जानिए क्यों निर्भया के दोषियों को सजा मिलने में होगी अभी और देर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वसंत विहार गैंगरेप मामले को चार वर्ष बीत गए, लेकिन निर्भया को अंतिम न्याय कब मिलेगा यह तय नहीं है। ट्रायल व हाईकोर्ट ने जिस तेजी से मामले का निपटारा किया, उससे लगने लगा था कि संभवत: इसी वर्ष मामले का निपटारा हो जाएगा, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई पर ब्रेक लग गया।
ऐसे में निर्भया को मिला न्याय फिलहाल आंशिक रह गया। सर्वोच्च न्यायालय ने दोषियों की फांसी की सजा के खिलाफ अपील स्वीकार कर ली और फांसी की सजा पर रोक लगा रखी है।
16 दिसंबर 2012 को हुई इस घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लोगों की भावनाओं को देख यौन शोषण के मामलों के निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ और इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में प्रतिदिन चली।
दोषियों व उनके वकीलों के रवैये, 80 से ज्यादा गवाहों इत्यादि के कारण निचली अदालत में फैसले को नौ माह लग गए। बावजूद इसके ट्रायल कोर्ट ने 13 सितंबर 2013 को मामले में आरोपी विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, मुकेश व पवन को फांसी की सजा सुना फाइल हाईकोर्ट में भेज दी थी। पांचवें आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी।
हाईकोर्ट ने अपना फैसला 13 मार्च 2014 को दिया
दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि की फाइल हाईकोर्ट पहुंची। हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लेकर 23 सितंबर को ही दोषियों से जवाब-तलब कर लिया। हाईकोर्ट ने प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई कर मात्र छह माह में ही अपील का निपटारा कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बहाल रखा। हाईकोर्ट ने अपना फैसला 13 मार्च 2014 को दिया।
दोषी मुकेश व पवन ने तुरंत सर्वोच्च न्यायालय में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे दी। वहीं, दोषी विनय व अक्षय ठाकुर ने जुलाई में अपील दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील स्वीकार करते हुए फांसी की सजा पर रोक लगा दी। सर्वोच्च न्यायालय में करीब दो वर्ष तो सुनवाई ही शुरू नहीं हुई। अब सुनवाई शुरू हुई है, लेकिन नियमित सुनवाई जनवरी 2017 से शुरू होगी।
कुल मिलाकर पूर्ण न्याय मिलने में काफी समय लग सकता है। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय से निपटारे के बाद भी दोषियों के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का अधिकार है और राष्ट्रपति अपने विवेक के आधार पर याचिका पर फैसला लेंगे। उसके बाद फिर भी दोषियों के पास अदालत में जाने का अधिकार है। यानी दोषियों को फांसी की सजा मिलना जल्द संभव नहीं नजर आ रहा।
कब रुकेंगी रेप की घटनाएं
राजधानी में रोजाना रेप, गैंगरेप (विशेषकर बच्चियों से) की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। राजनीतिक पार्टियां ऐसी घटनाओं के बाद एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की बौछार कर देती हैं और कुछ प्रदर्शन कर भड़ास भी निकाल लेती हैं, लेकिन इन घटनाओं को जड़ से रोकने की दिशा में कोई प्रयासरत नहीं है। वसंत विहार गैंगरेप मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। देश को हिला देने वाली इस घटना की चर्चा विदेशों में भी हुई। बावजूद इसके महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की दिशा में किसी का ध्यान नहीं है।
अभी तक नहीं हुई पुलिसकर्मियों की भर्ती
वसंत विहार गैंगरेप के बाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर दिल्ली पुलिस में 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर जोर दिया। केंद्र ने भी 14 हजार पुलिसकर्मियों की भर्ती पर हामी भर दी, लेकिन बाद में यू-टर्न ले लिया। केंद्र ने पुलिसकर्मियों की भर्ती के बाद प्रति वर्ष 483 करोड़ रुपये की राशि वहन करने से इनकार करते हुए कहा कि इतनी अधिक राशि उसके पास नहीं है। अब सरकार ने मात्र 3792 पुलिसकर्मियों की भर्ती पर हामी भरी है, लेकिन भर्ती शुरू नहीं हो पाई।
एफएसएल लैब, सीसीटीवी कैमरे नहीं
हाईकोर्ट ने एफएसएल लैब की संख्या में बढ़ोतरी करने के लिए भी कहा था। मगर घटना के चार वर्ष बाद भी दिल्ली सरकार पूरी तरह से लैब की संख्या भी नहीं बढ़ा पाई। वहीं, अभी तक एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा। मामले में अदालत में हर बार दिल्ली पुलिस व आप सरकार एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं।