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Delhi NCR News: एनजीएमए का प्रिंटमेकिंग स्टूडियो शुरू, छापांकन से भारतीय कला को नई उड़ान
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में आधुनिक कला के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) ने अपना पहला प्रिंटमेकिंग स्टूडियो शुरू किया है। संस्कृति मंत्रालय के अधीन इस संस्थान की यह पहल भारतीय दृश्य कला परिदृश्य में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। इसकी शुरुआत ‘छापांकन’ नामक सात दिवसीय कार्यशाला के साथ की गई है। एनजीएमए के महानिदेशक डॉ. संजीव किशोर गौतम के नेतृत्व में शुरू इस पहल का उद्देश्य प्रिंटमेकिंग कला को नई पहचान देना है। उन्होंने कहा कि प्रिंटमेकिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि प्रयोग और सृजनात्मकता का माध्यम है, जो कलाकारों को बहुआयामी अभिव्यक्ति देता है।
पहली बार राष्ट्रीय संग्रहालय में समर्पित स्टूडियो-
एनजीएमए का यह स्टूडियो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जिसमें भारत में निर्मित कस्टम प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की गई है। ‘छापांकन’ कार्यशाला में देशभर से आए कलाकारों ने भाग लिया है, जिनमें अनुपम सूद, अजीत सील, हनुमान कांबली और आर. एम. पलनियप्पन शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, भारत में प्रिंटमेकिंग की परंपरा वुडब्लॉक प्रिंटिंग से लेकर आधुनिक तकनीकों तक फैली है। सोमनाथ होरे और के. जी. सुब्रमण्यम जैसे कलाकारों ने इसे नई पहचान दी। एनजीएमए की यह पहल इस कला को फिर से मुख्यधारा में लाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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नई दिल्ली। राजधानी में आधुनिक कला के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (एनजीएमए) ने अपना पहला प्रिंटमेकिंग स्टूडियो शुरू किया है। संस्कृति मंत्रालय के अधीन इस संस्थान की यह पहल भारतीय दृश्य कला परिदृश्य में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है। इसकी शुरुआत ‘छापांकन’ नामक सात दिवसीय कार्यशाला के साथ की गई है। एनजीएमए के महानिदेशक डॉ. संजीव किशोर गौतम के नेतृत्व में शुरू इस पहल का उद्देश्य प्रिंटमेकिंग कला को नई पहचान देना है। उन्होंने कहा कि प्रिंटमेकिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि प्रयोग और सृजनात्मकता का माध्यम है, जो कलाकारों को बहुआयामी अभिव्यक्ति देता है।
पहली बार राष्ट्रीय संग्रहालय में समर्पित स्टूडियो-
एनजीएमए का यह स्टूडियो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है, जिसमें भारत में निर्मित कस्टम प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की गई है। ‘छापांकन’ कार्यशाला में देशभर से आए कलाकारों ने भाग लिया है, जिनमें अनुपम सूद, अजीत सील, हनुमान कांबली और आर. एम. पलनियप्पन शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, भारत में प्रिंटमेकिंग की परंपरा वुडब्लॉक प्रिंटिंग से लेकर आधुनिक तकनीकों तक फैली है। सोमनाथ होरे और के. जी. सुब्रमण्यम जैसे कलाकारों ने इसे नई पहचान दी। एनजीएमए की यह पहल इस कला को फिर से मुख्यधारा में लाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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