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निर्भया मामले में सुनवाई पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

Sun, 02 Feb 2020 03:54 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Sun, 02 Feb 2020 03:54 PM IST
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Nirbhaya Case latest news hearing in Delhi High court Tushar Mehta also present
nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने रविवार को निर्भया के दोषियों की फांसी को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच करीब सवा तीन घंटे तक हुई बहस के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। दोषियों की फांसी पर गत 31 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती देते हुए केंद्र ने याचिका शनिवार को दायर की थी। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, दोषी मुकेश की वकील रेकेबा जॉन्स और अन्य दोषियों के वकील एपी सिंह ने मामले की पैरवी की। 

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न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ के समक्ष दोपहर तीन बजे सुनवाई शुरू हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सभी दोषी कानून के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जब दोषियों को फांसी देने की तारीख नजदीक आती है, वे उससे एक दिन पहले कोई ना कोई याचिका दायर करके अपनी सजा टलवाते जा रहे हैं।
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उन्होंने दलील दी कि चारों दोषियों ने फांसी की सजा को टालने के लिए जानबूझकर देरी करने का प्रयास किया है। उन्होंने पीठ को बताया कि अभी तक दोषी पवन गुप्ता की ओर से न तो क्यूरेटिव याचिका और न ही दया याचिका दायर की गई है, जो यह दिखाता है कि दोषी जानबूझकर मामले टलवा रहे हैं। 

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तेलंगाना में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म मामले का हुआ जिक्र

मेहता ने कहा कि दोषियों की सजा में देरी से लोगों का न्यायपालिका से विश्वास उठ रहा है। उन्होंने तेलंगाना में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म करने वाले आरोपियों के एनकाउंटर का हवाला देते  कहा कि लोगों ने इस घटना पर जश्र मनाया था, यह पुलिस के लिए नहीं बल्कि न्याय के लिए किया गया।

उन्होंने कहा कि किसी दोषी की क्यूरेटिव और दया याचिकाएं खारिज हो जाती हैं तो उसे फांसी दी जा सकती है। इस मामले में देरी होने से संस्थान की विश्वसनीयता और उसकी शक्तियां दांव पर लगी हैं। इसलिए दोषियों को कानून का दुरुपयोग करने से रोका जाए और पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा सजा पर लगाई गई रोक के फैसले को निरस्त करके सभी को अलग-अलग फांसी देने के निर्देश दिए जाएं।

न्याय में जल्दबाजी न्याय को दफन करना

बचाव पक्ष की ओर से दोषियों पवन, अक्षय और विनय के वकील एपी सिंह ने दलील दी कि सर्वोच्च न्यायालय और संविधान द्वारा मृत्युदंड को निष्पादित करने के लिए कोई निर्धारित समय नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसी मामले में दोषियों को फांसी देने के लिए इतनी जल्दी क्यों की जा रही है। न्याय में जल्दबाजी न्याय के दफन होने जैसा है। उन्होंने पीठ से कहा कि दोषी गरीब, ग्रामीण और दलित परिवारों से संबंध रखते हैं। उन्होंने दलील दी कि कानून में अस्पष्टता का खामियाजा दोषियों को भुगतना पड़ सकता है।

मैं भयानक हूं, फिर भी आखिरी सांस तक उपयोग कर सकता हूं अधिकार

दोषी मुकेश की पैरवी कर रहीं वकील रेबेका जॉन ने दलील दी कि केंद्र की कल ही नींद क्यों खुली। इससे पहले दोषियों को फांसी देने के लिए कोई याचिका दायर क्यों नहीं की गई। उन्होंने मुकेश की ओर से अभियोजन पक्ष के वकील तुषार मेहता से कहा कि आप मेरे कानूनी अधिकार का उपयोग करने के लिए मेरी निंदा नहीं कर सकते। संविधान ने मुझे अनुमति दी है कि मैं आखिरी सांस तक अपने सभी विकल्पों का उपयोग कर सकता हूं। परिस्थितियों में बदलाव के साथ मुकेश के पास दया याचिका का अधिकार है।

उन्होंने मुकेश की ओर से कहा कि मैं भयानक व्यक्ति हूं, मैंने सबसे खराब अपराध की कल्पना की है, लेकिन मैं अभी भी अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षण का हकदार हूं। मृत्युदंड की सजा मिलने के बावजूद मैं अधिकार रखता हूं कि मुझसे उचित व्यवहार किया जाए। उन्होंने कहा कि दोषियों को एक समग्र आदेश द्वारा सजा सुनाई गई थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा था। उन्होंने कहा कि एक अपराध में मिले दंड के लिए एक साथ ही फांसी दी जाए। तिहाड़ जेल नियमों के तहत एक अपराध में शामिल दोषियों को एक साथ ही फांसी देने का प्रावधान है और इस नियम को बदला नहीं जा सकता।

उल्लेखनीय है कि निर्भया के चारों दोषियों विनय, पवन, मुकेश और अक्षय को एक फरवरी को फांसी दी जानी थी, लेकिन राष्ट्रपति के पास दोषी विनय की दया याचिका लंबित होने के कारण 31 जनवरी को पटियाला हाउस कोर्ट ने अगले आदेश तक फांसी पर रोक लगा दी थी। 

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