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सिलेबस से बाहर प्रश्नों पर स्वतः फ्री मार्क्स नहीं मिलेंगे : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट/रेस्टोरर विभागीय परीक्षा में सिलेबस से बाहर घोषित किए गए प्रश्नों पर उम्मीदवारों को स्वतः फ्री मार्क्स देने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने परीक्षा आयोजित करने वाले प्राधिकरण द्वारा अपनाए गए एक्सट्रापोलेशन फॉर्मूले को बरकरार रखते हुए कहा कि हटाए गए प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में पुनर्वितरित किए जाएंगे। केवल वही उम्मीदवार लाभांशित होंगे जिन्होंने उन हटाए गए प्रश्नों को सही उत्तर दिया था और इससे उनका कुल स्कोर बढ़ता हो।
मुख्य याचिका अरविंद एवं अन्य बनाम रजिस्ट्रार जनरल के तहत दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि सिलेबस से बाहर के प्रश्नों के लिए सभी उम्मीदवारों को समान अंक दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि प्राधिकरण का तरीका मनमाना नहीं है और इससे याचिकाकर्ताओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए ऐसे मामलों में अंकों का पुनर्वितरण उचित और तर्कसंगत है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने जूनियर ज्यूडिशियल असिस्टेंट/रेस्टोरर विभागीय परीक्षा में सिलेबस से बाहर घोषित किए गए प्रश्नों पर उम्मीदवारों को स्वतः फ्री मार्क्स देने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने परीक्षा आयोजित करने वाले प्राधिकरण द्वारा अपनाए गए एक्सट्रापोलेशन फॉर्मूले को बरकरार रखते हुए कहा कि हटाए गए प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में पुनर्वितरित किए जाएंगे। केवल वही उम्मीदवार लाभांशित होंगे जिन्होंने उन हटाए गए प्रश्नों को सही उत्तर दिया था और इससे उनका कुल स्कोर बढ़ता हो।
मुख्य याचिका अरविंद एवं अन्य बनाम रजिस्ट्रार जनरल के तहत दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि सिलेबस से बाहर के प्रश्नों के लिए सभी उम्मीदवारों को समान अंक दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि प्राधिकरण का तरीका मनमाना नहीं है और इससे याचिकाकर्ताओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए ऐसे मामलों में अंकों का पुनर्वितरण उचित और तर्कसंगत है।
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