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लापता बच्चों का डाटा रखने वाला नया सॉफ्टवेयर, तलाश में मिलेगी मदद

Sat, 29 Oct 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 29 Oct 2016 12:01 AM IST
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new software to detect missing kids
देशभर से लापता बच्चों की पहचान और उनका डाटा रखने के लिए साफ्टवेयर बनाया जा रहा है। इसे बनाने में निजी कंपनियों की मदद ली जाएगी। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी है।
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अदालत ने हाल ही में राजधानी से लापता हो रहे बच्चों के मुद्दे पर सरकार को ऐसा सॉफ्टवेयर बनाने की सलाह दी थी, जिससे बच्चों के चेहरे व अन्य जानकारी का मिलान कम समय में आसानी से हो सके।
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इससे बच्चे मिलने के बाद तुंरत उसके परिजनों के बारे में पता लगाया जा सकेगा। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना व न्यायमूर्ति सुनीता गुप्ता की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में बदलाव के बाद अब लापता बच्चों के मद्देनजर स्टैंडर्ड ऑपरेशन प्रोसिजर (एसओपी) में भी बदलाव किया गया है।
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एक्ट में बदलाव के बाद अब किसी व्यक्ति, पुलिसकर्मी, नर्सिंग होम आदि को लापता बच्चा मिलने पर संबंधित सभी एजेंसियों को बताना अनिवार्य है। एसओपी के तहत लापता बच्चों की तलाश, तलाश में जुटे पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

2015 में दिल्ली से करीब 7928 बच्चे लापता हुए थे

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इससे पूर्व दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि 2015 में दिल्ली से करीब 7928 बच्चे लापता हुए थे और यह संख्या 2014 से 1500 अधिक थी। अदालत को बताया गया कि दिल्ली से एक बच्चा 31 अगस्त 2015 को लापता हुआ।

उसी दिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने उस बच्चे को हिंडन एयर बेस के पास से बरामद कर लिया। लेकिन इस बच्चे को उसके घर पहुंचाने में पुलिस को दस माह का लंबा समय लगा, क्योंकि दिल्ली पुलिस ने जानकारी जिपनेट पर अपलोड की थी और उप्र पुलिस ने उसे गाजियाबाद स्थित बालगृह भेज दिया।

अब ऐसा कोई सिस्टम नहीं है कि सॉफ्टवेयर तुरंत बता दे कि बच्चा कहां से लापता है। गौरतलब है कि अभी तक दिल्ली पुलिस व अन्य एजेंसियां बच्चों के लापता व उनके मिलने पर जिपनेट (जोनल इंटिग्रेटिड पुलिस नेटवर्क) पर इसकी जानकारी अपलोड करतीं हैं लेकिन इसमें नाम, उम्र, एफआईआर नंबर, लापता की तिथि व कद, काठी के लिए जानकारी देने के कम विकल्प होते हैं।
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