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यमुना मामले रवि शंकर को NGT की फटकार, कहा- किसने दी बेतुके बयानबाजी की छूट?

Fri, 21 Apr 2017 12:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 21 Apr 2017 12:13 PM IST
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NGT rebuked sri sri ravishankar on yamuna riverbed damage issue
Ravi shankar

आर्ट ऑफ लिविंग (एनओएल) के आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना डूब क्षेत्र मामले में बयानबाजी के लिए कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान पीठ ने एओएल की ओर से जारी किए जा रहे बयानों को लेकर कहा कि कहा कि आपको जिम्मेदारी का कोई एहसास नहीं है। आखिर आपको किसने यह छूट या इजाजत दी है कि आपकी जो इच्छा हो आप वह बोलें। 

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एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद श्री श्री रविशंकर ने सार्वजनिक तौर पर जारी एक बयान में कहा था कि यमुना डूब क्षेत्र में नुकसान के लिए एनजीटी और केंद्र जिम्मेदार हैं। इसके लिए एनजीटी पर ही जुर्माना लगाया जाना चाहिए। मामले पर अगली सुनवाई 9 मई को होगी।    
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची मनोज मिश्रा के मामले पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान याची की ओर से पेश एडवोकेट संजय पारीख ने श्री श्री के उस बयान को पढ़कर सुनाया, जिसमें यमुना डूब क्षेत्र के नुकसान का कसूरवार एनजीटी को ही ठहराया गया है। 
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श्री श्री ने अपने बयान में यह सवाल भी उठाया था कि यदि यमुना डूब क्षेत्र के नुकसान का भय था तो आखिर बीते वर्ष मार्च में तीन दिवसीय विश्व संस्कृति महोत्सव के लिए प्राधिकरणों के जरिए अनुमति क्यों दी गई।

एओएल ने एनजीटी पर ही लगाए थे आरोप

NGT rebuked sri sri ravishankar on yamuna riverbed damage issue
ravi shankar

एडवोकेट संजय पारीख ने कहा कि मामले की सुनवाई के बीच एओएल अपने स्तर से ऊपर उठकर एनजीटी पर ही आरोप-प्रत्यारोप लगा रहा है। श्री श्री ने यह बयान न सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था बल्कि मीडिया को भी भेजा था।       

वहीं, एओएल की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें हाल ही में सार्वजनिक हुई एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पर आपत्ति है। इस पर पीठ ने कहा कि रिपोर्ट पर एक हफ्ते के भीतर सभी पक्ष अपना जवाब दाखिल करें। इसके बाद दो हफ्तों में आपत्ति भी दाखिल की जाए।
     
मालूम हो कि एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एओएल के कार्यक्रम से यमुना डूब क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है वहीं कमेटी ने एओएल पर 42 करोड़ रुपये जुर्माना लगाने की सिफारिश भी की थी।       

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