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घोषणा के बाद भी अपग्रेड नहीं हुए बेटियों के स्कूल कैसे पढ़े, कैसे आगे बढ़े
Updated Mon, 10 Dec 2018 12:12 AM IST
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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों को अपग्रेड होने का इंतजार
सीएम ने एक साल पहले की थी घोषणा, 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर छात्राएं
नूंह। जिले की बेटियों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित हो रहे जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी बारहवीं कक्षा तक अपग्रेड नहीं हुए हैं। जिसके कारण यहां की बेटियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। साथ ही इससे सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर भी पानी फिर रहा रहा है।
नूंह जिले के खंड नूंह, नगीना, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना व तावडू में केंद्र और प्रदेश सरकार के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय चल रहे हैं। इन स्कूलों में अल्पसंख्यक व बीपीएल परिवारों की लगभग तेरह सौ बेटियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। छठी से दसवीं तक चल रहे ये स्कूल लड़कियों के हैं और यहां हॉस्टल में इनके लिए रहना-खाना फ्री है तो किताबें भी मुफ्त में मिलती हैं। यहां पूरा स्टाफ महिला होने के कारण इन स्कूलों के प्रति लोगों में विश्वसनीयता है। जिसके कारण यहां दाखिले के दौरान मारामारी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सरकार में इन स्कूलों को अस्थायी मान्यता देकर बारहवीं तक का किया गया था, ताकि दसवीं के बाद बेटियों के कदम पढ़ाई में न रुकें। लेकिन वर्तमान सरकार ने ‘बेटी पढ़ाओ’ के नारे के विपरीत इन स्कूलों की अस्थायी मान्यता को खत्म कर उन्हें वापस दसवीं कक्षा तक कर दिया। बार-बार क्षेत्र के लोगों द्वारा इन स्कूलों को बारहवीं कक्षा तक करने की मांग की गई। सालभर पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल और शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने इन स्कूलों की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए बारहवीं कक्षा तक करने की घोषणा की, लेकिन अभी तक उनकी घोषणा पर कोई अमल नहीं किया गया है। जिससे क्षेत्र के अभिभावकों व बेटियों में निराशा है।
अभिभावक अख्तर हुसैन चंदेनी, अब्दुल हई, ताहिर हुसैन, रामसिंह व छात्रा निशा, ताहिरा, नजराना और सारमीन का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल होना चाहिए। ये स्कूल जिले में लड़कियों की शिक्षा में सबसे बेहतर साबित हो रहे हैं। यहां लड़कियों को हॉस्टल सुविधा है और सारा स्टाफ महिला है। लोगों की मांग है कि सरकार इन स्कूलों को तत्काल बारहवीं कक्षा तक मान्यता दे।
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अपग्रेड होने पर ये होगा लाभ : यहां आज भी लड़कियों की साक्षरता दर 37 प्रतिशत के लगभग है। अगर ये स्कूल अपग्रेड होते हैं तो निश्चित तौर पर यह यहां के लिए बेहतर साबित होगा और महिला साक्षरता दर को बढ़ाएगा।
हमारी तरफ से तैयारी है। उम्मीद है कि अगले सत्र में ये कक्षाएं लगाई जाएं। अगर घोषणा सिरे चढ़ती है तो करीब चार सौ लड़कियां इन स्कूलों के जरिये बारहवीं कक्षा तक पढ़ सकेंगी। ये स्कूल वास्तव में बेटियों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। - अनूप जाखड़, डीपीसी
फोटो- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नूंह।
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सीएम ने एक साल पहले की थी घोषणा, 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर छात्राएं
नूंह। जिले की बेटियों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित हो रहे जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद भी बारहवीं कक्षा तक अपग्रेड नहीं हुए हैं। जिसके कारण यहां की बेटियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। साथ ही इससे सरकार की बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना पर भी पानी फिर रहा रहा है।
नूंह जिले के खंड नूंह, नगीना, फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना व तावडू में केंद्र और प्रदेश सरकार के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय चल रहे हैं। इन स्कूलों में अल्पसंख्यक व बीपीएल परिवारों की लगभग तेरह सौ बेटियां शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। छठी से दसवीं तक चल रहे ये स्कूल लड़कियों के हैं और यहां हॉस्टल में इनके लिए रहना-खाना फ्री है तो किताबें भी मुफ्त में मिलती हैं। यहां पूरा स्टाफ महिला होने के कारण इन स्कूलों के प्रति लोगों में विश्वसनीयता है। जिसके कारण यहां दाखिले के दौरान मारामारी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सरकार में इन स्कूलों को अस्थायी मान्यता देकर बारहवीं तक का किया गया था, ताकि दसवीं के बाद बेटियों के कदम पढ़ाई में न रुकें। लेकिन वर्तमान सरकार ने ‘बेटी पढ़ाओ’ के नारे के विपरीत इन स्कूलों की अस्थायी मान्यता को खत्म कर उन्हें वापस दसवीं कक्षा तक कर दिया। बार-बार क्षेत्र के लोगों द्वारा इन स्कूलों को बारहवीं कक्षा तक करने की मांग की गई। सालभर पहले मुख्यमंत्री मनोहर लाल और शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने इन स्कूलों की बेहतरी को ध्यान में रखते हुए बारहवीं कक्षा तक करने की घोषणा की, लेकिन अभी तक उनकी घोषणा पर कोई अमल नहीं किया गया है। जिससे क्षेत्र के अभिभावकों व बेटियों में निराशा है।
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अभिभावक अख्तर हुसैन चंदेनी, अब्दुल हई, ताहिर हुसैन, रामसिंह व छात्रा निशा, ताहिरा, नजराना और सारमीन का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल होना चाहिए। ये स्कूल जिले में लड़कियों की शिक्षा में सबसे बेहतर साबित हो रहे हैं। यहां लड़कियों को हॉस्टल सुविधा है और सारा स्टाफ महिला है। लोगों की मांग है कि सरकार इन स्कूलों को तत्काल बारहवीं कक्षा तक मान्यता दे।
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अपग्रेड होने पर ये होगा लाभ : यहां आज भी लड़कियों की साक्षरता दर 37 प्रतिशत के लगभग है। अगर ये स्कूल अपग्रेड होते हैं तो निश्चित तौर पर यह यहां के लिए बेहतर साबित होगा और महिला साक्षरता दर को बढ़ाएगा।
हमारी तरफ से तैयारी है। उम्मीद है कि अगले सत्र में ये कक्षाएं लगाई जाएं। अगर घोषणा सिरे चढ़ती है तो करीब चार सौ लड़कियां इन स्कूलों के जरिये बारहवीं कक्षा तक पढ़ सकेंगी। ये स्कूल वास्तव में बेटियों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। - अनूप जाखड़, डीपीसी
फोटो- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नूंह।