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Noida News: नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले को 10 साल का कारावास
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नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले को 10 साल का कारावास
-जिला न्यायालय की एडीजे फर्स्ट/पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने सुनवाई के बाद सुनाया फैसला
-नोएडा की सेक्टर-49 कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में जुलाई, 2019 की घटना
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश-वन/पॉक्सो एक्ट (फर्स्ट) की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति को दोषी कराकर देकर 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं दोषी के पिता को संदेह का लाभ मिला है। कोर्ट ने दोषी के पिता को बरी कर दिया हैं।
पीड़िता अपने परिवार के साथ नोएडा के सेक्टर-49 कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहती थी। मूलरूप से परिवार कानपुर का रहने वाला है। एक जुलाई 2019 को नाबालिग के पिता ने कोतवाली में मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि एक जुलाई की शाम छात्रा स्कूल के काम से साइबर कैफे गई थी। लौटते समय दोषी मनीष मिल गया। उसने जबरन रोक लिया और नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। बेहोश होने के बाद उसे कार में डाल कर कहीं ले गया। वहां से मनीष छात्रा को गुजरात ले गया। साथ में दोषी के माता-पिता भी थे। 4-5 दिन वहां एक कमरे में रखने के बाद वो नाबालिग छात्रा को मुंबई ले गया। मुंबई ले जाकर एक कमरे में रखा और जबरन दुष्कर्म किया। वहां दोषी मनीष के माता-पिता भी रहते थे। मनीष छात्रा को कोर्ट मैरिज कराने ले जा रहा था, लेकिन उसे माता-पिता कहीं चले गए। उसके बाद पुलिस ने उसी बीच छात्रा को बरामद कर लिया। एडीजे-1/पाक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश विकास नागर ने दोनों पक्षों के गवाहों को सुनने के बाद मनीष को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया हैं ।
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-जिला न्यायालय की एडीजे फर्स्ट/पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने सुनवाई के बाद सुनाया फैसला
-नोएडा की सेक्टर-49 कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में जुलाई, 2019 की घटना
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश-वन/पॉक्सो एक्ट (फर्स्ट) की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति को दोषी कराकर देकर 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं दोषी के पिता को संदेह का लाभ मिला है। कोर्ट ने दोषी के पिता को बरी कर दिया हैं।
पीड़िता अपने परिवार के साथ नोएडा के सेक्टर-49 कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में रहती थी। मूलरूप से परिवार कानपुर का रहने वाला है। एक जुलाई 2019 को नाबालिग के पिता ने कोतवाली में मामला दर्ज कराया था। आरोप था कि एक जुलाई की शाम छात्रा स्कूल के काम से साइबर कैफे गई थी। लौटते समय दोषी मनीष मिल गया। उसने जबरन रोक लिया और नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर दिया। बेहोश होने के बाद उसे कार में डाल कर कहीं ले गया। वहां से मनीष छात्रा को गुजरात ले गया। साथ में दोषी के माता-पिता भी थे। 4-5 दिन वहां एक कमरे में रखने के बाद वो नाबालिग छात्रा को मुंबई ले गया। मुंबई ले जाकर एक कमरे में रखा और जबरन दुष्कर्म किया। वहां दोषी मनीष के माता-पिता भी रहते थे। मनीष छात्रा को कोर्ट मैरिज कराने ले जा रहा था, लेकिन उसे माता-पिता कहीं चले गए। उसके बाद पुलिस ने उसी बीच छात्रा को बरामद कर लिया। एडीजे-1/पाक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश विकास नागर ने दोनों पक्षों के गवाहों को सुनने के बाद मनीष को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार दिया हैं ।
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