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नोएडा, ग्रेनो अथॉरिटी ने आम्रपाली के प्रोजेक्ट पूरे करने में हाथ खड़े किए
Sat, 11 May 2019 08:56 AM IST
शाहरुख खान
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 11 May 2019 08:56 AM IST
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फाइल फोटो
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नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में आम्रपाली समूह के अधूरे प्रोजेक्टों को पूरा करने के मामले में हाथ खड़े कर दिए। प्राधिकरणों ने शीर्ष अदालत से स्पष्ट कहा कि वह इन अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकते, क्योंकि उनके पास इसके लिए जरूरी संसाधन और विशेषज्ञता नहीं हैं। उन्होंने इन प्रोजेक्ट को उच्चाधिकार प्राप्त समिति की निगरानी में किसी बड़े बिल्डर को सौंपने का सुझाव दिया।
प्राधिकरणों ने कहा कि वह भुगतान में लगातार विफल रहे आम्रपाली समूह के खिलाफ लीज रद्द करने जैसी कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। दोनों प्राधिकरणों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह का करीब 5000 करोड़ रुपये बकाया है, जिनमें मूलधन के अलावा ब्याज और जुर्माने का ब्याज भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्था होने के नाते घर खरीदारों के हितों का ध्यान रखते हुए भुगतान में बार-बार चूक करने के बावजूद समूह की लीज को रद्द नहीं किया है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पर किसका नियंत्रण होगा और कौन सा बिल्डर इसका काम पूरा करेगा।
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प्राधिकरणों ने कहा कि वह भुगतान में लगातार विफल रहे आम्रपाली समूह के खिलाफ लीज रद्द करने जैसी कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। दोनों प्राधिकरणों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली समूह का करीब 5000 करोड़ रुपये बकाया है, जिनमें मूलधन के अलावा ब्याज और जुर्माने का ब्याज भी शामिल है।
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उन्होंने कहा कि सरकारी संस्था होने के नाते घर खरीदारों के हितों का ध्यान रखते हुए भुगतान में बार-बार चूक करने के बावजूद समूह की लीज को रद्द नहीं किया है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने इस मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट पर किसका नियंत्रण होगा और कौन सा बिल्डर इसका काम पूरा करेगा।
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मालिकों को बेदखल करने की दी थी चेतावनी
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को आम्रपाली समूह के मालिकों को संपत्ति से बेदखल करने की चेतावनी दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह 42 हजार खरीदारों को घर देने में नाकाम रहे समूह के सभी 15 आवासीय प्रोजेक्टों के स्वामित्व का अधिकार नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों को दे सकती है।