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सुशांत लोक-3 बिना पर्यावरण क्लीयरेंस के बसा
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:35 PM IST
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बिना पर्यावरण क्लीयरेंस के बसा सुशांत लोक तीन
गुरुग्राम। करीब 200 एकड़ में बसे सुशांत लोक तीन को तैयार करने से पहले अंसल और आधारशिला बिल्डर ने पर्यावरण मंजूरी नहीं लिया था। इसका खुलासा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कई खामियां बताई गई हैं। जिन्हें विकास के समय दरकिनार किया गया था।
शिकायतकर्ता के वकील यतीश गोयल ने बताया कि एनजीटी द्वारा गठित इस जांच कमेटी में शामिल पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निदेशक रघु कुमार कुदाली, सीपीसीबी के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. प्रशांत गरगवा, उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, प्रदूषण विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी जेबी शर्मा, जिला नगर योजनाकार आरएस बाट ने 11 सितंबर और 17 अक्तूबर को सुशांत लोक का निरीक्षण किया था। गत 30 अक्तूबर को एनजीटी को सौंपी जांच रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि इस कॉलोनी के अधिकांश बंगलों में बिना अनुमति के स्वीमिंग पूल बनाए गए हैं, जिनमें भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बकौल गोयल, इसके साथ ही बिल्डर ने करीब 91 एकड़ जमीन को सड़क, ओपन स्पेस, स्कूल, सामुदायिक भवन आदि के लिए आरक्षित नहीं किया। ग्रीन एरिया 6.18 फीसदी होना चाहिए था, जो 5.71 फीसदी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बिल्डर ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाया है। अभी तक इस कॉलोनी को जिला नगर योजनाकार की ओर से पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया गया है। इसका जिक्र जांच रिपोर्ट में हुआ है।
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गुरुग्राम। करीब 200 एकड़ में बसे सुशांत लोक तीन को तैयार करने से पहले अंसल और आधारशिला बिल्डर ने पर्यावरण मंजूरी नहीं लिया था। इसका खुलासा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से गठित कमेटी की जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कई खामियां बताई गई हैं। जिन्हें विकास के समय दरकिनार किया गया था।
शिकायतकर्ता के वकील यतीश गोयल ने बताया कि एनजीटी द्वारा गठित इस जांच कमेटी में शामिल पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निदेशक रघु कुमार कुदाली, सीपीसीबी के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. प्रशांत गरगवा, उपायुक्त विनय प्रताप सिंह, प्रदूषण विभाग के तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी जेबी शर्मा, जिला नगर योजनाकार आरएस बाट ने 11 सितंबर और 17 अक्तूबर को सुशांत लोक का निरीक्षण किया था। गत 30 अक्तूबर को एनजीटी को सौंपी जांच रिपोर्ट में कमेटी ने कहा है कि इस कॉलोनी के अधिकांश बंगलों में बिना अनुमति के स्वीमिंग पूल बनाए गए हैं, जिनमें भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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बकौल गोयल, इसके साथ ही बिल्डर ने करीब 91 एकड़ जमीन को सड़क, ओपन स्पेस, स्कूल, सामुदायिक भवन आदि के लिए आरक्षित नहीं किया। ग्रीन एरिया 6.18 फीसदी होना चाहिए था, जो 5.71 फीसदी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बिल्डर ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाया है। अभी तक इस कॉलोनी को जिला नगर योजनाकार की ओर से पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया गया है। इसका जिक्र जांच रिपोर्ट में हुआ है।
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