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यमुना नदी को लूट रहे माफिया: NGT ने उत्तरी दिल्ली और गाजियाबाद के DM से मांगा जवाब, जानें क्या है माजरा

Thu, 19 Dec 2024 08:43 PM IST
अनुज कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 19 Dec 2024 08:43 PM IST
सार

राजधानी दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश में यमुना में अवैध रेत खनन के मामले में एनजीटी ने निकायों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने अलीपुर और गाजियाबाद के पंचयारा के बीच डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन पर एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था।

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NGT seeks response from dm of north Delhi and Ghaziabad on illegal sand mining in Yamuna river
एनजीटी - फोटो : संवाद

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना नदी के डूब क्षेत्र में अवैध रेत खनन की कथित घटनाओं पर उत्तरी दिल्ली और गाजियाबाद के जिलाधिकारियों सहित प्राधिकारियों से जवाब मांगा है। अधिकरण ने कहा, नदी के तट को रेत माफिया लूट रहे हैं। ऐसे में कोर्ट ने उत्तरी दिल्ली और गाजियाबाद के जिलाधिकारियों व केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय को प्रतिवादी बनाया। 

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साथ ही, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिवों को भी पक्षकार बनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, मामला जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम के उल्लंघन है। मामले की सुनवाई 14 अप्रैल, 2025 को होगी।
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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने अलीपुर और गाजियाबाद के पंचयारा के बीच डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन पर एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था। 
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रिपोर्ट में एनजीटी को बताया गया कि क्षेत्र में रेत खनन कर्ता नदी के पार अस्थायी सड़कें बना रहे हैं, जिससे वे उत्खनन मशीनों को ले जा सकते हैं। साथ ही, बाढ़ क्षेत्र में खनन कार्य कर सकते हैं। यही नहीं, इन सड़कों का निर्माण अक्सर नदी के तल पर लकड़ी के तख्तों और रेत की बोरियों को रखकर किया जाता है, जो किसी भी खनन पट्टे के तहत अधिकृत नहीं हैं। इससे नदी के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को काफी नुकसान होता है।

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