{"_id":"5f4ab3148ebc3eabed24c887","slug":"14-000-flat-buyers-given-possession-without-registration-noida-news-noi5328242155","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना रजिस्ट्री कराए 14,000 खरीदारों को दे दिया कब्जा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना रजिस्ट्री कराए 14,000 खरीदारों को दे दिया कब्जा
विज्ञापन
बिना रजिस्ट्री कराए 14,000 खरीदारों को दे दिया कब्जा
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के 14 हजार फ्लैट खरीदार पैसे देकर भी मालिकाना हक से वंचित हैं। उन्होंने बिल्डर को फ्लैट की पूरी कीमत अदा कर दी। फिर बिल्डरों ने उनको झांसे में लेकर बिना रजिस्ट्री के घर दे दिया। अब ऐसे लोग बिना मालिकाना हक के घरों में रह रहे हैं। इनकी रजिस्ट्री कौन कराएगा। इस पर पेच फंसा हुआ है। प्राधिकरण भी इस मामले में आंखें मूंदे बैठा है। अब रजिस्ट्री विभाग इस मामले में प्राधिकरण पर दखल देने का दबाव बनाएगा। रजिस्ट्री नहीं होने से विभाग को भी करीब 700 करोड़ का नुकसान हुआ है।
रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बाबत एक बार बिल्डरों पर एफआईआर कराने तक की नौबत आ चुकी है। लेकिन बार-बार नोटिस देने के बावजूद बिल्डरों ने फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री नहीं कराई। खरीदार अब भी बिना मालिकाना हक के अपने फ्लैटों में रह रहे हैं। रजिस्ट्री विभाग मानवता के नाते उनसे फ्लैट भी खाली नहीं करा सकता।
दरअसल, बीते कुछ वर्षों पहले फ्लैट पर कब्जा नहीं मिलने पर खूब हंगामा हुआ था। उस समय जिन-जिन बिल्डरों ने फ्लैट का काम पूरा करा लिया। उन्होंने बिना रजिस्ट्री कराए फ्लैट खरीदारों को पजेशन दे दिया। उस दौरान वादा किया गया था कि जल्द ही रजिस्ट्री का काम पूरा करा दिया जाएगा। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
इस वजह नहीं हो पाई रजिस्ट्री
बिल्डर फ्लैट निर्माण का काम पूरा कर लेने के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेते हैं। इसके बाद उनको कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलता है। तब जाकर फ्लैट की रजिस्ट्री कराई जा सकती है। प्राधिकरण की ओर से बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट तब दिया जाता है जब तक बिल्डर पर कोई बकाया नहीं हो। ऐसे मामलों में बिल्डरों ने प्राधिकरण का बकाया नहीं चुकाया। लिहाजा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सका। ऐसे में बिल्डरों ने बिना रजिस्ट्री कराए खरीदारों को पजेशन दे दिया।
एग्रीमेंट टू सबलीज की योजना भी हुई फेल
तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह ने उस समय एग्रीमेंट टू सबलीज की योजना घोषित की थी। इसमें खरीदारों को रजिस्ट्री का पैसा चुकाने पर एक लीगल दस्तावेज बनाकर दिए जाने की योजना थी। इस योजना में महज ढाई हजार खरीदारों ने दिलचस्पी दिखाई। खरीदारों का कहना था कि जब रजिस्ट्री का पूरा पैसा जमा करेंगे तो रजिस्ट्री भी होनी चाहिए। केवल एक लीगल दस्तावेज लेने का क्या फायदा होगा।
हर रजिस्ट्री से मिलता है तीन लाख से पांच लाख का राजस्व
रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रुप हाउसिंग की एक रजिस्ट्री में तीन से पांच लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में अगर इनकी रजिस्ट्री होती तो कम से कम 700 करोड़ रुपये विभाग के खाते में आते।
अब एक प्रतिशत तक की रजिस्ट्री फीस से भी पेच
अब नए नियम के तहत संपत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत रजिस्ट्री की फीस लगेगी, जो कि पहले अधिकतम 20 हजार रुपये थी। यह राशि बिल्डर चुकाता था। अगर आज की तिथि में बिल्डर को रजिस्ट्री करानी पड़ी तो उसे भारी नुकसान होगा। लिहाजा यह भी एक बड़ा पेच है।
