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MCD: सदन में नया-नया होगा नजारा, 200 नए पार्षद पहली बार उठाएंगे आवाज
Thu, 08 Dec 2022 10:42 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 08 Dec 2022 10:42 PM IST
सार
एमसीडी में 60 पार्षद भीष्म पितामह की भूमिका में रहेंगे। आम आदमी पार्टी, भाजपा व कांग्रेस के इन पार्षदों पर अपने दलों के पार्षदों के कार्य कराने के साथ-साथ उनको एमसीडी की बारीकी सिखाने की भी जिम्मेदारी रहेगी।
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एमसीडी में आप की जीत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एमसीडी के नए सदन में पूरी तरह नजारा भी नया-नया नजर आएगा। करीब दो सौ पार्षद पहली बार सदन के सदस्य बने हैं। लिहाजा एमसीडी का सदन नए चेहरों से सराबोर होगा। भाजपा ने अपने पूर्व पार्षदों को टिकट देने में काफी कंजूसी बरती थी। आम आदमी पार्टी के पास पूर्व पार्षदों की संख्या काफी कम थी और कांग्रेस के पास भी पूर्व पार्षद अब कम ही रह गए हैं। कांग्रेस के काफी पूर्व पार्षद आम आदमी पार्टी और भाजपा में शामिल हो गए थे। तीनों दलों के उम्मीदवारों और निर्दलीय के तौर पर 120 पूर्व पार्षदों ने चुनाव लड़ा था। इनमें से 50 प्रतिशत पार्षदों को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
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एमसीडी चुनाव में भाजपा ने 70 पूर्व पार्षदों को टिकट दिया था, जबकि आप ने 30 पूर्व पार्षदों पर दांव लगाया था। वहीं, कांग्रेस ने अपने 12 पूर्व पार्षदों को चुनाव लड़ाया था। इसके अलावा आठ पूर्व पार्षदों ने निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के 37, आप के 22 और कांग्रेस का केवल एक ही पूर्व पार्षद चुनाव जीत सका। भाजपा से बागी होकर निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ी एक महिला पूर्व पार्षद जीत हासिल कर गई। आप के मुकेश गोयल छठी बार, प्रीति चौथी, आले इकबाल, मोहम्मद सादिक, मीनाक्षी चंदेला व हेमचंद गोयल तीसरी बार पार्षद बने हैं, जबकि आप के 16 उम्मीदवार दूसरी बार पार्षद बने हैं। वहीं भाजपा के गुलाब सिंह राठौर, प्रवेश वाही, रेखा गुप्ता, रेनु अग्रवाल, नीलम पहलवान, चंद्रप्रकाश, नीमा भगत, सत्या शर्मा तीसरी बार पार्षद बने हैं। इसके अलावा भाजपा के 30 उम्मीदवार दूसरी बार एमसीडी के सदन में पहुंचे हैं। कांग्रेस के मनदीप सिंह व निर्दलीय मीना यादव भी दूसरी बार पार्षद बने है।
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एमसीडी में 60 पार्षद भीष्म पितामह की भूमिका में होंगे
एमसीडी में 60 पार्षद भीष्म पितामह की भूमिका में रहेंगे। आम आदमी पार्टी, भाजपा व कांग्रेस के इन पार्षदों पर अपने दलों के पार्षदों के कार्य कराने के साथ-साथ उनको एमसीडी की बारीकी सिखाने की भी जिम्मेदारी रहेगी। इसके अलावा उनके कंधों पर ही एमसीडी में अपने दल को विरोधी दल पर भारी रखने और विरोधी दल को घेरने का भार रहेेगा। खासतौर पर आप के मुकेश गोयल व हेमचंद गोयल पर यह जिम्मेदारी रहेगी, क्योंकि वह एमसीडी में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। भाजपा में कमलजीत सहरावत, नीमा भगत, सत्या शर्मा, रेखा गुप्ता, प्रवेश वाही आदि को जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी। वह एमसीडी में विभिन्न बड़े पदों पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। कांग्रेस में मनदीप सिंह का सारा भारी उठाना पड़ेगा।
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भाजपा के पास अनुभवी पार्षदों की फौज
आप ने भले ही जीत का परचम फहरा दिया है, लेकिन एमसीडी में उसकी राह आसान नहीं है। अनुभव के मामले में आप के पार्षद भाजपा के पार्षदों के सामने बौने दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि हाल ही में जीते उसके पार्षदों में से एक-दो ही अनुभवी हैं, जबकि भाजपा के पास अनुभवी पार्षदों की बड़ी फौज है। आप के पार्षदों में केवल मुकेश गोयल ही एमसीडी के अच्छे जानकार है। वह स्थायी समिति के अध्यक्ष के अलावा नेता प्रतिपक्ष व शिक्षा समिति के सदस्य रहे हैं। भाजपा के पार्षदों में शामिल कमलजीत सहरावत, नीमा भगत, सत्या शर्मा व राजा इकबाल सिंह महापौर रह चुके हैं। इसके अलावा कमलजीत सहरावत नेता सदन की भी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। इसके अलावा प्रवेश वाही और शिखा राय स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे हैं। शिखा राय को नेता सदन की भी जिम्मेदारी मिली थी।