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लाउड स्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका पर बोली एनजीटी, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर हो कार्रवाई

Mon, 18 Feb 2019 05:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 18 Feb 2019 05:42 PM IST
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ngt says those who do not follow rules and spread noise pollution shall be punished
फाइल फोटो

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के खिलाफ एक मामले में कहा कि कानून के पालन के लिए सिर्फ आदेश जारी करना काफी नहीं है बल्कि अधिकारियों को नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।

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मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के अवैध इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने यह टिप्पणी की। याचिका में कहा गया कि लाउडस्पीकरों की वजह से पूर्वी दिल्ली में इसके आसपास रहने वाले बाशिंदों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। 
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि कानून का पालन कराने के लिए अधिकारियों का काम केवल आदेश जारी करना नहीं होना चाहिए। कानून का उल्लंघन होने पर अभियोजन को जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए और नुकसान की भरपाई के कदम उठाने चाहिए, जो कि नहीं किया गया।
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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल के नेतृत्व वाली पीठ ने पूर्वी और पश्चिमी जिलों के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) को अपने-अपने इलाके में ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए कार्ययोजना भी सौंपने को कहा। पीठ ने उन्हें 14 मार्च को सुनवाई के समय हाजिर रहने को कहा है।

डीसीपी की ओर से जारी हलफनामे पर भी असंतोष जताया

अधिकरण ने ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए उठाए गए कदमों को लेकर डीसीपी (पूर्वी) की ओर से जारी हलफनामे पर भी असंतोष जताया। 

एनजीटी की पीठ एनजीओ ‘अखंड भारत’ की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐसे स्थानों पर लाउडस्पीकर के अवैध इस्तेमाल से आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

याचिका में कहा गया कि कुछ मस्जिदों की गतिविधियां पर्यावरण (संरक्षण) कानून, 1986 और ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 का उल्लंघन है।

याचिका के मुताबिक, ये सभी धार्मिक स्थान आवासीय स्कूल और अस्पताल जैसे साइलेंट जोन में हैं और लाउडस्पीकर की ध्वनि तय सीमा को पार कर जाती है।

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