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जेएनयू उपस्थिति विवाद
Updated Thu, 09 Aug 2018 10:32 PM IST
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‘फैसला होने तक उपस्थिति नियम लागू न करें’
- 75 फीसदी कालेजों में उपस्थिति अनिवार्य पर हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रबंधन को दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 75 फीसदी अनिवार्य उपस्थिति अनिवार्य को लेकर छात्रों से लिए गए शपथ पत्र को लागू नहीं करने का निर्देश जेएनयू प्रबंधन को दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मुद्दे का जब तक निपटारा नहीं हो जाता यह नियम लागू न किया जाए।
जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल ने जेएनयू प्रशासन से पूछा कि जब अनिवार्य उपस्थिति का मुद्दा कोर्ट में विचाराधीन है तो छात्रों से शपथ पत्र लेने की क्या जरूरत थी। कोर्ट अगर इस नियम को कायम रखती है तो नियम अपने आप लागू हो जाएगा। जेएनयू के वकील ने कहा वह छात्रों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
गौरतलब है कि जेएनयू के कई छात्रों ने अवमानना याचिका दायर कर कहा है कि दाखिले अथवा पुन: दाखिले के समय छात्रों से शपथ पत्र लेकर जेएनयू प्रशासन हाईकोर्ट के 16 जुलाई को दिए गए आदेश की जान बूझकर अवमानना कर रहा है। हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को अगले आदेश तक 75 फीसदी मुद्दे का निबटारा होने तक छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। जेएनयू के छात्रों ने दावा किया था कि पंजीकरण व पुन: पंजीकरण आवेदन फार्म में छात्रों से 75 फीसदी अनिवार्य उपस्थिति के लिए शपथ पत्र लिया जा रहा है। इसमें छात्रों से यह आश्वासन लिया जा रहा है कि वह इस नियम का पालन करेंगे और ऐसा नहीं करने पर विश्वविद्यालय उन पर नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। जेएनयू में 16 जुलाई से 23 तक दाखिला प्रकिया चल रही थी।
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- 75 फीसदी कालेजों में उपस्थिति अनिवार्य पर हाईकोर्ट ने जेएनयू प्रबंधन को दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 75 फीसदी अनिवार्य उपस्थिति अनिवार्य को लेकर छात्रों से लिए गए शपथ पत्र को लागू नहीं करने का निर्देश जेएनयू प्रबंधन को दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मुद्दे का जब तक निपटारा नहीं हो जाता यह नियम लागू न किया जाए।
जस्टिस सिद्घार्थ मृदुल ने जेएनयू प्रशासन से पूछा कि जब अनिवार्य उपस्थिति का मुद्दा कोर्ट में विचाराधीन है तो छात्रों से शपथ पत्र लेने की क्या जरूरत थी। कोर्ट अगर इस नियम को कायम रखती है तो नियम अपने आप लागू हो जाएगा। जेएनयू के वकील ने कहा वह छात्रों पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि जेएनयू के कई छात्रों ने अवमानना याचिका दायर कर कहा है कि दाखिले अथवा पुन: दाखिले के समय छात्रों से शपथ पत्र लेकर जेएनयू प्रशासन हाईकोर्ट के 16 जुलाई को दिए गए आदेश की जान बूझकर अवमानना कर रहा है। हाईकोर्ट ने 16 जुलाई को अगले आदेश तक 75 फीसदी मुद्दे का निबटारा होने तक छात्रों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। जेएनयू के छात्रों ने दावा किया था कि पंजीकरण व पुन: पंजीकरण आवेदन फार्म में छात्रों से 75 फीसदी अनिवार्य उपस्थिति के लिए शपथ पत्र लिया जा रहा है। इसमें छात्रों से यह आश्वासन लिया जा रहा है कि वह इस नियम का पालन करेंगे और ऐसा नहीं करने पर विश्वविद्यालय उन पर नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। जेएनयू में 16 जुलाई से 23 तक दाखिला प्रकिया चल रही थी।
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