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नोएडा स्टेडियम के निर्माण के बावजूद खेल मैदान का समुचित उपयोग मुश्किल, सुविधाओं को तरसे सितारे

Wed, 11 Jul 2018 10:19 AM IST
प्रगति मिश्रा, अमर उजाला, नोएडा
प्रगति मिश्रा, अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 11 Jul 2018 10:19 AM IST
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Noida Stadium proper use for the playing field is difficult, players not getting facilities

शहर में अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय या राज्य स्तर के इवेंट कराने की राह आसान नहीं है।  करोड़ों की लागत से नोएडा स्टेडियम का निर्माण होने के बावजूद यहां विभिन्न स्पोर्ट्स ग्राउंड का समुचित उपयोग मुश्किल है। इसे लेकर अधिकांश खेल एसोसिएशन में नाराजगी है। 

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बास्केट बॉल एसोसिएशन के प्रमुख सुनील कुमार के मुताबिक, नोएडा स्टेडियम में सिर्फ ग्राउंड है, खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। स्टेडियम सिर्फ व्यवसायीकरण पर चल रहा है। यह किसी प्राइवेट क्लब से कम नहीं है, जहां  महंगी फीस देकर लोग शौक पूरा करते हैं।  शहर की प्रतिभाओं को मौका देने और राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय इवेंट कराने में यह कारगर नहीं है। 
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बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद खरे के मुताबिक, खिलाड़ियों और खेल एसोसिएशन के लिए नोएडा स्टेडियम का ज्यादा महत्व नहीं रह गया है। इसकी सबसे बड़ी कमी यह
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है कि यह पूरी तरह ठेकेदारों के आधीन है। जिन्हें खेलों से जुड़ी जानकारियां ही नहीं हैं, वह इसके कर्ताधर्ता बने हुए हैं।  शहर के कई खिलाड़ी बहुत प्रतिभावान हैं, लेकिन महंगी फीस देने में असमर्थ होने के कारण दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। यहां गोल्फ के लिए प्रतिदिन दो हजार रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, टेनिस की फीस करीब 35 हजार प्रतिमाह है। खेल एसोसिएशन को इवेंट कराने पर जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती और महंगी फीस भी देनी पड़ती है। इसलिए अधिकांश एसोसिएशन खेल इवेंट के लिए नोएडा स्टेडियम के बाहर  जगह
तलाशती हैं।

नोएडा स्टेडियम की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं एसोसिएशन

बैडमिंटन एसोसिएशन से जुड़े विवेक पाठक ने बताया कि जिले के अधिकांश खेल एसोसिएशन नोएडा स्टेडियम की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं। वे कई बार केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा, विधायक पंकज सिंह और प्राधिकरण अधिकारियों से मिले हैं।  पत्र, मेल, ट्वीट आदि माध्यमों से भी परेशानियों से अवगत कराया है, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला।

दूसरे जिलों का रुख कर रहीं प्रतिभाएं
स्केटिंग एसोसिएशन के सदस्य धर्मेंद राठौर ने बताया कि हमारे पास स्केटिंग के लिए जरूरी ग्राउंड ही नहीं है।  शहर की प्रतिभाओं के पास विकल्पों की कमी है। वह आगे बढ़ने के लिए प्राइवेट संस्थाओं और दूसरे जिलों पर निर्भर हो रही हैं।

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