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सोहना से अलवर तक 6 लाइन हाईवे के लिए धरना एक नवंबर को होगा
Updated Mon, 29 Oct 2018 11:28 PM IST
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सिक्स लेन हाइवे के लिए एक नवंबर से होगा धरना-प्रदर्शन
-वात संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में कई संगठन संयुक्त रूप से करेंगे अनिश्चितकालीन धरना
-सोहना से अलवर तक सिंगल रोड पर हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए काफी समय से उठाई जा रही है मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नगीना। देश के सबसे पुराने राजमार्गों में से एक शेरशाह सूरी के नाम से प्रख्यात दिल्ली से मेवात वाया अलवर हाईवे एक बार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। इसको काफी समय से सिक्स लेन करने की मांग उठाई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। एक नवंबर से बड़कली चौक पर मेवात संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
सोमवार को बड़कली चौक पर एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें पंच-सरपंच व स्वयंसेवी संगठन गालिब मौजी खान चैरिटी, जागो चलो महिला संगठन, हरियाणा सूचना अधिकार संगठन और मेवात संघर्ष समिति के पदाधिकारी शामिल हुए। धरने के लिए क्षेत्र के अन्य संगठनों को खुला न्योता आयोजकों ने देने का फैसला लिया। संघर्ष समिति के प्रधान सूबेदार खान व उपाध्यक्ष कवि इलियास प्रधान ने बताया कि क्षेत्र की यह सबसे पुरानी मांग है। इससे गुरुग्राम, अलवर, नूंह जिले सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। आए दिन सिंगल राजमार्ग पर दुर्घटना होती रहती है। खास बात यह है कि पिछले दो माह के दौरान दो दर्जन के अधिक लोगों की इस हाईवे पर जान जा चुकी है। इतना ही नहीं घायलों को तुरंत इलाज न मिलने के कारण भी जान बचाने में देरी होती रही हैं। सबसे बड़ा कारण जिला अस्पताल मांडीखेड़ा में ट्रामा सेंटर का नहीं होना है। इसके लिए भी एक दशक से अभियान चल रहे हैं, उन्हीं की बदौलत सरकार ने ट्रामा सेंटर खोलने की तैयारियां की हैं, लेकिन कागज अभी भी आधे-अधूरे हैं।
पूर्व सरपंच हाजी सब्बीर, उमर मोहम्मद, फतेह मोहम्मद, सद्दीक ने बताया कि जिला अस्पताल मंडीखेड़ा में ही 300 बेड का अस्पताल बनाया जाए, क्योंकि यहां से फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना की दूरी बराबर है। वहीं 3 नवंबर 2008 को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने फोरलेन की आधारशिला रखी थी और 10 साल हो गए, अभी तक निर्माण आरंभ नहीं हो सका है। लोगों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन जानबूझकर 60 प्रतिशत आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के मूड में नहीं है। तभी तो जिला मुख्यालय के लिए ट्रामा सेंटर और नया अस्पताल बनाने के लिए कागज भेजे गए हैं।
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बैठक में लोगों ने बताया कि पहले से ही नूंह में 500 बेड का अस्पताल 8 साल से चल रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा आवश्यकता फिरोजपुर झिरका पुन्हाना और नगीना क्षेत्र के लोगों की है। सात लाख की आबादी इन 3 ब्लॉकों में रहती है और यह जिले के सबसे पिछड़े क्षेत्र है। जहां आज भी जिला स्वास्थ्य विभाग की पहुंच कमजोर है।
फोटो- बड़कली चौक पर बैठक में गौजूद लोग।
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-वात संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में कई संगठन संयुक्त रूप से करेंगे अनिश्चितकालीन धरना
-सोहना से अलवर तक सिंगल रोड पर हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए काफी समय से उठाई जा रही है मांग
अमर उजाला ब्यूरो
नगीना। देश के सबसे पुराने राजमार्गों में से एक शेरशाह सूरी के नाम से प्रख्यात दिल्ली से मेवात वाया अलवर हाईवे एक बार सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है। इसको काफी समय से सिक्स लेन करने की मांग उठाई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। एक नवंबर से बड़कली चौक पर मेवात संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
सोमवार को बड़कली चौक पर एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें पंच-सरपंच व स्वयंसेवी संगठन गालिब मौजी खान चैरिटी, जागो चलो महिला संगठन, हरियाणा सूचना अधिकार संगठन और मेवात संघर्ष समिति के पदाधिकारी शामिल हुए। धरने के लिए क्षेत्र के अन्य संगठनों को खुला न्योता आयोजकों ने देने का फैसला लिया। संघर्ष समिति के प्रधान सूबेदार खान व उपाध्यक्ष कवि इलियास प्रधान ने बताया कि क्षेत्र की यह सबसे पुरानी मांग है। इससे गुरुग्राम, अलवर, नूंह जिले सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। आए दिन सिंगल राजमार्ग पर दुर्घटना होती रहती है। खास बात यह है कि पिछले दो माह के दौरान दो दर्जन के अधिक लोगों की इस हाईवे पर जान जा चुकी है। इतना ही नहीं घायलों को तुरंत इलाज न मिलने के कारण भी जान बचाने में देरी होती रही हैं। सबसे बड़ा कारण जिला अस्पताल मांडीखेड़ा में ट्रामा सेंटर का नहीं होना है। इसके लिए भी एक दशक से अभियान चल रहे हैं, उन्हीं की बदौलत सरकार ने ट्रामा सेंटर खोलने की तैयारियां की हैं, लेकिन कागज अभी भी आधे-अधूरे हैं।
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पूर्व सरपंच हाजी सब्बीर, उमर मोहम्मद, फतेह मोहम्मद, सद्दीक ने बताया कि जिला अस्पताल मंडीखेड़ा में ही 300 बेड का अस्पताल बनाया जाए, क्योंकि यहां से फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना की दूरी बराबर है। वहीं 3 नवंबर 2008 को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने फोरलेन की आधारशिला रखी थी और 10 साल हो गए, अभी तक निर्माण आरंभ नहीं हो सका है। लोगों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन जानबूझकर 60 प्रतिशत आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के मूड में नहीं है। तभी तो जिला मुख्यालय के लिए ट्रामा सेंटर और नया अस्पताल बनाने के लिए कागज भेजे गए हैं।
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बैठक में लोगों ने बताया कि पहले से ही नूंह में 500 बेड का अस्पताल 8 साल से चल रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा आवश्यकता फिरोजपुर झिरका पुन्हाना और नगीना क्षेत्र के लोगों की है। सात लाख की आबादी इन 3 ब्लॉकों में रहती है और यह जिले के सबसे पिछड़े क्षेत्र है। जहां आज भी जिला स्वास्थ्य विभाग की पहुंच कमजोर है।
फोटो- बड़कली चौक पर बैठक में गौजूद लोग।