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धौला कुआं गैंगरेप: मामले में बड़ा खुलासा, फैसला टला

Mon, 22 Sep 2014 10:22 PM IST
Updated Mon, 22 Sep 2014 10:22 PM IST
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new twist on dhaula kuwan gang rape case, police

बचाव पक्ष ने कहा कि डॉक्टरी जांच के दौरान 24 नवंबर 2010 को पीड़िता के शरीर से डॉ. कविता सोनी ने 11 सैंपल लिए थे। इनमें 10 को एक बॉक्स में रखा था जबकि कपड़े व अंडर गारमेंट अलग लिफाफे में रखे गए थे।

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जांच अधिकारी ने उसी दिन सफदरजंग अस्पताल में सीजर मेमो बनाया और 12 सैंपल का जिक्र किया। इनमें 12वां सैंपल पीड़िता के खून के नमूने का था।

जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राजकुमारी का दावा था कि यह सीजर मेमो अस्पताल में बनाया गया लेकिन इस पर डॉक्टर या किसी अन्य स्टाफ का हस्ताक्षर नहीं है। पुलिस ने सीएफएसएल में सैंपल जमा कराने की रसीद भी रिकॉर्ड में पेश नहीं की। केवल इसकी फोटोकॉपी पेश की गई।
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अधिवक्ता श्रीवास्तव ने कहा कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी के बाद उसकी पैंट पर पीड़िता का खून लगाया गया और उसका सैंपल लिया गया। जांच के दौरान पीड़िता ने किसी भी बाहरी चोट से इंकार किया था।
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मूल बयान में डॉक्टर कविता सोनी का कहना था कि  उन्होंने केवल दस लिफाफे बॉक्स में रखे थे लेकिन 7 फरवरी 2012 को कहा कि 11 लिफाफे बॉक्स में रखे थे। जब बॉक्स खोला गया तो उसमें 12 लिफाफे निकले। इसका अभियोजन के पास कोई जवाब नहीं था।

मंगोलपुरी में हुआ था गैंगरेप

new twist on dhaula kuwan gang rape case, police

23-24 नवंबर 2010 की रात पीड़िता दोस्तों के साथ घर लौट रही थी। इस दौरान आरोपी शमशाद, उस्मान उर्फ काले, शाहिद उर्फ छोटा बिल्ली, इकबाल उर्फ बड़ा बिल्ली व कमरूद्दीन उर्फ मोबाइल ने उसका अपहरण कर लिया और मंगोलपुरी क्षेत्र में गैंगरेप कर उसे सुनसान सड़क पर फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपियों को मेवात से गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी पर उठा था सवाल
पुलिस के मुताबिक, उसने आरोपी उस्मान को 1 दिसंबर 2010 को हरियाणा के पलवल में धौज गांव के नजदीक उसके दोस्त शमशाद के साथ गिरफ्तार किया था। वहीं, आरोपी का कहना था कि उसे पुलिस ने उसके गांव मीरपुर तहसील हथीन जिला पलवल से रात में उठाया था।

पुलिस के अनुसार, उस्मान की गिरफ्तारी के बाद इंस्पेक्टर राजकुमारी ने उसके भाई इस्लामुद्दीन को मोबाइल पर अपने मोबाइल से सूचना दी थी। बचाव पक्ष की जिरह के दौरान राजकुमारी ने अपने मोबाइल नंबर का खुलासा नहीं किया। इसके अलावा उसकी टीम ने रेड के लिए जाने-आने के रूट पर भी विरोधाभासी बयान दिया था।

मामले में आया नया मोड़

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दिल्ली में बीपीओ कर्मी से गैंगरेप मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले में फैसले के लिए सोमवार की तारीख तय की थी।

फैसला आने से पहले बचाव पक्ष ने लिखित तर्क पेश कर सबूतों से छेड़छाड़ व इन्हें प्लांट किए जाने का आरोप लगाकर जांच अधिकारी व सफदरजंग की डॉक्टर को कठघरे में खड़ा कर दिया। इन आरोपों पर बहस बुधवार को होगी।

द्वारका जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट के सामने आरोपी उस्मान उर्फ काले के वकील अमित श्रीवास्तव ने पुलिस पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि पीड़िता के खून के नमूने बाद में प्लांट किए गए। सफदरजंग अस्पताल की डॉक्टर व अभियोजन पक्ष की गवाही पुलिस की करतूत को छिपाने के लिए बदल दी गई।

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