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फायर विभाग का खेल: जब बिल्डिंग में उपकरण नहीं लगा था तो बिल्डर को कैसे दे दी एनओसी
ब्यूरो,अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:11 PM IST
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फायर विभाग ने बिल्डर को सेक्टर-120 स्थित प्रतीक लॉरियल सोसाइटी में फायर के सभी उपकरण लगे होने की बात कहते हुए एनओसी दे दी। बिल्डर ने उसी आधार पर नोएडा प्राधिकरण से प्रोजेक्ट के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) ले ली। बाद में सोसाइटी को वहां रहने वाले लोगों की संस्था (एओए) को सुपुर्द कर दिया गया।
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अब जब अपार्टमेंट ऑनर एसोसिएशन (एओए) प्रत्येक वर्ष की भांति 2018 में फायर की एनओसी लेने अग्निशमन विभाग गया तो पता चला कि इमारत में दुर्घटना के वक्त काम आने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण नहीं लगा है इसलिए एनओसी नहीं मिल पाएगी। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उपकरण नहीं लगे थे तो पहले एनओसी कैसे मिली। नोएडा प्राधिकरण ने ओसी देते समय साइट पर निरीक्षण क्यों नहीं किया। यहां सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि मिलीभगत की भी संभावना है।
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प्रतीक लॉरियल सोसाइटी के एओए चेयरमैन वेद प्रकाश ने बताया कि 31 मार्च 2017 को संस्था ने बिल्डर से सोसाइटी का प्रभार ले लिया। उस समय जब पता किया गया था तो फायर की एनओसी होने की बात बताई गई थी। यही नहीं इमारत में 22 तरह के उपकरण मानक के मुताबिक लगे होने की बात कागज पर लिखी थी।
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एओए ने सोसाइटी का हैंडओवर लेने से पहले फायर विभाग से पूछा भी था। उस समय पता चला कि सब कुछ ठीक है। लेकिन अब जब 2018 में फायर एनओसी लेने के लिए एओए फायर विभाग गया तो पता चला कि इमारत के बेसमेंट में फायर स्मोक एक्स्ट्रैक्शन सिस्टम नहीं लगा हुआ है। इस उपकरण को लगाने के बाद ही एनओसी मिल पाएगी।
Noida Authority
बिल्डर भी अपने वादे से मुकरा
एओए चेयरमैन का कहना है कि इस उपकरण को लगाने में काफी पैसा लगेगा और बिल्डर ने सोसाइटी हैंडओवर करने से पहले यह वादा किया था कि किसी तरह की कमी होने पर उसे पूरा किया जाएगा। लेकिन अब अपने वादे से मुकर रहा है। अगर इसे वहां रहने वाले लोगों के सहयोग से लगाया जाएगा तो इसमें काफी बोझ पड़ेगा।
एनओसी देने का आधार पूछने पर नहीं मिला जवाब
यही नहीं एओए चेयरमैन का यह भी कहना है कि जब इमारत में फायर उपकरण मानक के अनुरूप नहीं लगे थे तो फायर विभाग ने एनओसी कैसे दे दी। उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण ने 9 मार्च 2017 को एनओसी दी तो उसमें भी बताया गया था कि सब कुछ मानकों के मुताबिक है। इससे यह पता चलता है कि प्राधिकरण ने सिर्फ कागजों के आधार पर ही एनओसी दे दी। यही नहीं एओए ने जब फायर विभाग से बिल्डर को एनओसी देने का आधार पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला।
1532 परिवारों पर आया संकट
यहां 1532 परिवार रहते हैं। यह 2013 से यहां रह रहे हैं। इनमें से कुछ की रजिस्ट्री 2013-14 में हुई। वहीं कुछ की रजिस्ट्री 2015-16 में हुई। अगर एओए को यह उपकरण लगाना पड़ा तो इन सभी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जो कि संकट लाएगा।
एओए चेयरमैन का कहना है कि इस उपकरण को लगाने में काफी पैसा लगेगा और बिल्डर ने सोसाइटी हैंडओवर करने से पहले यह वादा किया था कि किसी तरह की कमी होने पर उसे पूरा किया जाएगा। लेकिन अब अपने वादे से मुकर रहा है। अगर इसे वहां रहने वाले लोगों के सहयोग से लगाया जाएगा तो इसमें काफी बोझ पड़ेगा।
एनओसी देने का आधार पूछने पर नहीं मिला जवाब
यही नहीं एओए चेयरमैन का यह भी कहना है कि जब इमारत में फायर उपकरण मानक के अनुरूप नहीं लगे थे तो फायर विभाग ने एनओसी कैसे दे दी। उनका कहना है कि नोएडा प्राधिकरण ने 9 मार्च 2017 को एनओसी दी तो उसमें भी बताया गया था कि सब कुछ मानकों के मुताबिक है। इससे यह पता चलता है कि प्राधिकरण ने सिर्फ कागजों के आधार पर ही एनओसी दे दी। यही नहीं एओए ने जब फायर विभाग से बिल्डर को एनओसी देने का आधार पूछा तो कोई जवाब नहीं मिला।
1532 परिवारों पर आया संकट
यहां 1532 परिवार रहते हैं। यह 2013 से यहां रह रहे हैं। इनमें से कुछ की रजिस्ट्री 2013-14 में हुई। वहीं कुछ की रजिस्ट्री 2015-16 में हुई। अगर एओए को यह उपकरण लगाना पड़ा तो इन सभी परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जो कि संकट लाएगा।