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यहां पुरुषों के टॉयलेट में ही जाती हैं महिलाएं

Tue, 10 Mar 2015 02:15 PM IST
Updated Tue, 10 Mar 2015 02:15 PM IST
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No separate toilet, 15 per cent of women in offices in Delhi

दिल्ली में राजधानी के 85 फीसदी ऑफिसों में ही महिलाओं के लिए अलग टॉयलेट हैं। जबकि 15 फीसदी कार्यालयों में अलग से टॉयलेट की सुविधा नहीं है। दिल्ली की 61 फीसदी महिलाएं 8 से 10 घंटे ऑफिस में कामकाज करती हैं। जबकि ऑफिस जाने और आने में करीब एक से डेढ़ घंटे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेती हैं।

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महिलाओं को कामकाज के लिए घर से औसतन 30 किलोमीटर दूर तक सफर करना पड़ता है। तमाम दिक्कतों के बावजूद 68 फीसदी महिलाएं अपने ऑफिस व परिवार के काम से बेहद संतुष्ट हैं।
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खास बात यह है कि लगभग 57 फीसदी महिलाएं अपने वेतन में से मात्र 10 फीसदी ही अपनी चिकित्सा पर खर्च करती हैं। वहीं महज 50 फीसदी ने ही अपने लिए मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा ले रखी है।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट के धक्के रोज पड़ते सहने

No separate toilet, 15 per cent of women in offices in Delhi

दिल्ली की रफ्तार में महिलाएं परिवार को चलाने के लिए घर से बाहर कदम रख चुकी हैं, लेकिन सुरक्षा के अलावा अन्य दिक्कतें भी उन्हें झेलने पड़ती हैं। कुछ इन्हीं परेशानियों को जानने के लिए पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने जनवरी और फरवरी में दिल्ली के विभिन्न इलाकों में हर आयु वर्ग की लगभग दो हजार से अधिक महिलाओं पर सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेजीडेंट अलोक बी. श्रीराम के मुताबिक, सर्वे में करीब 59 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे बीमारी की हालत में ही छुट्टी लेती हैं। कभी घूमने-फिरने के लिए छुट्टी नहीं ली। जबकि 64 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे बीमारी में सरकारी की बजाय निजी अस्पताल में इलाज करने को तवज्जो देती हैं।

पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य अर्थशास्त्री एसपी शर्मा के मुताबिक, सर्वे में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि महिलाएं परिवार को चलाने के लिए घर से बाहर तो निकल रही हैं लेकिन उसके लिए उन्हें ऑफिस तक पहुंचने में बड़ी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। लगभग 61 फीसदी महिलाओं ने माना कि ऑफिस में 8 से 10 घंटे काम करने के अलावा वे हर दिन लगभग 30 किलोमीटर तक सुबह और शाम एक से डेढ़ घंटे का समय बसों, मेट्रो या ग्रामीण सेवा में गुजारती हैं।

कामकाजी महिलाओं से जुड़ी कुछ खास-खास बातें

No separate toilet, 15 per cent of women in offices in Delhi

- महज 31 फीसदी महिलाओं को कामकाम के दौरान डिस्पेंसरी व लेडी डॉक्टर की सुविधा मिलती है।
- 80 फीसदी महिलाओं ने माना कि आफिस से आने के बाद दो से चार घंटे घर में भी काम करती हैं।

- 47 फीसदी महिलाएं सर्दी, जुकाम, खांसी व बुखार के कारण ही अपना ऑफिस छोड़ती हैं।
- लगभग 23 फीसदी को सिरदर्द व शरीर में सबसे बड़ी दिक्कत है।

- महज 39 फीसदी महिलाएं ही प्रसव के बाद 3-6 महीने की छुट्टी ले सकी थीं
- जबकि 26 फीसदी के ऑफिस में इस प्रकार की विशेष छुट्टी का प्रावधान ही नहीं है।
- लगभग 70 फीसदी महिलाओं के ऑफिस में ही बीमारी की छुट्टी का प्रावधान है।

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