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Delhi NCR News: सोशल मीडिया के जरिए शिकायतकर्ता पर किया हमला तो अग्रिम जमानत नहीं
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने हाल ही में अग्रिम जमानत के एक मामले में सोशल मीडिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि आरोपी शिकायतकर्ता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अनुचित भाषा के साथ पोस्ट करता है या जज तथा जांच एजेंसी के खिलाफ पोस्ट करता है, तो उसे अग्रिम जमानत देने से इन्कार किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कानून के छात्र आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपी महिला को रात में फोन करता था और शिकायतकर्ता की तस्वीरें फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपमानजनक टिप्पणियों के साथ पोस्ट की है। आरोपी ने न्यायिक अधिकारी और जांच एजेंसी को भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में हिस्सा बनाया। अदालत ने कहा कि आरोपी का ऐसा आचरण दर्शाता है कि अग्रिम जमानत मिलने पर वह शिकायतकर्ता और उसकी बेटी को परेशान करना जारी रख सकता है।
यह हैं आरोप
मामले में महिला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि युवक ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर शिकायतकर्ता की बेटी के नाम, तस्वीरों और संपर्क विवरण के साथ अश्लील, मानहानिकारक और अश्लील सामग्री बनाई और प्रसारित की। यह सब बिना सहमति के और शिकायतकर्ता की छवि खराब करने के इरादे से किया गया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने अनचाहे, धमकी भरे और अश्लील कॉल्स तथा मैसेज असामयिक समय में उसके मोबाइल पर भेजे, जिनमें कामुक इशारे, स्पष्ट धमकियां और बेटी तथा खुद को बदनाम करने व नुकसान पहुंचाने की धमकियां शामिल थीं, जब तक वह उसकी गैरकानूनी मांगों का पालन नहीं करती। अदालत ने कहा कि वर्तमान आरोप एकल घटना नहीं, बल्कि कई महीनों तक चले शारीरिक धमकी और डिजिटल उत्पीड़न का सिलसिला हैं।
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने हाल ही में अग्रिम जमानत के एक मामले में सोशल मीडिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि आरोपी शिकायतकर्ता की तस्वीरें सोशल मीडिया पर अनुचित भाषा के साथ पोस्ट करता है या जज तथा जांच एजेंसी के खिलाफ पोस्ट करता है, तो उसे अग्रिम जमानत देने से इन्कार किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने कानून के छात्र आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। आरोपी शिकायतकर्ता महिला के खिलाफ अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपी महिला को रात में फोन करता था और शिकायतकर्ता की तस्वीरें फेसबुक और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपमानजनक टिप्पणियों के साथ पोस्ट की है। आरोपी ने न्यायिक अधिकारी और जांच एजेंसी को भी अपने सोशल मीडिया पोस्ट में हिस्सा बनाया। अदालत ने कहा कि आरोपी का ऐसा आचरण दर्शाता है कि अग्रिम जमानत मिलने पर वह शिकायतकर्ता और उसकी बेटी को परेशान करना जारी रख सकता है।
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यह हैं आरोप
मामले में महिला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप है कि युवक ने सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर शिकायतकर्ता की बेटी के नाम, तस्वीरों और संपर्क विवरण के साथ अश्लील, मानहानिकारक और अश्लील सामग्री बनाई और प्रसारित की। यह सब बिना सहमति के और शिकायतकर्ता की छवि खराब करने के इरादे से किया गया। महिला का आरोप है कि आरोपी ने अनचाहे, धमकी भरे और अश्लील कॉल्स तथा मैसेज असामयिक समय में उसके मोबाइल पर भेजे, जिनमें कामुक इशारे, स्पष्ट धमकियां और बेटी तथा खुद को बदनाम करने व नुकसान पहुंचाने की धमकियां शामिल थीं, जब तक वह उसकी गैरकानूनी मांगों का पालन नहीं करती। अदालत ने कहा कि वर्तमान आरोप एकल घटना नहीं, बल्कि कई महीनों तक चले शारीरिक धमकी और डिजिटल उत्पीड़न का सिलसिला हैं।
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