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अभिभावकों की सभी शिकायतों को गंभीरता से लें स्कूल
Updated Tue, 17 Jul 2018 07:40 PM IST
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डीपीएस में दुष्कर्म का मामला
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हेडिंग: अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लें स्कूल
सबहेड: एसपी देहात ने कलेक्ट्रेट में स्कूल प्रबंधकों को दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। एसपी देहात ने कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित बैठक में स्कूल प्रबंधकों को गंभीरता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधक हर अभिभावक की हर शिकायत को गंभीरता से लें। उनकी यह लापरवाही भारी पड़ रही है। डीपीएस प्रबंधक भी अगर बच्ची के अभिभावक की शिकायत को गंभीरता से लेता तो शायद यह घटना नहीं होती।
बैठक में एसपी देहात आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि अभिभावक ने स्कूल को बताया था कि बच्ची का मन स्वीमिंग में नहीं लग रहा है, जबकि पहले उसे स्वीमिंग काफी पसंद थी। शिकायत मिलने पर डीपीएस प्रबंधक को सोचना चाहिए था कि आखिरी ऐसी क्या वजह है जो बच्ची अभी स्वीमिंग से दूर भाग रही है। वहीं इस तरह की घटना के बाद स्कूल प्रबंधक अपने बचाव में जुट जाता है। आरोपी कर्मचारी को भरोसेमंद बताया जाता है। कहते हैं कि दस साल से काम कर रहा है, जबकि उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। जांच अधिकारी की तरह सोचना चाहिए। वहीं, सीएफओ अरुण कुमार ने कहा कि स्कूलों को असली जानकारी अभिभावकों से ही मिलती है, जबकि यहां स्कूल प्रबंधक उनकी सुनते ही नहीं हैं, यह गलत है। हर जानकारी की जांच जरूर करें। अगर फायर उपकरण नहीं चल रहे तो उनकी भी जांच करवा लें। इधर, बैठक में कर्मचारियों का सत्यापन नहीं करने का भी आरोप लगाया है। इस पर एसपी देहात ने कहा कि अगर ऐसा है तो इसकी जानकारी दें। तत्काल उनका सत्यापन कराया जाएगा। जिन स्कूलों के कर्मचारियों का सत्यापन अभी बाकी है, वे दो दिन के अंदर आवेदन कर दें। सात से दस दिन के अंदर उनका सत्यापन पूरा करा दिया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है ऐसी जांच
पिछले साल कौशल्या वर्ल्ड स्कूल में भी एक विदेशी बच्चे से कुकर्म का मामला सामने आया था। आरोपी स्कूल का कर्मचारी था। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। तब भी जिला प्रशासन ने स्कूल में सुरक्षा मानकों की जांच की थी। जांच में पता चला कि स्कूल में सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं किया गया है, जबकि, गुरूग्राम केस के बाद भी प्रशासन ने मानकों को पूरा करने का आदेश दिया था। डीआईओएस को जांच कर डीएम को रिपोर्ट देनी थी, ताकि सीबीएसई और सरकार को स्कूल की मान्यता समाप्त करने के लिए रिपोर्ट भेजी जा सके, लेकिन प्रशासन की तरफ से रिपोर्ट नहीं भेजी गई। ऐसे में लोगों के बीच चर्चा है कि यह केवल दिखावा है। इस मामले में जिलाधिकारी बीएन सिंह का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है। डीआईओएस से जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद फैसला लिया जाएगा।
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हेडिंग: अभिभावकों की शिकायतों को गंभीरता से लें स्कूल
सबहेड: एसपी देहात ने कलेक्ट्रेट में स्कूल प्रबंधकों को दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। एसपी देहात ने कलेक्ट्रेट के सभागार में आयोजित बैठक में स्कूल प्रबंधकों को गंभीरता का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधक हर अभिभावक की हर शिकायत को गंभीरता से लें। उनकी यह लापरवाही भारी पड़ रही है। डीपीएस प्रबंधक भी अगर बच्ची के अभिभावक की शिकायत को गंभीरता से लेता तो शायद यह घटना नहीं होती।
बैठक में एसपी देहात आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि अभिभावक ने स्कूल को बताया था कि बच्ची का मन स्वीमिंग में नहीं लग रहा है, जबकि पहले उसे स्वीमिंग काफी पसंद थी। शिकायत मिलने पर डीपीएस प्रबंधक को सोचना चाहिए था कि आखिरी ऐसी क्या वजह है जो बच्ची अभी स्वीमिंग से दूर भाग रही है। वहीं इस तरह की घटना के बाद स्कूल प्रबंधक अपने बचाव में जुट जाता है। आरोपी कर्मचारी को भरोसेमंद बताया जाता है। कहते हैं कि दस साल से काम कर रहा है, जबकि उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। जांच अधिकारी की तरह सोचना चाहिए। वहीं, सीएफओ अरुण कुमार ने कहा कि स्कूलों को असली जानकारी अभिभावकों से ही मिलती है, जबकि यहां स्कूल प्रबंधक उनकी सुनते ही नहीं हैं, यह गलत है। हर जानकारी की जांच जरूर करें। अगर फायर उपकरण नहीं चल रहे तो उनकी भी जांच करवा लें। इधर, बैठक में कर्मचारियों का सत्यापन नहीं करने का भी आरोप लगाया है। इस पर एसपी देहात ने कहा कि अगर ऐसा है तो इसकी जानकारी दें। तत्काल उनका सत्यापन कराया जाएगा। जिन स्कूलों के कर्मचारियों का सत्यापन अभी बाकी है, वे दो दिन के अंदर आवेदन कर दें। सात से दस दिन के अंदर उनका सत्यापन पूरा करा दिया जाएगा।
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पहले भी हो चुकी है ऐसी जांच
पिछले साल कौशल्या वर्ल्ड स्कूल में भी एक विदेशी बच्चे से कुकर्म का मामला सामने आया था। आरोपी स्कूल का कर्मचारी था। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। तब भी जिला प्रशासन ने स्कूल में सुरक्षा मानकों की जांच की थी। जांच में पता चला कि स्कूल में सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं किया गया है, जबकि, गुरूग्राम केस के बाद भी प्रशासन ने मानकों को पूरा करने का आदेश दिया था। डीआईओएस को जांच कर डीएम को रिपोर्ट देनी थी, ताकि सीबीएसई और सरकार को स्कूल की मान्यता समाप्त करने के लिए रिपोर्ट भेजी जा सके, लेकिन प्रशासन की तरफ से रिपोर्ट नहीं भेजी गई। ऐसे में लोगों के बीच चर्चा है कि यह केवल दिखावा है। इस मामले में जिलाधिकारी बीएन सिंह का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है। डीआईओएस से जांच रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद फैसला लिया जाएगा।
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