फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Nirbhaya Case: Central Government moves SC against the judgment of Delhi High Court

निर्भया केसः हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार

Wed, 05 Feb 2020 05:01 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 05 Feb 2020 05:01 PM IST
विज्ञापन
Nirbhaya Case: Central Government moves SC against the judgment of Delhi High Court
Nirbhaya Case - फोटो : अमर उजाला/सोशल मीडिया

निर्भया के दोषियों की फांसी पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने हाईकोर्ट में दोषियों की फांसी पर रोक के निर्णय को चुनौती दी थी। जिसमें बुधवार(5 फरवरी) को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले को रद्द करने से इनकार कर दिया।

विज्ञापन


इसके बाद केंद्र और दिल्ली सरकार(उपराज्यपाल के माध्यम से) ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव एप्लीकेशन(एसएलपी) डालते हुए दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की अपील की है। 
विज्ञापन


इस याचिका में कहा गया है कि जिन दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं उनकी फांसी में देरी नहीं होनी चाहिए। बता दें कि आज दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को अपने कानूनी विकल्प इस्तेमाल करने के लिए अंतिम सात दिन दिए हैं। इसके बाद कानूनी रूप से जो प्रक्रिया होती है उसका पालन किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

आज अदालत में क्या-क्या हुआ

  • जस्टिस कैत ने कहा कि गृहमंत्रालय यह याचिका डालने के लिए सक्षम है। दिल्ली कैदी नियम 834 और 836 में दया याचिका के बारे में नहीं लिखा है।
  • जस्टिस कैत ने कहा कि मैं ट्रायल कोर्ट की राय से सहमत नहीं हूं कि कारागार नियमों में 'आवेदन' शब्द एक सामान्य शब्द है जिसमें दया याचिका भी शामिल होगी।
  • जस्टिस कैत ने आगे कहा कि सभी दोषी बर्बरता से दुष्कर्म और हत्या करने के दोषी पाए गए हैं जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया था।
  • ये बात कम से कम यह विचार करने के लिए प्रासंगिक है कि क्या मौत की सजा के निष्पादन में देरी दोषियों की देरी की रणनीति के कारण होती है।
  • जस्टिस कैत आगे बोले कि मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि सभी दोषियों ने पुनर्विचार याचिका दायर करने में 150 दिन से भी ज्यादा का समय लिया। अक्षय ने तो 900 दिन से भी ज्यादा समय के बाद अपनी पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
  • सभी दोषी अनुच्छेद 21 का सहारा ले रहे हैं जो उन्हें आखिरी सांस तक सुरक्षा प्रदान करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट में भी दोषियों के भाग्य का फैसला उसी आदेश से किया गया है। मेरी राय है कि उनके सभी डेथ वारंट को एक साथ निष्पादित किया जाना है।
  • जस्टिस कैत ने आगे कहा कि दोषियों ने सजा में देरी करने की रणनीति अपनाई है। इसलिए मैं सभी दोषियों को 7 दिनों के भीतर उनके कानूनी उपचार के लिए निर्देशित करता हूं, जिसके बाद अदालत को उम्मीद है कि अधिकारियों को कानून के अनुसार काम करना होगा। इसके बाद अदालत ने पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश से अलग जाकर फैसला लेने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed