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Delhi: एनएचआरसी ने बाल मजदूरी मामले में दिल्ली पुलिस और प्रशासन को नोटिस भेजा, दो सप्ताह में जवाब देने को कहा

Wed, 10 Jul 2024 07:41 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 10 Jul 2024 07:41 AM IST
सार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बाल मजदूरी मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैं। 

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NHRC sent notice to Delhi Police and administration in child labor case
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने बाल मजदूरी मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर कार्यवाही पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैं। 

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बता दें कि 5 जुलाई को दिल्ली के उत्तर-पश्चिम के सरस्वती विहार से नौ लड़कियों और 14 लड़कों सहित 23 बाल मजदूरों को बचाया गया था। एनएचआरसी ने कहा है कि बच्चों को आस-पास के राज्यों से लाकर विभिन्न कारखानों में काम कराया जा रहा था। इसे लेकर आयोग ने कड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश प्रशासन को विभिन्न निर्देश जारी किए हैं।
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विस्तृत रिपोर्ट में दिल्ली सरकार और पुलिस आयुक्त को दो सप्ताह के भीतर यह बताना है कि बच्चों के पुनर्वास के लिए क्या क्या कदम उठाए गए। शिक्षा और परिवारों से मिलाने के लिए किसी कार्य योजना पर अमल किया जा रहा है कि नहीं। यदि कोई बंधुआ मजदूर के रूप में काम कर रहा है, तो उस दिशा में कानूनी कार्रवाई करने का क्या प्रावधान है। आयोग ने सभी औद्योगिक इलाकों का सर्वे कराकर सुनिश्चित करने को कहा है कि वहां बाल मजदूरी तो नहीं की जा रही है। यदि ऐसा है तो नियोक्ता के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है। मामले में उत्तर पश्चिम दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट को भी शामिल किया गया है।
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जींद सिविल अस्पताल मामले में  हरियाणा सरकार को नोटिस
एक अन्य मामले में आयोग ने हरियाणा के जींद में सिविल अस्पताल की खराब चिकित्सा व्यवस्था पर हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा है कि डॉक्टरों के 55 स्वीकृत पद हैं। इनमें से केवल 19 पद भरे हैं। हर दिन करीब 2 हजार मरीज अस्पताल आते हैं। हालांकि, उनमें से अधिकांश को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि अस्पताल में चिकित्सा उपकरण और दवाइयों का अभाव है। यही नहीं बंदरों के आतंक के चलते अलग से तीमारदारों और मरीजों परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आयोग ने कहा कि यदि यह सभी बातें सही हैं तो रोगियों के स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर मसला है। यह नागरिकों के मूल अधिकारों पर भी कुठाराघात है। आयोग ने राज्य सरकार से कहा है कि वह सिविल अस्पताल में सुधार सुनिश्चित करें। डॉक्टरों की तुरंत नियुक्ति हो। मरीजों को उपचार मिले, उन्हें दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।


हेल्पलाइन नंबर 1098 का प्रचार करने का निर्देश: हाईकोर्ट
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों द्वारा भीख मांगने की घटनाओं से निपटने के लिए बाल हेल्पलाइन नंबर 1098 का प्रचार करने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन वन्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने बाल भीख मांगने के खिलाफ एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया कि कोई भी व्यक्ति इस तरह की घटना की सूचना हेल्पलाइन पर दे सकता है और इसके लिए एक तंत्र बनाया गया है, जिसके तहत बच्चे को परामर्श दिया जाएगा और उसे उसके पैतृक घर या बाल देखभाल संस्थान में भेजा जाएगा।

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