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प्रवासी पक्षियों के आवागमन में बाधक हैं ऊंची इमारतें: आनंद आर्या
Updated Fri, 10 Aug 2018 09:56 PM IST
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एनजीटी से जुड़ी हुए नोएडा से खबर
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हेडिंग: प्रवासी पक्षियों के आवागमन में बाधक हैं ऊंची इमारतें: आनंद आर्या
ओखला पक्षी विहार का दायरा 100 मीटर के अंदर समेटने के खिलाफ डाली गई है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। प्रवासी पक्षियों के आवागमन का एक रूट होता है। वह उन्हीं रूट का उपयोग आने जाने के लिए करते हैं। अगर इसके बीच में कोई ऊंची इमारत खड़ी हो जाए तो यह उनके लिए बाधा के समान है। फिर वह उस पक्षी विहार से विमुख होने लगते हैं। यह कहना है कि पर्यावरणविद आनंद आर्य का, जिन्होंने एनजीटी में एक बार फिर ओखला पक्षी विहार के 100 मीटर के दायरे के बाहर हो रहे निर्माण पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि अगर कोई इमारत पक्षी विहार के बगल में खड़ी हो जाए तो रात में उस इमारत से निकलने वाली रोशनी पक्षियों के लिए परेशानी का सबब बनेंगी। यही नहीं पक्षी अपने रूट में इन इमारतों में लगे शीशों से टकराएंगे। लिहाजा, इनका यहां नहीं होना ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि कोई भी इनके रूट को डिस्टर्ब नहीं कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि पक्षी विहार के एक ओर तो इसका दायरा 1.27 किलोमीटर है। वहीं तीन ओर 100 मीटर है। यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने के बराबर है। मामले में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से सलाह भी मांगी गई थी। दरअसल, जब बीते कुछ वर्ष पहले एनजीटी ने 10 किलोमीटर के दायरे में किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाई थी तो उस दौरान नोएडा के 64 प्रोजेक्टों पर ताला लग गया था, लेकिन बाद पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद फिर से काम शुरू हो गया।
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हेडिंग: प्रवासी पक्षियों के आवागमन में बाधक हैं ऊंची इमारतें: आनंद आर्या
ओखला पक्षी विहार का दायरा 100 मीटर के अंदर समेटने के खिलाफ डाली गई है याचिका
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। प्रवासी पक्षियों के आवागमन का एक रूट होता है। वह उन्हीं रूट का उपयोग आने जाने के लिए करते हैं। अगर इसके बीच में कोई ऊंची इमारत खड़ी हो जाए तो यह उनके लिए बाधा के समान है। फिर वह उस पक्षी विहार से विमुख होने लगते हैं। यह कहना है कि पर्यावरणविद आनंद आर्य का, जिन्होंने एनजीटी में एक बार फिर ओखला पक्षी विहार के 100 मीटर के दायरे के बाहर हो रहे निर्माण पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि अगर कोई इमारत पक्षी विहार के बगल में खड़ी हो जाए तो रात में उस इमारत से निकलने वाली रोशनी पक्षियों के लिए परेशानी का सबब बनेंगी। यही नहीं पक्षी अपने रूट में इन इमारतों में लगे शीशों से टकराएंगे। लिहाजा, इनका यहां नहीं होना ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि कोई भी इनके रूट को डिस्टर्ब नहीं कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि पक्षी विहार के एक ओर तो इसका दायरा 1.27 किलोमीटर है। वहीं तीन ओर 100 मीटर है। यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने के बराबर है। मामले में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से सलाह भी मांगी गई थी। दरअसल, जब बीते कुछ वर्ष पहले एनजीटी ने 10 किलोमीटर के दायरे में किसी तरह के निर्माण पर रोक लगाई थी तो उस दौरान नोएडा के 64 प्रोजेक्टों पर ताला लग गया था, लेकिन बाद पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद फिर से काम शुरू हो गया।
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