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नोएडाः डायलिसिस के इंतजार में हुई वृद्धा की मौत, अस्पताल ने कहा था पहले कराओ कोरोना टेस्ट

Sat, 18 Apr 2020 06:48 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 18 Apr 2020 06:48 PM IST
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Noida hospital told old dialysis patient to get covid 19 test done first she died
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media

एक 50 वर्षीय महिला ने अपने डायलिसिस के शुरू होने के इंतजार में दम तोड़ दिया क्योंकि उसमें कोरोना के लक्षण दिखाई दे रहे थे जिसके बाद प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे कोरोना का टेस्ट कराने के लिए कहा। नोएडा सेक्टर 110 स्थित यथार्थ अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी मरीज में कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो उसे पहले सरकारी अस्पताल में अपना कोरोना टेस्ट कराना चाहिए।

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यह मरीज 93 वर्ष की थीं और इनका बेटा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अधिकारी है। उन्होंने बताया कि उनकी मां को जनवरी में रेनल फेल्योर डायग्नॉस हुआ था और तब से ही उनकी डायलिसिस चल रही थी। सोमवार को उनकी आखिरी डायलिसिस हुई थी। उन्हें सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया था लेकिन रात में सांस की तकलीफ होने लगी।
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इसके बाद बुधवार को हमने एंबुलेंस बुलाया और मां को यथार्थ अस्पताल ले गए। गेट पर ही उनका टेंपरेचर चेक हुआ फिर डॉक्टर ने उनका कोविड टेस्ट कराने को कहा। उस वक्त उन्हें एंबुलेंस ढूंढने में बहुत मुश्किल हुई अस्पताल ने इंतजाम करके नहीं दिया। उन्होंने 102 और 108 नंबर पर फोन भी किया लेकिन ड्राइवर को यही नहीं समझ आ रहा था कि सामान्य एंबुलेंस भेजी जाए या कोरोना मरीजों वाली एंबुलेंस भेजी जाए।
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बाद में हमने अपनी सोसायटी से निजी कार बुलाई और मां को घर ले गए और सोसायटी में डॉक्टरों ने मां का कोरोना टेस्ट कराने को कहा। अगले दिन गुरुवार सुबह 5 बजे मां का देहांत हो गया।

क्या है यथार्थ अस्पताल का पक्ष
यथार्थ हॉस्पिटल का कहना है कि मरीज का डायलिसिस हमारे यहां से ही चल रहा था। तीन से चार दिन पहले मरीज के परिजनों का फोन आया था तो अस्पताल प्रशासन ने उनको अस्पताल बुलाया था। लेकिन वो एक दिन बाद अस्पताल पहुंचे। 

जब वो अस्पताल में आए तो मरीज में लक्षण दिख रहे थे। इसलिए उन्हें कोविड-19 का टेस्ट कराने को बोला गया था। वो हॉटस्पॉट एरिया से आईं थीं। अगर एक प्रतिशत भी संक्रमित होतीं तो अन्य मरीजों के लिए भी परेशानी हो सकती थी। 


डायलसिया यूनिट का स्टाफ अन्य लोगों का भी डायलिसिस करता है। ऐसे में अन्य लोगों तक संक्रमण फैल सकता था। इसलिए उनको कहा गया था कि वो टेस्ट कराएं। ये अन्य मरीजों के लिए भी जरूरी था।

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