटना में घायलों की अस्पतालों में मेडिको लीगल केस (एमएलसी) अनिवार्य नहीं होनी चाहिए। विदेशों की तर्ज पर भारत में भी कार में पिछली सीट पर बैठी सवारी को लेकर सीट बेल्ट की अनिवार्यता होनी चाहिए। साथ ही बच्चों को लेकर भी सरकार को कानून बनाना चाहिए। विदेशों में कार में सवार बच्चों को बकायदा सीट बेल्ट के साथ बिठाया जाता है।
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इस दौरान मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर नई गाइडलाइन तैयार की गई है। इस पर अमल के लिए शनिवार को सड़क यातायात मंत्रालय सहित प्रधानमंत्री कार्यालय को गाइडलाइन सौंपी जाएगी। कार्यशाला में मौजूद डॉक्टरों ने बताया कि 52 फीसदी रीढ़ की हड्डी की चोटों की वजह ऊंचाई से गिरने और 38 फीसदी परिवहन से संबंधित चोटों के कारण होती हैं। ज्यादातर लोग घर में गिरते हैं, या तो वे आसपास के इलाकों से अवगत नहीं हैं या उन्हें कोई बीमारी होती है। ठीक इसी तरह परिवहन से संबंधित चोटों के कारणों पर जब अध्ययन किया गया, तो पता चला कि चालक सीट पर मौजूद व्यक्तियों की मौत ज्यादा होती है। करीब 90 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं में चालक की मौत हुई है। इससे जाहिर है कि उनमें यातायात नियमों संबंधी जागरूकता नहीं है।
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एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं (आरटीसी) और ऊंचाई से गिरकर चोट लगना दो सबसे आम प्रकार हैं, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ती है। अगर इन्हें समय पर उपचार न मिले तो घायल की मृत्यु तक हो सकती है। इनकी मानें तो देश में होने वाली मौतों का 5वां सबसे आम कारण ये चोटें बनी हैं जबकि इन्हें समय रहते रोका जा सकता है। जागरूकता और सतर्कता के जरिए ये संभव है।