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घटना से हैरान, जान बचाकर भागा, पुलिस से मांगी जाएगी सुरक्षा: उमर खालिद
Updated Tue, 14 Aug 2018 12:00 AM IST
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उमर खालिद पर हमले से संबंधित खबर
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घटना से हैरान, पुलिस से मांगेंगे सुरक्षा : उमर
हमले के बाद कहा, सरकार के खिलाफ बोलने वालों को डराया जा रहा है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है। देश में असुरक्षा और डर का खौफ बन रहा है। जो सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत करता है, उसे ऐेसे ही चुप करवाया जाता है। घटना से बेहद हैरान हूं। गोली चलते ही मैैं जान बचाकर भागा। घटना से आहत हूं और पुलिस से सुरक्षा की मांग रखूंगा। यह कहना है कि जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी उमर खालिद का। हमले के बाद खालिद ने कहा कि कार्यक्रम शुरू होने में कुछ समय था। इसलिए मैं चाय पीने के लिए क्लब के बाहर बनी दुकान पर आ गया। चाय पीकर जैसे ही मैं अंदर जाने लगा तभी आरोपी ने मुझे धक्का दिया और मैं गिर गया। इसी बीच दूसरी तरफ गोली चला दी।
उमर का कहना है कि मुझे नहीं पता कि गोली चलाने वाला कौन था, लेकिन कुछ दिनों से जो मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया है कि अब लोगों को लगता है कि ऐसे लोगों को मार दिया जाना चाहिए। मैं आरोपी का चेहरा नहीं देख पाया। यदि आप इस सरकार के खिलाफ बोलने की कोशिश करेंगे तो आपके ऊपर एक तमगा लगाया जाएगा कि कुछ भी किया जा सकता है। एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कभी भी कुछ हो सकता है। ऐसे खौफ के माहौल में लोग कब तक जी पाएंगे। वहीं कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे प्रशांत भूषण का मानना है कि यह घटना खौफ पैदा करने की कोशिश है। भाजपा और सरकार के गुंडे खौफ पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरेआम ऐसी घटना के बाद भी आरोपी भाग निकला, यह सवाल पैदा करता है। डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि दिल्ली में कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान आप सुरक्षित नहीं हैं।
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हमले के पीछे कौन पुलिस तलाशे : कन्हैया
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का कहना है कि हमले के पीछे कौन और किसका दिमाग है। पुलिस इसकी जांच करे। सरकार के खिलाफ बोलने की सजा है। हमले किस कारण से हो रहे हैं, यह भी सबको पता है। इसलिए पुलिस कार्यक्रम की अनुमति ली थी या नहीं, इसका रोना रोने की बजाय आरोपी की तलाश करे तो बेहतर होगा। पुलिस स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा में जुटी है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि कहां पर कौन-सा कार्यक्रम हो रहा है।
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हमले से छात्रों की आवाज नहीं दबेगी : जेएनयू छात्रसंघ
जेएनयू छात्रसंघ का कहना है कि यदि सरकार इस प्रकार के हमले करवाकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश करेगी तो यह सहन नहीं होगा। यहां गाय सुरक्षित है, लेकिन लोग नहीं। भीड़ अपनी बात को साबित करने के लिए लोगों को जान से मार देती है, लेकिन पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। छात्रों की आवाज दबने वाली नहीं है, बल्कि हम अपनी बात ओर अधिक मजबूती से रखेंगे।
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घटना से हैरान, पुलिस से मांगेंगे सुरक्षा : उमर
हमले के बाद कहा, सरकार के खिलाफ बोलने वालों को डराया जा रहा है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है। देश में असुरक्षा और डर का खौफ बन रहा है। जो सरकार के खिलाफ बोलने की हिम्मत करता है, उसे ऐेसे ही चुप करवाया जाता है। घटना से बेहद हैरान हूं। गोली चलते ही मैैं जान बचाकर भागा। घटना से आहत हूं और पुलिस से सुरक्षा की मांग रखूंगा। यह कहना है कि जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी उमर खालिद का। हमले के बाद खालिद ने कहा कि कार्यक्रम शुरू होने में कुछ समय था। इसलिए मैं चाय पीने के लिए क्लब के बाहर बनी दुकान पर आ गया। चाय पीकर जैसे ही मैं अंदर जाने लगा तभी आरोपी ने मुझे धक्का दिया और मैं गिर गया। इसी बीच दूसरी तरफ गोली चला दी।
उमर का कहना है कि मुझे नहीं पता कि गोली चलाने वाला कौन था, लेकिन कुछ दिनों से जो मेरे खिलाफ दुष्प्रचार किया गया है कि अब लोगों को लगता है कि ऐसे लोगों को मार दिया जाना चाहिए। मैं आरोपी का चेहरा नहीं देख पाया। यदि आप इस सरकार के खिलाफ बोलने की कोशिश करेंगे तो आपके ऊपर एक तमगा लगाया जाएगा कि कुछ भी किया जा सकता है। एक ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि कभी भी कुछ हो सकता है। ऐसे खौफ के माहौल में लोग कब तक जी पाएंगे। वहीं कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे प्रशांत भूषण का मानना है कि यह घटना खौफ पैदा करने की कोशिश है। भाजपा और सरकार के गुंडे खौफ पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। सरेआम ऐसी घटना के बाद भी आरोपी भाग निकला, यह सवाल पैदा करता है। डीयू के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि दिल्ली में कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान आप सुरक्षित नहीं हैं।
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हमले के पीछे कौन पुलिस तलाशे : कन्हैया
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार का कहना है कि हमले के पीछे कौन और किसका दिमाग है। पुलिस इसकी जांच करे। सरकार के खिलाफ बोलने की सजा है। हमले किस कारण से हो रहे हैं, यह भी सबको पता है। इसलिए पुलिस कार्यक्रम की अनुमति ली थी या नहीं, इसका रोना रोने की बजाय आरोपी की तलाश करे तो बेहतर होगा। पुलिस स्वतंत्रता दिवस की सुरक्षा में जुटी है, लेकिन उसे यह नहीं पता कि कहां पर कौन-सा कार्यक्रम हो रहा है।
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हमले से छात्रों की आवाज नहीं दबेगी : जेएनयू छात्रसंघ
जेएनयू छात्रसंघ का कहना है कि यदि सरकार इस प्रकार के हमले करवाकर छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश करेगी तो यह सहन नहीं होगा। यहां गाय सुरक्षित है, लेकिन लोग नहीं। भीड़ अपनी बात को साबित करने के लिए लोगों को जान से मार देती है, लेकिन पुलिस प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। छात्रों की आवाज दबने वाली नहीं है, बल्कि हम अपनी बात ओर अधिक मजबूती से रखेंगे।