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वसूले जाने थे 1526 करोड़, सिर्फ 170 करोड़ रुपये मिले
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ग्रेटर नोएडा (नवीन कुमार)। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) 1526 करोड़ के रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर चुका है, लेकिन अब तक केवल 170 करोड़ की वसूली हो सकी है। इसमें गौतमबुद्ध नगर में सर्वाधिक करीब 50 करोड़ की वसूली हुई है। वसूली कम होने के कारण खरीदारों को न्याय नहीं मिल रहा है। वहीं, 78 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का निस्तारण करने के बाद भी यूपी रेरा के गठन का मकसद पूरा नहीं हो पा रहा है। यूपी रेरा का गठन वर्ष 2017 में हुआ था। जबकि, स्थायी प्राधिकरण के रूप में यूपी रेरा का गठन अगस्त, 2018 में हुआ था। सितंबर, 2018 को ग्रेटर नोएडा में यूपी रेरा कार्यालय का शुभारंभ हुआ था। तब से लगातार खरीदारों की शिकायतें आ रही हैं। अब तक 39,920 शिकायतें आ चुकी हैं।
इनमें से 31400 का निस्तारण किया जा चुका है, जो दर्ज शिकायतों का करीब 78 प्रतिशत है। इसके बावजूद ज्यादातर आदेशों का बिल्डर पालन नहीं कर रहे हैं। इससे खरीदार यूपी रेरा में फिर से अपील कर रहे हैं। इस पर यूपी रेरा अब तक विभिन्न बिल्डरों के खिलाफ 5011 आरसी जारी कर चुका है, जो 1526 करोड़ रुपये की है। इन आरसी को प्रदेश के संबंधित जिलों के जिलाधिकारी के पास वसूली के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक केवल 170 करोड़ की वसूली हो सकी है, जो करीब सवा 11 प्रतिशत है। यह धनराशि यूपी रेरा के माध्यम से खरीदारों को मिल चुकी है। बाकी खरीदार अपनी जमा पूंजी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 170 करोड़ की वसूली में 50 करोड़ की वसूली जिले में हुई है। यहां 1000 करोड़ से अधिक की आरसी है, लेकिन वसूली में सफलता नहीं मिल रही है।
400 करोड़ की संपत्ति जब्त पर वसूली नहीं
यूपी रेरा की आरसी पर बिल्डर पैसा नहीं दे रहे हैं। इस स्थिति में जिला प्रशासन अब तक विभिन्न बिल्डरों की 400 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर चुका है, लेकिन संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई से आरसी की वसूली नहीं हो पाती। एनसीआर के जिलों में सबसे अधिक बिल्डर प्रोजेक्ट हैं। यहां आरसी पर जब्त की गई संपत्ति की निलामी कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसमें एक भी लोग शामिल नहीं हो सके। इस कारण जिला प्रशासन की तरफ से शासन को ई-नीलामी का प्रस्ताव भेजा गया था। जिससे देश के किसी भी कोने से लोग नीलामी में शामिल हो सकें, लेकिन करीब एक साल से यह प्रस्ताव शासन स्तर पर लटका है।
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प्रशासन को मेरे केस की आरसी पर वसूली करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चक्कर लगाने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा। वहां से आरसी पर वसूली का आदेश हुआ। डेढ़ साल के संघर्ष के बाद पैसा मिला है।
- वेद प्रकाश, फ्लैट खरीदार
वसूली के लिए लगातार संबंधित जिले के डीएम के साथ बैठक कर निर्देश दिए जा रहे हैं। ई-नीलामी के लिए सरकार को पत्र लिखा है। जल्द वसूली कराकर खरीदारों का पैसा दिलाया जाएगा।
- बलविंदर कुमार, सदस्य यूपी रेरा
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इनमें से 31400 का निस्तारण किया जा चुका है, जो दर्ज शिकायतों का करीब 78 प्रतिशत है। इसके बावजूद ज्यादातर आदेशों का बिल्डर पालन नहीं कर रहे हैं। इससे खरीदार यूपी रेरा में फिर से अपील कर रहे हैं। इस पर यूपी रेरा अब तक विभिन्न बिल्डरों के खिलाफ 5011 आरसी जारी कर चुका है, जो 1526 करोड़ रुपये की है। इन आरसी को प्रदेश के संबंधित जिलों के जिलाधिकारी के पास वसूली के लिए भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक केवल 170 करोड़ की वसूली हो सकी है, जो करीब सवा 11 प्रतिशत है। यह धनराशि यूपी रेरा के माध्यम से खरीदारों को मिल चुकी है। बाकी खरीदार अपनी जमा पूंजी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 170 करोड़ की वसूली में 50 करोड़ की वसूली जिले में हुई है। यहां 1000 करोड़ से अधिक की आरसी है, लेकिन वसूली में सफलता नहीं मिल रही है।
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400 करोड़ की संपत्ति जब्त पर वसूली नहीं
यूपी रेरा की आरसी पर बिल्डर पैसा नहीं दे रहे हैं। इस स्थिति में जिला प्रशासन अब तक विभिन्न बिल्डरों की 400 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर चुका है, लेकिन संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई से आरसी की वसूली नहीं हो पाती। एनसीआर के जिलों में सबसे अधिक बिल्डर प्रोजेक्ट हैं। यहां आरसी पर जब्त की गई संपत्ति की निलामी कराने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसमें एक भी लोग शामिल नहीं हो सके। इस कारण जिला प्रशासन की तरफ से शासन को ई-नीलामी का प्रस्ताव भेजा गया था। जिससे देश के किसी भी कोने से लोग नीलामी में शामिल हो सकें, लेकिन करीब एक साल से यह प्रस्ताव शासन स्तर पर लटका है।
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प्रशासन को मेरे केस की आरसी पर वसूली करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। चक्कर लगाने के बाद हाईकोर्ट पहुंचा। वहां से आरसी पर वसूली का आदेश हुआ। डेढ़ साल के संघर्ष के बाद पैसा मिला है।
- वेद प्रकाश, फ्लैट खरीदार
वसूली के लिए लगातार संबंधित जिले के डीएम के साथ बैठक कर निर्देश दिए जा रहे हैं। ई-नीलामी के लिए सरकार को पत्र लिखा है। जल्द वसूली कराकर खरीदारों का पैसा दिलाया जाएगा।
- बलविंदर कुमार, सदस्य यूपी रेरा