विभिन्न सोसाइटियों में अब भी बिना रजिस्ट्री कराए 14 हजार लोग रह रहे हैं। इससे विभाग को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। अब रजिस्ट्री विभाग की ओर से प्राधिकरण पर दबाव बनाया जाएगा कि वह इस मामले में कोई रास्ता निकाले।
- एसके त्रिपाठी, एआईजी स्टांप
विज्ञापन
नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के 14 हजार फ्लैट खरीदार पैसे देकर भी मालिकाना हक से वंचित हैं। उन्होंने बिल्डर को फ्लैट की पूरी कीमत अदा कर दी। फिर बिल्डरों ने उनको झांसे में लेकर बिना रजिस्ट्री के घर दे दिया। अब ऐसे लोग बिना मालिकाना हक के घरों में रह रहे हैं। इनकी रजिस्ट्री कौन कराएगा। इस पर पेच फंसा हुआ है। प्राधिकरण भी इस मामले में आंखें मूंदे बैठा है। अब रजिस्ट्री विभाग इस मामले में प्राधिकरण पर दखल देने का दबाव बनाएगा। रजिस्ट्री नहीं होने से विभाग को भी करीब 700 करोड़ का नुकसान हुआ है।
रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बाबत एक बार बिल्डरों पर एफआईआर कराने तक की नौबत आ चुकी है। लेकिन बार-बार नोटिस देने के बावजूद बिल्डरों ने फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री नहीं कराई। खरीदार अब भी बिना मालिकाना हक के अपने फ्लैटों में रह रहे हैं। रजिस्ट्री विभाग मानवता के नाते उनसे फ्लैट भी खाली नहीं करा सकता।
विज्ञापन
दरअसल, बीते कुछ वर्षों पहले फ्लैट पर कब्जा नहीं मिलने पर खूब हंगामा हुआ था। उस समय जिन-जिन बिल्डरों ने फ्लैट का काम पूरा करा लिया। उन्होंने बिना रजिस्ट्री कराए फ्लैट खरीदारों को पजेशन दे दिया। उस दौरान वादा किया गया था कि जल्द ही रजिस्ट्री का काम पूरा करा दिया जाएगा। लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।
विज्ञापन
इस वजह नहीं हो पाई रजिस्ट्री
बिल्डर फ्लैट निर्माण का काम पूरा कर लेने के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेते हैं। इसके बाद उनको कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलता है। तब जाकर फ्लैट की रजिस्ट्री कराई जा सकती है। प्राधिकरण की ओर से बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट तब दिया जाता है जब तक बिल्डर पर कोई बकाया नहीं हो। ऐसे मामलों में बिल्डरों ने प्राधिकरण का बकाया नहीं चुकाया। लिहाजा कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हो सका। ऐसे में बिल्डरों ने बिना रजिस्ट्री कराए खरीदारों को पजेशन दे दिया।
एग्रीमेंट टू सबलीज की योजना भी हुई फेल
तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह ने उस समय एग्रीमेंट टू सबलीज की योजना घोषित की थी। इसमें खरीदारों को रजिस्ट्री का पैसा चुकाने पर एक लीगल दस्तावेज बनाकर दिए जाने की योजना थी। इस योजना में महज ढाई हजार खरीदारों ने दिलचस्पी दिखाई। खरीदारों का कहना था कि जब रजिस्ट्री का पूरा पैसा जमा करेंगे तो रजिस्ट्री भी होनी चाहिए। केवल एक लीगल दस्तावेज लेने का क्या फायदा होगा।
हर रजिस्ट्री से मिलता है तीन लाख से पांच लाख का राजस्व
रजिस्ट्री विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रुप हाउसिंग की एक रजिस्ट्री में तीन से पांच लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में अगर इनकी रजिस्ट्री होती तो कम से कम 700 करोड़ रुपये विभाग के खाते में आते।
अब एक प्रतिशत तक की रजिस्ट्री फीस से भी पेच
अब नए नियम के तहत संपत्ति की कुल कीमत का एक प्रतिशत रजिस्ट्री की फीस लगेगी, जो कि पहले अधिकतम 20 हजार रुपये थी। यह राशि बिल्डर चुकाता था। अगर आज की तिथि में बिल्डर को रजिस्ट्री करानी पड़ी तो उसे भारी नुकसान होगा। लिहाजा यह भी एक बड़ा पेच है।
विभिन्न सोसाइटियों में अब भी बिना रजिस्ट्री कराए 14 हजार लोग रह रहे हैं। इससे विभाग को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। अब रजिस्ट्री विभाग की ओर से प्राधिकरण पर दबाव बनाया जाएगा कि वह इस मामले में कोई रास्ता निकाले।
- एसके त्रिपाठी, एआईजी स्टांप