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बोर्ड तय करेगा संपति फ्री होल्ड होगी या नहीं: सीईओ
Updated Mon, 17 Sep 2018 11:38 PM IST
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बोर्ड तय करेगा संपत्ति
फ्री होल्ड होगी या नहीं
कंसलटेंट का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में लाया जाएगा : सीईओ
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। नोएडा में आवासीय, व्यावसायिक और अन्य संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की मांग कई संगठन कर रहे हैं। सीईओ आलोक टंडन ने कहा कि फ्री होल्ड के लिए कंसलटेंट से प्रस्ताव देने को कहा गया था। उसनेे आवासीय संपत्तियों का एक प्रस्ताव दिया है, जिसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड तय करेगा कि अमुक संपत्ति फ्री होल्ड होगी या नहीं।
दरअसल, शहर के कई सामाजिक संगठनों की ओर से संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की अपील की जा रही है। यहां की संपत्तियों को लीज पर एक तय अवधि के लिए आवंटित किया जाता है। इसके बाद उसका रिनुअल कराना होगा। ऐसे में संपत्ति उस तय अवधि के बाद प्राधिकरण की ही रहेगी। एक बार संपत्ति को फ्री होल्ड कर दिया जाएगा तो यह पूरी तरह आवंटी की मानी जाएगी। इसके लिए कोई अवधि नहीं होगी। यही नहीं, प्राधिकरण की ओर से उक्त संपत्ति पर किसी तरह के निर्माण आदि के लिए कोई नियम आदि तय नहीं किए जा सकेंगे। इस वजह से कुछ संगठन इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा होता है तो नोएडा भी दिल्ली की तरह हो जाएगा। वहां सभी जगह आवासीय और कमर्शियल के मिश्रण के कारण हालात बदतर हैं।
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फ्री होल्ड होगी या नहीं
कंसलटेंट का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में लाया जाएगा : सीईओ
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। नोएडा में आवासीय, व्यावसायिक और अन्य संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की मांग कई संगठन कर रहे हैं। सीईओ आलोक टंडन ने कहा कि फ्री होल्ड के लिए कंसलटेंट से प्रस्ताव देने को कहा गया था। उसनेे आवासीय संपत्तियों का एक प्रस्ताव दिया है, जिसे बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। बोर्ड तय करेगा कि अमुक संपत्ति फ्री होल्ड होगी या नहीं।
दरअसल, शहर के कई सामाजिक संगठनों की ओर से संपत्तियों को फ्री होल्ड करने की अपील की जा रही है। यहां की संपत्तियों को लीज पर एक तय अवधि के लिए आवंटित किया जाता है। इसके बाद उसका रिनुअल कराना होगा। ऐसे में संपत्ति उस तय अवधि के बाद प्राधिकरण की ही रहेगी। एक बार संपत्ति को फ्री होल्ड कर दिया जाएगा तो यह पूरी तरह आवंटी की मानी जाएगी। इसके लिए कोई अवधि नहीं होगी। यही नहीं, प्राधिकरण की ओर से उक्त संपत्ति पर किसी तरह के निर्माण आदि के लिए कोई नियम आदि तय नहीं किए जा सकेंगे। इस वजह से कुछ संगठन इसका विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा होता है तो नोएडा भी दिल्ली की तरह हो जाएगा। वहां सभी जगह आवासीय और कमर्शियल के मिश्रण के कारण हालात बदतर हैं।
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