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आप-कांग्रेस गठबंधन नहीं होने पर भाजपा ने ली राहत की सांस, दिल्ली में बढ़ी जीत की उम्मीद
Wed, 06 Mar 2019 05:13 AM IST
Priyesh Mishra
विजय सिंघल, दिल्ली
विजय सिंघल, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 06 Mar 2019 05:13 AM IST
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भाजपा
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कांग्रेस-आप के चुनावी गठबंधन के न होने से लोकसभा चुनावों में दिल्ली में भाजपा को सातों सीटों पर जीत सुनिश्चित नजर है। इससे पहले पार्टी नेता भी मान कर चल रहे थे कि गठबंधन होने से सभी सीटों पर कड़ा मुकाबला होगा। हालांकि अभी भी भाजपा को विश्वास नहीं हो रहा कि गठबंधन नहीं होगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि सत्ता ही होड़ में दोनों पार्टियां कभी भी गठबंधन कर सकती हैं। फिलहाल, भाजपा अभी भी सातों सीटों पर प्रत्याशियों की अपेक्षा कमल का निशान व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही प्रत्याशी मानकर प्रचार में जुटी है।
कांग्रेस-आप के बीच गठबंधन के समय-समय पर लग रहे कयासों से भाजपा के नेता असमंजस में थे। वे भले ही ऊपरी तौर पर किसी से भी मुकाबला न होने का तर्क देकर मोदी लहर की बात कर रहे थे। लेकिन, अंदरूनी तौर पर उनका मानना था कि यदि इन दोनों ही पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया तो कड़ा मुकाबला होगा और सात सीटों पर जीत मुश्किल है।
गठबंधन को देखकर सातों वर्तमान सांसदों के नामों में भी बदलाव की बात चल रही थी, ताकि जिन सीटों पर सांसदों का कामकाज ठीक नहीं रहा उन पर प्रत्याशी बदले भी जा सके। भाजपा अध्यक्ष सहित अन्य नेता समय-समय पर गठबंधन को बयानबाजी भी करते रहे हैं। अब कांग्रेस-आप के बीच फिलहाल गठबंधन न होने की कांग्रेस की घोषणा के बाद भाजपा ने राहत की सांस ली है।
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भाजपा को उम्मीद : कांग्रेस आप के वोट बैंक में लगाएगी सेंध
भाजपा का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशी आप के प्रत्याशियों के ही वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। इसका मुख्य कारण भाजपा का अपना कैडर है और उनके वोट एक निश्चित मतदाताओं के बीच है। वहीं आप का अधिकांश वोट बैंक कांग्रेस के खाते से ही गया था।
दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद समीकरण बदले हैं और कांग्रेस की हालत में भी सुधार हुआ है। कांग्रेस ने अपने मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी कर ली है और आप से करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता वापस कांग्रेस की तरफ झुका है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस जितना आप के मतदाताओं में सेंध लगाएगी, उतना ही भाजपा को फायदा होगा और उनके प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित होगी।
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कांग्रेस-आप के बीच गठबंधन के समय-समय पर लग रहे कयासों से भाजपा के नेता असमंजस में थे। वे भले ही ऊपरी तौर पर किसी से भी मुकाबला न होने का तर्क देकर मोदी लहर की बात कर रहे थे। लेकिन, अंदरूनी तौर पर उनका मानना था कि यदि इन दोनों ही पार्टियों के बीच गठबंधन हो गया तो कड़ा मुकाबला होगा और सात सीटों पर जीत मुश्किल है।
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गठबंधन को देखकर सातों वर्तमान सांसदों के नामों में भी बदलाव की बात चल रही थी, ताकि जिन सीटों पर सांसदों का कामकाज ठीक नहीं रहा उन पर प्रत्याशी बदले भी जा सके। भाजपा अध्यक्ष सहित अन्य नेता समय-समय पर गठबंधन को बयानबाजी भी करते रहे हैं। अब कांग्रेस-आप के बीच फिलहाल गठबंधन न होने की कांग्रेस की घोषणा के बाद भाजपा ने राहत की सांस ली है।
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भाजपा को उम्मीद : कांग्रेस आप के वोट बैंक में लगाएगी सेंध
भाजपा का मानना है कि कांग्रेस प्रत्याशी आप के प्रत्याशियों के ही वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। इसका मुख्य कारण भाजपा का अपना कैडर है और उनके वोट एक निश्चित मतदाताओं के बीच है। वहीं आप का अधिकांश वोट बैंक कांग्रेस के खाते से ही गया था।
दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद समीकरण बदले हैं और कांग्रेस की हालत में भी सुधार हुआ है। कांग्रेस ने अपने मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी कर ली है और आप से करीब 10 से 15 प्रतिशत मतदाता वापस कांग्रेस की तरफ झुका है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस जितना आप के मतदाताओं में सेंध लगाएगी, उतना ही भाजपा को फायदा होगा और उनके प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित होगी।