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Delhi NCR News: गोमती किनारे निर्माण पर एनजीटी की रोक, एलडीए समेत संबंधित पक्षों को नोटिस
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गंगा संरक्षण नियमों के उल्लंघन का मामला; एनएमसीजी की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी निर्माण पर अंतरिम रोक, 25 अगस्त को अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गोमती नदी के किनारे गंगा संरक्षण नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश गोमती किनारे तटबंध, चार लेन सड़क और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि गोमती, गंगा की सहायक नदी है, इसलिए उस पर वर्ष 2016 के गंगा संरक्षण नियम लागू होते हैं। नियमों के अनुसार नदी, नदी तल और बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में किसी भी निर्माण से पहले नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान एनजीटी की पीठ ने कहा कि गंगा संरक्षण नियमों के तहत नदी के किनारों और फ्लडप्लेन को निर्माण मुक्त रखा जाना चाहिए। पुल, तटबंध, सड़क या नदी क्षेत्र को प्रभावित करने वाली किसी भी परियोजना के लिए एनएमसीजी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों की अनदेखी कर गोमती किनारे निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में इस संबंध में एनएमसीजी से शिकायत की गई थी। इसके बाद एनएमसीजी ने लखनऊ के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका।
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी अदालत में कहा कि गंगा संरक्षण नियमों के विपरीत किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद एनजीटी ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी बताया कि गोमती नदी के फ्लडप्लेन की सीमा निर्धारण से जुड़ा एक अन्य मामला पहले से लंबित है। दोनों मामलों की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गोमती नदी के किनारे गंगा संरक्षण नियमों का उल्लंघन कर किए जा रहे किसी भी निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश गोमती किनारे तटबंध, चार लेन सड़क और बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि गोमती, गंगा की सहायक नदी है, इसलिए उस पर वर्ष 2016 के गंगा संरक्षण नियम लागू होते हैं। नियमों के अनुसार नदी, नदी तल और बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में किसी भी निर्माण से पहले नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
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सुनवाई के दौरान एनजीटी की पीठ ने कहा कि गंगा संरक्षण नियमों के तहत नदी के किनारों और फ्लडप्लेन को निर्माण मुक्त रखा जाना चाहिए। पुल, तटबंध, सड़क या नदी क्षेत्र को प्रभावित करने वाली किसी भी परियोजना के लिए एनएमसीजी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है।
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याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इन प्रावधानों की अनदेखी कर गोमती किनारे निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में इस संबंध में एनएमसीजी से शिकायत की गई थी। इसके बाद एनएमसीजी ने लखनऊ के जिलाधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका।
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी अदालत में कहा कि गंगा संरक्षण नियमों के विपरीत किसी भी निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद एनजीटी ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। ट्रिब्यूनल ने यह भी बताया कि गोमती नदी के फ्लडप्लेन की सीमा निर्धारण से जुड़ा एक अन्य मामला पहले से लंबित है। दोनों मामलों की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।