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Delhi HC: 'वरिष्ठता नियुक्ति की तारीख से तय होगी मेडिकल क्लियरेंस-चयन से नहीं, बैचमेट्स के बराबर हक नहीं'

Tue, 06 Jan 2026 02:47 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 06 Jan 2026 02:47 AM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट की फुल बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में अधिकारियों की सीनियरिटी निरंतर नियमित नियुक्ति की तारीख से तय होगी, न कि चयन की तारीख या मेडिकल क्लियरेंस की तारीख से।

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Nitish Katara In the Nitish Katara murder case the Delhi High Court has reserved its judgment on Vikas Yadav f
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट की फुल बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में अधिकारियों की सीनियरिटी निरंतर नियमित नियुक्ति की तारीख से तय होगी, न कि चयन की तारीख या मेडिकल क्लियरेंस की तारीख से। फैसले से उन उम्मीदवारों को झटका लगा है जिनकी नियुक्ति मेडिकल री-एग्जामिनेशन के कारण देरी से हुई थी।

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न्यायमूर्ति सी हरि शंकर, न्यायमूर्ति ज्योति सिंह और न्यायमूर्ति अजय दिग्पॉल की बेंच ने जय मंगल राय बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता 2002-03 में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के माध्यम से भर्ती हुए बीएसएफ सब-इंस्पेक्टर थे। उन्होंने दावा किया था कि रिव्यू मेडिकल एग्जामिनेशन (आरएमई) के कारण उनकी नियुक्ति में देरी हुई, जो उनकी गलती नहीं थी, इसलिए उन्हें बैचमेट्स के साथ ही सीनियरिटी मिलनी चाहिए। 
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कोर्ट ने बीएसएफ जनरल ड्यूटी कैडर (नॉन-गजेटेड) भर्ती नियम, 2002 के नियम 8 का हवाला देते हुए कहा कि सीनियरिटी निरंतर नियमित नियुक्ति से तय होती है, यानी अधिकारी के सेवा में औपचारिक रूप से शामिल होने की तारीख से। अलग-अलग तारीखों पर नियुक्ति होने पर सीनियरिटी नियुक्ति के क्रम से तय होगी।

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लालू यादव की याचिका पर तुरंत राहत नहीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो से जवाब-तलब किया है। हालांकि, न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट में चल रही मुकदमे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने लालू यादव की उस याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनके, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, पुत्र तेजस्वी प्रसाद यादव तथा अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी निर्धारित की है। मामला 2004-2009 के दौरान लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित होटलों के रखरखाव और संचालन के टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। सीबीआई का आरोप है कि इन टेंडरों में नियमों का उल्लंघन कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और बदले में लालू परिवार को लाभ मिला। 13 अक्टूबर 2025 को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव सहित 14 आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। 

विकास यादव की फरलो याचिका पर फैसला सुरक्षित

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2002 के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषी विकास यादव की 21 दिन की फरलो (अल्पकालिक अवकाश) की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति रविन्द्र डुडेजा की एकल पीठ ने विकास यादव, दिल्ली सरकार, गवाह अजय कटारा और पीड़िता की मां नीलम कटारा की ओर से पेश पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा।

विकास यादव, पूर्व सांसद डीपी यादव के बेटे हैं। उन्हें उनके चचेरे भाई विशाल यादव और सुखदेव पहलवान के साथ नीतीश कटारा की हत्या के लिए 25 वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। यह हत्या ऑनर किलिंग का मामला था, जिसमें नीतीश कटारा का विकास की बहन भारती यादव से प्रेम संबंध होने के कारण अपहरण कर हत्या की गई थी। सुनवाई के दौरान नीतीश कटारा के परिवार की ओर से अधिवक्ता संचार आनंद ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विकास यादव को फरलो देने से गवाहों की जान को खतरा है। पहले भी उसे झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश की गई थी। रिहा होने पर वह कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकता है और पीड़ित परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है। दिल्ली जेल नियम-2018 के नियम 1223 के तहत वह फरलो का हकदार नहीं है।

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